बीजेपी ने चार राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बदले हैं.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2024 के चुनावी मोड में आ चुकी है. महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक विपक्षी खेमे में सेंधमारी करके सियासी गठजोड़ बनाने में जुटी है तो पंजाब से लेकर झारखंड, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष बदलकर सियासी समीकरण साधने की कवायद की है. सिख बहुल पंजाब में बीजेपी ने सुनील जाखड़ के जरिए हिंदू कार्ड तो झारखंड में बाबूलाल मरांडी के चेहरे को आगे करके आदिवासी समुदाय के वोटों को अपने साथ जोड़ने का दांव चला है. ऐसे में बीजेपी को नई सोशल इंजीनियरिंग के लिए दलबदलू नेताओं पर ही भरोसा करना पड़ा है.
बीजेपी के चार नए प्रदेश अध्यक्ष
बीजेपी ने चार प्रदेशों के अध्यक्ष बदल दिए हैं. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए सुनील जाखड़ को पंजाब की कमान सौंपी गई, जो अश्वनि शर्मा की जगह लेंगे. झारखंड में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी बाबूलाल मरांडी को सौंपी गई है, जो दीपक प्रकाश का स्थान लेंगे. इसी तरह तेलंगान में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री जे किशन रेड्डी को मिली है, जो संजय बांडी की जगह लेंगे तो आंध्र प्रदेश में बीजेपी डी पुरंदेश्वरी को पार्टी की कमान सौंपी, जो सोमू वीरराजू का स्थान लेंगी. बीजेपी ने चारों प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्त के जरिए अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने की रणनीति अपनाई है.
जाखड़ के जरिए एक तीर के कई शिकार
बीजेपी ने सुनील जाखड़ को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपकर एक तीर से कई शिकार किए हैं. बीजेपी ने जाखड़ के जरिए जाट हिंदू वोटों को साधने के साथ-साथ किसानों की नाराजगी को भी दूर करने का दांव चला है. इसके अलावा पार्टी ने जाखड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस और दूसरे दलों के उन नेताओं को भी संदेश दे दिया है कि अगर दलबदल कर बीजेपी में आते हैं तो पार्टी में स्वागत ही नहीं बल्कि सियासी अहमियत भी देगी. इतना ही नहीं बीजेपी को पंजाब में लंबे अर्से और नवजोत सिद्धू के पार्टी से जाने बाद सुनील जाखड़ के रूप में एक मजबूत जनाधार वाला नेता जरूर मिल गया है, जिसके पास अपने पिता बलराम जाखड़ की सियासी विरासत है.
बीजेपी का कमजोर दुर्ग हुआ मजबूत
पंजाब की सियासत में बीजेपी के पास अब नेताओं की एक पूरी फौज है. शिरोमणि अकाली दल के साथ रहते हुए बीजेपी पंजाब की चंद सीटों पर ही चुनाव लड़ती रही है, जिसमें अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर सीटें शामिल हैं. ऐसे में मालवा के इलाके में अकाली दल के चुनाव लड़ने से बीजेपी कभी अपना आधार नहीं जमा पाई थी. अकाली दल से नाता टूटने के बाद से बीजेपी मालवा के इलाके को मजबूत करने में लगी है, जिसके लिए सुनील जाखड़ से कैप्टन अमरिंदर सिंह, अरविंद खन्ना और मनप्रीत सिंह बादल जैसे दिग्गज नेता बीजेपी के साथ आ गए हैं.
मालवा से आने वाले सुनील जाखड़ को पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने मालवा को साधने का दांव चला है. पंजाब की सियासत पर मालवा का दबदबा रहा है और अभी तक जितने मुख्यमंत्री बने हैं, वो सब भी मालवा से हैं. आम आदमी पार्टी मालवा क्षेत्र जीतकर पंजाब में अपनी सरकार बनाई है. पंजाब के शहरी इलाके में हिंदू मतदाता है, जो आम आदमी पार्टी का कोर वोटबैंक बन गया है. बीजेपी अब उसे अपने पाले में लाने के लिए ही सुनील जाखड़ पर दांव खेला है, जो जाट हिंदू समुदाय से आते हैं. जाखड़ के पास संगठन का अनुभव है और किसानों की बीच उनकी मजबूत पड़ रही है, जिसका बीजेपी लाभ उठाना चाहती है.
मरांडी के जरिए आदिवासी वोटों पर नजर
बीजेपी ने झारखंड में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी बाबूलाल मरांडी को सौंपी है. मरांडी के लंबा सियासी अनुभव है और झारखंड के पहले मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. राज्य की सियासत में मरांडी आदिवासी चेहरा माने जाते हैं और संताल अदिवासी समुदाय से आते हैं. संताल के इलाके में बीजेपी काफी कमजोर स्थिति में है, जिसके चलते बाबूलाल मरांडी को पार्टी की जिम्मेदारी देकर आदिवासियों के साथ संताल को भी साधने की कवायद की है. झारखंड में बीजेपी को 2019 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी समुदाय की नाराजगी का खामियाजा उठाना पड़ा है, जिसके चलते सत्ता गवांनी पड़ी है.