कश्मीर में मौसम का बदला बदला मिजाज; गुलमर्ग से श्रीनगर तक जहां बिछती थी बर्फ, वहां भी शुरू हुई तपिश की मार
श्रीनगर- धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में इस साल मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। मार्च के पहले सप्ताह में जहां आमतौर पर घाटी बर्फ की सफेद चादर से ढकी रहती है, वहीं इस बार तेज धूप और बढ़ते तापमान ने लोगों को हैरान कर दिया है। कश्मीर घाटी इन दिनों गर्मी और सूखे की दोहरी मार झेल रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, जिन इलाकों में इस समय ठंडा मौसम रहता है वहां तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में जहां इस समय तापमान करीब 4 डिग्री होना चाहिए था, वहीं पारा बढ़कर 17.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
श्रीनगर और पहलगाम में भी बढ़ा तापमान
राजधानी श्रीनगर में दिन का तापमान 24.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 11.7 डिग्री ज्यादा है। वहीं पर्यटन स्थल पहलगाम में तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो औसत से करीब 10 डिग्री अधिक है। इसके अलावा काजीगुंड में 24.6 डिग्री और कुपवाड़ा में 23.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। वहीं जम्मू शहर में पारा सामान्य से करीब 8 डिग्री ज्यादा बढ़कर 32.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
झेलम नदी का जलस्तर भी घटा
बढ़ती गर्मी और बारिश की कमी का असर घाटी की जीवनरेखा कही जाने वाली झेलम नदी पर भी देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर में कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुताबिक, गुरुवार सुबह दक्षिण कश्मीर के संगम क्षेत्र में झेलम नदी का जलस्तर 0.86 फुट दर्ज किया गया, जो जीरो गेज स्तर से भी नीचे है। यह स्थिति सामान्य से काफी अलग मानी जा रही है।
वैज्ञानिकों और किसानों की बढ़ी चिंता
मौसम में आए इस बदलाव ने वैज्ञानिकों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर मार्च के दौरान पहाड़ों की बर्फ पिघलने से नदियों में पानी का स्तर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार सर्दियों में कम बारिश और कम बर्फबारी के कारण जलस्तर घट गया है।
स्वतंत्र मौसम विज्ञानी फैजान आरिफ के अनुसार यह स्थिति कमजोर स्नोपैक का संकेत देती है। वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि झेलम में पानी की कमी का असर खेती पर भी पड़ सकता है। दरअसल, अप्रैल महीने में धान की नर्सरी तैयार की जाती है, जिसके लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। दक्षिण कश्मीर के कई किसान झेलम की नहरों और पहाड़ी जलधाराओं पर निर्भर हैं। यदि जलस्तर कम रहा तो धान की खेती में देरी होने की आशंका जताई जा रही है।









