MBD WEB NEWS

जानें किस भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए’…राजनाथ सिंह ने सुनाया दिलचस्प वाकया

जानें किस भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए’…राजनाथ सिंह ने सुनाया दिलचस्प वाकया

लखनऊ : देश आज पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती मना रहा है। इस मौके पर पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है। अटल जी की लोकप्रियता न केवल भारत में बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया में थी। इसी कड़ी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अटल जी को याद करते हुए उनके पाकिस्तान दौरे का एक बेहद रोचक और ऐतिहासिक किस्सा साझा किया। राजनाथ सिंह ने बताया कि अटल जी का व्यक्तित्व इतना विराट था और उनकी हाजिरजवाबी इतनी कमाल की थी कि उनके विरोधी भी उनके कायल हो जाते थे।

रक्षा मंत्री ने उस वाकये का जिक्र किया जब अटल जी पाकिस्तान के दौरे पर थे। वहां एक महिला पत्रकार ने उनसे कहा कि वह उनसे शादी करना चाहती है, लेकिन उनकी एक शर्त है कि मुंह दिखाई में उन्हें कश्मीर चाहिए। इस पर अटल जी ने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ तुरंत जवाब दिया। उन्होंने उस महिला पत्रकार से कहा कि वह शादी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी भी एक शर्त है कि उन्हें दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए। अटल जी के इस सटीक और करारे जवाब ने वहां मौजूद सभी लोगों को निरुत्तर कर दिया था।

अटल जी की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित एक एकल कवि सम्मेलन में रक्षा मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का कद उनके पदों से नहीं, बल्कि उनके कर्मों और विशाल व्यक्तित्व से परिभाषित होता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ लोग अपने पद के कारण सम्मान पाते हैं, लेकिन अटल जी उन विरले लोगों में से थे जो बिना किसी पद के भी अपने आचरण और कार्यशैली की वजह से पूजे जाते थे। सार्वजनिक जीवन की तमाम उथल-पुथल के बीच भी वे हमेशा जीवंत और विनम्र बने रहे। यही कारण है कि आज उनके हमारे बीच न होने के बावजूद, उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है।

उनके छात्र जीवन को याद करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि कक्षा 10 में पढ़ाई के दौरान ही अटल जी ने अपनी प्रसिद्ध कविता “हिंदू तन मन, हिंदू जीवन, रग रग हिंदू मेरा परिचय” लिखी थी। 1942 में कालीचरण कॉलेज के एक शिविर में जब उन्होंने संघ प्रमुख एम.एस. गोलवलकर के सामने यह कविता पढ़ी, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा था। उस समय के विद्वानों ने तभी भविष्यवाणी कर दी थी कि यह बालक भारत का भविष्य लिखेगा। रक्षा मंत्री ने अंत में अटल जी की उन कालजयी पंक्तियों को याद किया कि “छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता,” जो आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। atal ji