अहमदाबाद में क्रैश हुए विमान को पहले उड़ा चुके पायलटों से भी होगी पूछताछ, पीड़ित परिवार बोले हमें परिजनों के अंग सही-सलामत सौंपिए
नडियाद- अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना में मारे गए घर के सदस्यों के अवशेषों के लिए गुजरात का एक परिवार सरकार से गुहार लगा रहा है। दर्दनाक हादसे में गुजरात के खेड़ा जिले के 17 से अधिक परिवारों ने अपने प्रियजन खोए, जिनमें नडियाद के पवार परिवार के मुखिया महादेव तुकाराम पवार और उनकी पत्नी आशाबेन पवार भी शामिल हैं। ये दंपति ब्रिटेन में रहने वाले अपने बेटे से मिलने पहली बार विदेश यात्रा पर रवाना हुआ था। ये उनकी पहली हवाई यात्रा थी, जो दुर्भाग्यवश आखिरी साबित हुई।

विमान को पहले उड़ा चुके पायलटों से भी होगी पूछताछ, जांच हुई तेज
अहमदाबाद विमान हादसे की जांच अब तेज हो चुकी है। इस क्रम में हादसे की जांच कर रही एजेंसियां अब उन पायलटों से भी संपर्क करने की कोशिश कर रही है जो पूर्व में इस बोईंग को उड़ा चुके हैं। जांच एजेंसियों ने एयर इंडिया प्रबंधन से उन पायलटों और क्रू मेंबर्स की डिटेल्स मांगी है जो पहले इस विमान के संचालन से जुड़े हुए थे। दरअसल जांच एजेंसियां ये जानना चाहती है कि पिछले 7-8 दिनों में भी दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में कोई खराबी तो नहीं आई थी। क्रू मेंबर्स या पायलट्स ने ऐसी कोई खराबी नोटिस की थी क्या? इससे हादसे की जांच में काफी मदद मिलेगी। फिलहाल राहत की बात ये है कि विमान का ब्लैक बॉक्स मिल गया है।
वहीं, बेटे रमेश का कहना है, “प्लेन में मेरे माता-पिता थे। जब वो दोनों एयरपोर्ट पर गए थे, तब वीडियो कॉल पर बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि हमें सीट मिल गई है। सही जगह पर बैठे हैं। आखिर में जय भारत बोलकर उन्होंने फोन रख दिया।” रमेश ने बताया कि वो 10 साल से मंदिर में सेवा करने जाते थे। विमान हादसे में अपने चाचा-चाची को खोने वाले महेश भावुक हो बोले, “वो खुद दोनों को एयरपोर्ट पर छोड़कर आए थे और दोपहर में घर लौट आए। कुछ समय बाद हादसे की खबर मिली तो तुरंत चाचा-चाची से संपर्क करने की कोशिश की। फोन तो बजा, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। तब हम सभी चिंता में पड़ गए और अहमदाबाद की ओर रवाना हो गए।” उन्होंने बताया, “परिवार के लोग सबसे पहले एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें जानकारी मिली कि सभी यात्रियों को असरवा अस्पताल भेजा गया है। अस्पताल में भीड़ और अफरातफरी का माहौल था। फिर भी रात में डीएनए सैंपल लिया गया, लेकिन स्थिति बहुत असमंजस भरी थी।”
सरकार से अपील करते हुए महेश ने कहा कि भावनाएं समझिए, व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा, “आप 72 घंटे से एक दिन अधिक समय लीजिए, लेकिन हमें हमारे प्रियजनों के शरीर के अंग संगठित और सम्मानजनक तरीके से सौंप दीजिए। ये सिर्फ मेरी नहीं, हम सभी की मांग है। हमारी भावनाएं हमारे परिजनों से जुड़ी हैं।”









