विजिलेंस की पूछताछ के दौरान एक-दूसरे पर भड़के रमन अरोड़ा और एटीपी सुखदेव वशिष्ठ , हाथापाई की आई नौबत
जालंधर- भ्रष्टाचार के मामले में जालंधर सेंट्रल विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक रमन अरोड़ा को विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया हुआ है। वहीं खबर आ रही है कि विजिलेंस दफ्तर में पूछताछ के दौरान विधायक रमन अरोड़ा और एटीपी सुखदेव वशिष्ठ की आपस में बहस हो गई।
विजिलेंस दफ्तर में दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए आपा खो दिया। इसके बाद बात हाथापाई तक पहुंचने लगी, तो विजिलेंस की टीम विधायक को लेकर वहां से निकल गई और फिर रात उनको दूसरे थाने में रखा गया। सुबह वापस लाकर फिर से पूछताछ की गई। विधायक को चाय के अलावा सामान्य दाल-रोटी और पराठा जैसा सादा भोजन दिया गया। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे एटीपी (असिस्टेंट टाउन प्लानर) सुखदेव वशिष्ठ की गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस की टीम जालंधर में एक बड़े अवैध संपत्ति घोटाले की जांच में जुट गई है। पूछताछ के दौरान एटीपी ने कई राज खोले। इनके आधार पर टीम ने 30 से अधिक ऐसी प्रॉपर्टीज का रिकॉर्ड जुटाया है, जिनकी अनुमानित कीमत ढाई सौ करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि विजिलेंस सुखदेव से सख्ती से पूछताछ की तो उसने मान लिया कि विधायक के कहने पर उसने कई जगह पर नोटिस चिपकाए थे। यह बात दोनों को आमने-सामने बिठा कर पूछी गई तो रमन इस बात से खफा हो गए। दोनों में तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई। विजिलेंस के हाथ एक ऐसा फर्जी नोटिस लगा है, जो डराने के लिए निर्माणाधीन इमारतों पर लगाया जाता था। इस नोटिस के पीछे विधायक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अब यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि पिछले तीन वर्षों में कितनी इमारतों को ऐसे फर्जी नोटिस जारी किए गए और ये नोटिस कहां और कैसे तैयार किए जाते थे। अब तक की जांच में सामने आया है कि विधायक रमन अरोड़ा ने जिन प्रॉपर्टीज में निवेश किया, वे अधिकतर उनके रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर हैं। कई रिश्तेदारों की पहचान की जा चुकी है। अब विजिलेंस टीम उनके आय के स्रोत, प्रॉपर्टी खरीद की प्रक्रिया और धन के लेनदेन की जांच कर रही है। कुछ रिश्तेदार पूछताछ से बचने के लिए फरार बताए जा रहे हैं।









