
सर्वहितकारी केशव विद्या निकेतन स्कूल ने बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण पर मुक्तेश्वर धाम और काठगढ़ मंदिर के करवाये दर्शन

MBD NEWS (सुमेश शर्मा) बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण पर मुक्तेश्वर धाम पठानकोट और हिमाचल प्रदेश में स्थित काठगढ़ मंदिर के करवाये दर्शन,बच्चों ने मंदिर में माजूद पुजारियों व उस्थित लोगो से इस प्राचीन मंदिर के बारे में स्कूल स्टाफ ने कई सवाल पूछे।

बच्चों की जिज्ञासा को देख शिक्षकों ने पांडवो के इतिहास और स्थापत्य के बारे में बच्चों को विस्तार से बताया।मुक्तेश्वर धाम, जिसे छोटा हरिद्वार भी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जहाँ स्कूल टूर के लिए लोग अक्सर आते हैं। यह मंदिर पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा है और यहाँ भगवान शिव की पूजा की जाती है.मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग है और इसके चारों ओर अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हैं.

मुक्तेश्वर धाम में महाभारत काल की चार गुफाएँ हैं जहाँ पांडवों ने अज्ञातवास में समय बिताया था. मंदिर के पास रावी नदी बहती है, जहाँ लोग विसर्जन करने हेतु आते हैं.

इसके बाद वे काठगढ़ मंदिर में दर्शन किये । आपने अधिकतर जगह भगवान शिव की पूर्ण प्रतिमा भी पूजा होते हुए देखी होगी, लेकिन देश में एक ऐसी जगह जहां दो भागों में बंटे शिवलिंग की पूजा होती है। यही नहीं दो भागों का आकार भी एक जैसा नहीं है। वैसे इसे अर्धनारीश्वर शिवलिंग भी कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित काठगढ़ महादेव का यह मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां दो भागों में बंटा शिवलिंग हैं।

माना जाता है कि मां पार्वती और भगवान शिव के दोनों भागों के बीच का अंतर घटता बढ़ता रहता है। यह अंतर ग्रहों व नक्षत्रों के परिवर्तित होने के अनुसार ही बदलता रहता है।गर्मियों में इस प्रतिमा के बीच काफी अंतर आ जाता है , वहीं सर्दियों के यह अंतर कम हो जाता है और दोनों रूप एक रूप धारण कर लेते हैं।
यह शिवलिंग अष्टकोणीय है और काले भूरे रंग का है। शिव रूप में पूजे जाने वाले शिवलिंग की ऊचांई 7-8 फीट और पार्वती के रूप में अराध्य का हिस्सा 5-6 फुट ऊंचा है।

माना जाता है जब विश्व विजेता सिंकदर पंजाब पहुंचा तो उससे पूर्व मीरथल नामक गांव में पांच हजार सैनिको को खुले मैदान में आराम करने के लिए कहा। उसी समय सिंकदर ने देखा कि एक फकीर शिवलिंग की पूजा कर रहा में व्यस्त था तो सिंकदर ने उसे अपने साथ यूनान चलने को कहा, जिसे फकीर ने नकार दिया। इस बात से प्रभावित होकर सिंकदर ने काठगढ़ महादेव मंदिर बनाने के लिए चारदीवारी बनवाई और ब्यास नदी की ओर अष्टकोणीय चबूतरे बनवाए, जो आज भी है।

इस यात्रा के सफल आयोजन के लिए संस्था के प्रधानाध्यापक अरविंद बैंस ने कहा कि इस प्रकार के टूर के माध्यम से बच्चों को अपने इतिहास व संस्कृति के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है और भारतीय संस्कृति के प्रति जुड़ाव बढ़ता है।










