सर्वहितकारी शिक्षा समिति पंजाब द्वारा प्रांतीय सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन..
MBD NEWS जालंधर (सुमेश शर्मा) सर्वहितकारी शिक्षा समिति पंजाब द्वारा आयोजित प्रांतीय सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन आज दिनांक 12 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को प्रांत कार्यालय विद्या धाम जालंधर में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह से भर गया।

आज के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा० मधुश्री संजीव सावजी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सर्वप्रथम जालंधर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख किया।

उन्होंने सप्तशक्ति के सात गुणों – श्री, कीर्ति, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति एवं क्षमा – का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि इन गुणों को जीवन में धारण करने से ही नारी अपनी वास्तविक शक्ति को पहचान सकती है।

उन्होंने नारी की भूमिका को परिवार और समाज की धुरी बताते हुए कहा कि एक मां ही संस्कारों की प्रथम गुरु होती है। उन्होंने क्षमा, संवाद और पारस्परिक सहयोग को रिश्तों की मजबूती का आधार बताया।
डा० सावजी ने भारतीय संस्कृति की महानता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा दर्शन संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण का चिंतन करता है। पंचमहाभूतों से निर्मित यह सृष्टि प्रेम और एकत्व के सिद्धांत पर आधारित है।
विज्ञान और अध्यात्म को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए उन्होंने कहा कि आदिशक्ति के बिना सृष्टि की कल्पना अधूरी है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में नारी का स्थान अत्यंत उच्च था और आज भी आवश्यकता है कि हम भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को समझकर परिवार और समाज में समरसता स्थापित करें। प्रकृति के साथ सामंजस्य, परस्पर पूरकता और नारी सम्मान को उन्होंने राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।

उद्बोधन के पश्चात सर्वहितकारी केशव विद्या निकेतन, जालंधर की आचार्य बहनों द्वारा “हम ही मातृशक्ति हैं” गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसने वातावरण को देशभक्ति एवं शक्ति भाव से ओत-प्रोत कर दिया।

विशिष्ट अतिथि गीता आहूजा ने अपने संबोधन में कहा कि सप्तशक्ति के सातों गुणों को जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि स्त्री के जीवन की यात्रा पुत्री से लेकर परमेश्वर तक की होती है — पुत्री, पत्नी, परिवार, प्रदेश, पर्यावरण और पंचमहाभूत तक उसका विस्तार है।

उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में अब तक 22,000 से अधिक संगम आयोजित हो चुके हैं, जिनमें लगभग 27 लाख महिलाओं ने सहभागिता की है। इसके साथ-साथ पंजाब में भी 356 संगम आयोजित हो चुके हैं, जिनमें लगभग 26000 महिलाओं ने सहभागिता की है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में इस संगम के माध्यम से अपनी शक्ति और सामर्थ्य का बोध जागृत हुआ है। उन्होंने अहिल्या, गार्गी जैसी महान नारियों के उदाहरण देकर वर्तमान समाज को उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

तत्पश्चात हिंदी काव्य गीता सारथी ‘ले चल निज धाम की ओर’ यहाँ पर उपस्थित मुख्य मेहमानों को उपहार स्वरूप भेंट दी, जिसे देखकर मुख्य अतिथि अति प्रसन्न हुए तथा उन्होंने हार्दिक धन्यवाद किया। उन्होंने ये भी कहा कि अब इस भगवत गीता को गाया भी जा सकता है और ये बच्चों में संस्कार पुष्टि के लिए बहुत ही उत्कृष्ट माध्यम रहेगी। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डा० मधुश्री संजीव सावजी (अखिल भारतीय मंत्री एवं सप्तशक्ति संगम संयोजिका, महाराष्ट्र) विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि गीता आहूजा (उत्तर क्षेत्रीय सप्तशक्ति संगम संयोजिका) विशेष रूप से उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम में डा. रेखा कालिया भारद्वाज (सप्तशक्ति संगम प्रांत संयोजिका एवं उपाध्यक्ष सर्वहितकारी शिक्षा समिति जालंधर) तथा डॉ .सुषमा चावला (Gynecologist) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अतिथियों का परिचय ज्योति शर्मा ने कराया तथा रीना ठाकुर ने सप्तशक्ति संगम का विस्तृत वृत्त प्रस्तुत किया। डा० रेखा कालिया भारद्वाज ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से उपस्थित विद्या भारती के पदाधिकारियों — बालकृष्ण , विजय ठाकुर , राजेंद्र कुमार एवं संदीप धूड़िया का धन्यवाद किया।

मातृशक्ति का संकल्प डा० ज्योति खन्ना द्वारा दिलवाया गया ।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ हुआ। आज के कार्यक्रम का मंच संचालन चनप्रीत अरोड़ा द्वारा किया गया । तत्पश्चात सभी ने सामूहिक भोजन ग्रहण किया।यह प्रांतीय सप्तशक्ति संगम नारी जागरण, सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त एवं प्रेरणादायी कदम सिद्ध हुआ।










