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मकर संक्रांति के अवसर पर लंगर का प्रसाद खाने से 50 के करीब लोगों की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती

मकर संक्रांति के अवसर पर लंगर का प्रसाद खाने से 50 के करीब लोगों की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती

लुधियना: जिले में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब लंगर खाने से लोगों की तबीयत बिगड़ गई। जानकारी के मुताबिक, मकर संक्रांति के अवसर पर एक गुरुद्वारे में आयोजित लंगर के बाद कई श्रद्धालुओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। भोजन करने के कुछ समय बाद लगभग 50 लोगों को उल्टी, दस्त और चक्कर आने की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया।

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यह घटना अयाली कला इलाके में स्थित गुरुद्वारा श्री थड़ा साहिब की है, जहां मकर संक्रांति पर्व के मौके पर हर साल की तरह इस बार भी धार्मिक आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जानकारी लेकर जांच शुरू कर दी है ताकि बीमार होने की वजह का पता लगाया जा सके। अब तक की मिली जानकारी के अनुसार प्रसाद में गाजर का हलवा था, जिसे खाने से श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई।

अस्पताल में इलाज करा रहीं बुज़ुर्ग महिला मंजीत कौर ने बताया कि वे गुरुद्वारा साहिब से गाजर का हलवा घर लेकर आई थीं। घर के सभी सदस्यों ने प्रसाद के रूप में हलवा खाया था। उनके अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति ने करीब 3 चम्मच हलवा ग्रहण किया, जिसके एक घंटे बाद उन्हें उल्टियां होने लगीं और तबीयत बिगड़ती चली गई।

इस संबंधी जानकारी देते हुए डाक्टरों का कहना है कि, अयाली में स्थित गुरुद्वारा में मकर संक्रांति के मौके पर समागम चल रहा था। इस दौरान करीब 35-40 के लोग आए हुई थे, जिनमें कई बच्चे व बुजुर्ग भी शामिल थे। लंगर का प्रसाद खाने से लोगों को फूड पॉइजनिंग हो गई, जिस कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई है। डाक्टरों ने बताया कि उनके पास काफी बुरी हालत में मरीज पहुंचे। जिनकी प्रसाद में गाजर का हलवा खाने से तबीयत बिगड़ी है। वहीं बीमार पड़े लोगों का कहना है कि, गाजरा का हलवा (गजरेला) 2-3 पहले बना हुआ था।

इसके कारण फूड पॉइजनिंग हो गई है।  गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से मैनेजर गुरचरण सिंह ने स्पष्ट किया कि मकर संक्रांति के अवसर पर बांटा गया लंगर गुरुद्वारे की ओर से आयोजित नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी गांव के कुछ स्थानीय लोगों ने आपसी सहयोग से राशि जुटाकर लंगर की व्यवस्था की थी। गुरचरण सिंह के अनुसार, गाजर का हलवा (गजरेला) भी उसी समूह द्वारा प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। कुछ श्रद्धालुओं ने प्रसाद वहीं ग्रहण किया, जबकि कई लोग इसे अपने साथ घर भी ले गए थे। गुरुद्वारा प्रबंधन ने इस पूरे आयोजन से खुद को अलग बताया है।