चंडीगढ़ : भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के अधीन भाखड़ा और पोंग जलाशयों का जलस्तर क्रमशः लगभग 1672 फीट और 1393 फीट पर दर्ज किया गया है। इस साल की मानसूनी बरसात (जुलाई-अगस्त) में पोंग जलाशय में कुल 9.68 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) पानी की आवक हुई है, जो परियोजना की स्थापना के बाद से अब तक की सर्वाधिक है। यह आवक 1988 (7.70 बीसीएम) और 2023 (9.19 बीसीएम) जैसे बाढ़ वाले वर्षों से भी अधिक रही है।
पिछले वर्ष (2024) केंद्रीय जल आयोग द्वारा भाखड़ा और पोंग डैम के संचालन के लिए नए नियम-कर्व्स तैयार किए गए थे, जिन्हें इस वर्ष BBMB द्वारा लागू किया जा रहा है। जलाशयों से पानी की निकासी का निर्णय BBMB की तकनीकी समिति द्वारा लिया जाता है, जिसमें BBMB के वरिष्ठ अधिकारी, साझीदार राज्यों के मुख्य अभियंता, केंद्रीय जल आयोग के प्रतिनिधि और भारतीय मौसम विभाग के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
इस मानसून सीजन में अब तक अगस्त माह में तकनीकी समिति की सात बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें स्पिलवे संचालन शुरू करने, पानी छोड़ने की मात्रा, समय-सारणी आदि पर सहमति से निर्णय लिए गए। सभी फैसले पूरी पारदर्शिता और आपसी सहमति से किए गए।
BBMB ने वर्ष 2025 में जलाशयों के संचालन में कई अहम कारकों को ध्यान में रखा है- जैसे ऊपरी नियम-कर्व, पोंग डैम से नीचे ब्यास नदी की वहन क्षमता, आगामी घटाव चरण के लिए पर्याप्त भंडारण और निचले क्षेत्रों में बरसाती खड्डों व नालों के मिलन से होने वाले नुकसान की आशंका। लगातार अधिक आवक को देखते हुए जलाशयों से निकासी की प्रक्रिया बेहद धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से की जा रही है, ताकि बांध की सुरक्षा के साथ-साथ डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।









