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  • इराक की संसद भवन पर हुआ हमला, दागे गए 9 रॉकेट

    इराक की संसद भवन पर हुआ हमला, दागे गए 9 रॉकेट

    इराक की संसद भवन पर हुआ हमला, दागे गए 9 रॉकेट

    इराक की संसद पर मिसाइल से हमला किया गया है. संसद भवन पर लगातार 9 रॉकेट दागे गए.

    इराक से हमले की बड़ी खबर आ रही है. इराक की संसद पर अटैक किया गया है. मिली जानकारी के मुताबिक इराक की संसद पर मिसाइल से हमला किया गया है. संसद भवन पर लगातार 9 रॉकेट दागे गए. इससे पहले भी इराक में स्थित अमेरिकी बेस पर इस्लामिक कट्टर पंथी संगठनों ने हमला किया है, लेकिन इस बार संसद भवन को निशाना बनया गया है.

     

     

  • जानिए किस जगह भूस्खलन ने ले ली 36 लोगों की जान

    जानिए किस जगह भूस्खलन ने ले ली 36 लोगों की जान

     

    काराकास : वेनेजुएला के मध्य उत्तरी राज्य अरागुआ में सप्ताहांत में हुए भूस्खलन में सोमवार तक मृतकों की संख्या 36 तक पहुंच गयी है, जबकि 56 लोग अभी भी लापता हैं।

    आंतरिक संबंध, न्याय एवं शांति मंत्री रेमिगियो सेबालोस ने बताया कि सरकार ने प्रभावित क्षेत्र में 300 टन भोजन और पानी वितरित किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस और अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा एजेंसी और राष्ट्रीय सशस्त्र बलों के 3,000 से अधिक सदस्यों को राहत एवं बचाव कार्य के लिए तैनात किया गया है।

    इससे पहले उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगुएज ने कहा कि लास तेजेरियास शहर में 317 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं और 757 क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है, लेकिन पेयजल सेवा अभी भी प्रभावित है।

  • Russia-Ukraine War: MEA ने जताई चिंता, कहा- तुरंत रोकें जंग, जारी की गई कीव में रहने वाले भारतीयों के लिए एडवायजरी 

    Russia-Ukraine War: MEA ने जताई चिंता, कहा- तुरंत रोकें जंग, जारी की गई कीव में रहने वाले भारतीयों के लिए एडवायजरी

     

    नई दिल्ली : भारत ने यूक्रेन में रूस के हमलों की तीव्रता बढ़ने तथा नागरिकों एवं आधारभूत ढांचों को निशाना बनाये जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पुन: दोनों देशों से हिंसा रोक कर संवाद एवं कूटनीति के रास्ते पर आने की अपील की है और इसके लिए सहयोग की भी पेशकश की है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने यहां संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा कि यूक्रेन में संघर्ष के बढ़ने और आधारभूत ढांचे को निशाना बनाये जाने और नागरिकों की मौतों से भारत बहुत चिंतित है। उन्होंने कहा,“हम पुन: कहते हैं कि हिंसा बढ़ना किसी के भी हित में नहीं है। हम हिंसा को तुरंत रोकने और संवाद एवं कूटनीति के मार्ग पर शीघ्रातिशीघ्र लौटने की अपील करते हैं भारत तनाव को घटाने के प्रयासों में समर्थन एवं सहयोग करने के लिए तैयार है।”

    भारतीय दूतावास ने एडवायजरी की जारी 
    इस बीच, यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने एडवायजरी जारी की है। दूतावास ने लिखा- यूक्रेन में शत्रुता के माहौल में वृद्धि देखते हुए भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वो सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचें और यूक्रेन से बाहर निकलें। यूक्रेनी सरकार और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे दूतावास को अपनी यूक्रेन में स्थिति को लेकर जानकारी दें ताकि दूतावास उन तक पहुंचने में सक्षम हो सके, जहां जरूरत हो।

    बागची ने कहा कि भारत संघर्ष की शुरूआत से हमेशा से कहता आया है कि वैश्विक व्यवस्था, संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र, अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और सभी देशों की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान की भावना से चलती है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के 229वें दिन आज रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों से सबसे तगड़ा हमला किया और नागरिकों की जानों एवं आधारभूत ढांचे को नुकसान हुआ। माना जा रहा है कि रूस ने यह हमला क्रीमिया को रूस से जोड़ने वाले पुल को विस्फोट से नष्ट किये जाने के बाद प्रतिशोध में किया है। यूक्रेन के सैन्य प्रमुख जनरल वेलेरी ज़ालुज़्नी के अनुसार रूस की ओर से 75 से अधिक मिसाइलें दागी गई हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 41 मिसाइलों को यूक्रेन के वायु प्रतिरक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिया। देश के दक्षिणी शहर ज़ापोरिज्जिया और निप्रॉपेट्रोस क्षेत्र में रात भर हुए हमले के बाद सोमवार की सुबह यहां की राजधानी कीव में विस्फोटों की आवाज सुनाई दी। स्थानीय समयानुसार तड़के करीब तीन बजे टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर ज़ापोरिज्जिया के क्षेत्रीय गवर्नर ऑलेक्ज़ेंडर स्टारुख ने पोस्ट किया,“एक बहुमंजिला आवासीय इमारत फिर से नष्ट हो गई। उसमें अनेक लोग हताहत हुए हैं।”

    निप्रॉपेट्रोस के गवर्नर वैलेंटाइन रेज़्निचेंको के मुताबिक निप्रॉपेट्रोस में रातभर ‘बड़े पैमाने पर हमले’ हुए। उन्होंने रूस पर कई क्षेत्रों में गोलाबारी का आरोप लगाया। यूक्रेन के गृहमंत्री ने कहा कि रूस की ओर से कीव पर किए गए मिसाइल हमलों में 10 नागरिक मारे गए तथा 24 अन्य घायल हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादीमिर ज़ेलेंस्की ने अपने टेलीग्राम पोस्ट में कहा,“वे हमारा नामो-निशानमिटा देने की कोशिश कर रहे हैं।”उन्होंने कहा,“आज सुबह पूरे यूक्रेन में हुए हमलों से पता चलता है कि रूस हमें नष्ट करने और हमें पृथ्वी पर से मिटा देने की कोशिश कर रहा है।”

  • रूस द्वारा दागी गई 75 मिसाइलों से दहल उठा यूक्रेन, हर तरफ मची तबाही

    रूस द्वारा दागी गई 75 मिसाइलों से दहल उठा यूक्रेन, हर तरफ मची तबाही

    कीव – स्थानीय अधिकारियों और मीडिया के अनुसार, कई मिसाइल हमलों ने सोमवार को पूरे देश में यूक्रेनी शहरों को निशाना बनाया, जिसने रूस को हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया। आरटी समाचार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह दो दिन बाद हुआ है जब एक बम ने रणनीतिक क्रीमियन पुल को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसे मास्को ने एक यूक्रेनी आतंकवादी हमला कहा। जानकारी के अनुसार रूस की ओर से 75 मिसाइलें दागी गई हैं और यूक्रेन के पावर स्टेशनों को भी हमला बनाया गया है। यह हमले व्लादिमीर पुतिन के करीबी जनरल सेरगेई सुरोविकिन को यूक्रेन युद्ध का नेतृत्व सौंपे जाने के बाद तेज हुए हैं। यूक्रेन की एक लड़की ने इस वीडियो को रिकॉर्ड किया है। वीडियो में साफ देख सकते हैं कि कैसे मिसाइल धमाके के बाद पूरी रोशनी चकाचौंध कर देती है।

    राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने लोगों से शरण लेने का आग्रह करने से पहले राजधानी, कीव और डीनिप्रो और जापोरिज्जिया शहरों पर हमलों पर प्रकाश डाला। ल्वीव, खार्किव और ओडेसा में स्थानीय अधिकारियों ने भी बताया कि उनके शहर आग की चपेट में आ गए। कीव में, यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (एसबीयू) के मुख्यालय के पास हमलों से नुकसान की सूचना मिली, जो राजधानी के सरकारी क्षेत्र में स्थित है। आरटी ने बताया कि शहर के अधिकारियों ने मेट्रो प्रणाली के संचालन को रोक दिया और स्टेशनों को अब नागरिकों के लिए आश्रय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

    ल्विव क्षेत्र के प्रमुख, मक्सिम कोजि़त्स्की ने बताया कि पश्चिमी प्रांत के ऊर्जा अवसंरचना पर हमला हुआ। उन्होंने दावा किया कि मास्को पूरे देश में ‘महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे’ को लक्षित कर रहा है।देश के कई हिस्सों से इसी तरह के अकाउंट्स के आने के साथ, यूक्रेन के वरिष्ठ अधिकारियों ने रूस से लड़ने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया है।

  • 85 लोगों को ले जा रही नाव पलटी, 76 की मौत

    85 लोगों को ले जा रही नाव पलटी, 76 की मौत

     

    अबुजा : नाइजीरिया के अंबरा प्रांत में नाव के पलटने से कम से कम 76 लोगों की मौत हो गई है। राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी ने रविवार को जारी एक बयान में नाव पलटने की घटना में 76 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि बचाव एजेंसियों ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर त्रासदी में मरने वालों की संख्या की सूचना दी थी और दुख व्यक्त किया था।

    बयान के अनुसार क्षेत्र में बाढ़ के बाद शुक्रवार को अंम्बरा प्रांत के ओगबारू इलाके में 85 लोगों को ले जा रही एक यात्री नौका पलट गई। स्थानीय मीडिया ने राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (एनईएमए) के दक्षिणपूर्व क्षेत्र के समन्वयक थिकमैन तनिमु के हवाले से बताया कि बाढ़ के आलावा घटना के अन्य कारणों की जांच की जा रही है।

    घटना के बाद नाइजीरिया के राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और एनईएमए ने अंम्बरा प्रांत में बचाव अभियान शुरू कर दिया है। बुहारी ने कहा कि उन्होंने अन्य बचाव और राहत एजेंसियों को घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित सरकारी एजेंसियों से स्थानीय परिवहन घाटों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच करने का आग्रह किया है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • विदेशों में महंगी हो रही है पढ़ाई, अमरीका जैसे देशों में 2 लाख रुपए प्रतिवर्ष तक की वृद्धि 

    विदेशों में महंगी हो रही है पढ़ाई, अमरीका जैसे देशों में 2 लाख रुपए प्रतिवर्ष तक की वृद्धि

     

     

    नई दिल्ली : रुपये में गिरावट के कारण अमरीका के लिए औसत अतिरिक्त लागत 1.5 से 2 लाख रुपए प्रति वर्ष बढ़ गई हैं। विदेशों में मंहगी हो रही पढाई का एक कारण इंग्लैंड, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों के लिए ट्यूशन फीस में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि है। साथ ही हवाई जहाज के किराए जैसी अन्य लागतों में भी हाल के दिनों में वृद्धि देखी गई है।

    विदेशों में पढाई मंहगी होने के बावजूद अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में लाखों भारतीय छात्रों के वीजा स्वीकृत नहीं हुए हैं। छात्रों को स्टूडेंट वीजा मिलने में लंबी देरी हो रही है लेकिन जिन छात्रों का वीजा सौभाग्यवश स्वीकृत कर दिया गया है उन्हे रुपये में गिरावट के कारण महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। विदेशों में भारतीय छात्रों को पी.जी. (हॉस्टल) और होमस्टे की कीमतों में वृद्धि के कारण रहने की जगह ढूंढने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही महामारी के बाद इन देशों में बड़ी संख्या में लोगों के आने के कारण भी मंहगाई बढ़ी हैं।

    यूके, अमरीका और कनाडा जैसे लोकप्रिय देशों में पढ़ाई का वीजा मिलने में होने वाली लंबी देरी का लाभ जर्मनी को मिलता दिख रहा है। इसमें भारतीय छात्रों का भी एक बड़ा हित है। हाल ही में आई जर्मन एकेडमिक एक्सचेंज सर्विस (डी.ए.ए.डी.) की एक रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी में पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2017 में 17,570 से 2021 में बढ़कर 34,134 हो गई।

    दरअसल जर्मन सरकार द्वारा शिक्षा पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। यहां राज्य द्वारा वित्तपोषित विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ट्यूशन फीस नहीं देनी पड़ती है। यह बात जर्मनी के भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़े लाभों में से एक है। विदेशों में मंहगी हो रही पढाई के बीच भारतीय छात्रों के लिए यह एक राहत की बात है।

    हालांकि जर्मनी जैसे देशों में भारतीय छात्रों को कम लागत पर विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं बावजूद इसके छात्र पढ़ाई के लिए अलग-अलग कारणों से अलग-अलग देशों का चुनाव करते हैं। कई बार बड़े लाभ मिलने के बावजूद छात्र अपनी वरीयता और पसंद को जल्दी नहीं बदलते हैं। विदेशों में पढ़ाई के लिए भारत के सबसे बड़े समुदाय आधारित प्लैटफॉर्म, यॉकेट के सह-संस्थापक सुमीत जैन ने बताया रुपये में गिरावट के कारण अमरीका के लिए औसत अतिरिक्त लागत 1.5 से 2 लाख रुपए प्रति वर्ष बढ़ गई हैं। बावजूद इसके छात्र बिना सोचे-समझे निर्णय नहीं लेते हैं। कभी-कभी जब छात्र ने केवल कनाडा के स्कूलों में आवेदन किया होता है तो वे देश नहीं बदलते हैं। उनमें से कुछ छात्र शिक्षा के बाद पी.आर. लेना चाह रहे होते हैं और दूसरे देशों की तरफ ध्यान देने का कोई मतलब नहीं होता है। बहुत से छात्र विकल्प खुले रखते हैं और शिक्षा पर अधिक ध्यान देते हैं। वे दूसरे विकल्पों पर भी विचार करते हैं। अमरीका ने एस. टी. ई. एम. पाठ्यक्रमों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। गैर- एस. टी. ई. एम. के लिए हम कह सकते हैं कि यू. के. और ऑस्ट्रेलिया को कुछ अधिक छात्र मिलेंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वीजा में होनेवाली निरंतर देर ने पढाई के लोकप्रिय स्थानों की प्रतिस्पर्धात्मकता को खतरे में डाल दिया है। पहले ही जहां छात्रों की पहली पसंद अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देश थे वहीं अब जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में पढ़ाई करने के लिए अचानक उभरे स्थानों के तौर पर सामने आये हैं।

    गौरतलब है कि विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल करने की इच्छा रखने वाल छात्रों के लिए कोविड महामारी एक बड़ी रुकावट साबित हुई है। अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में छात्रों को वीजा के लिए 1 से 2 वर्ष तक का वेटिंग पीरियड मिल रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्र को अगले 2 वर्ष बाद अमेरिका का वीजा मिल सकेगा।

    दरअसल कई देशों ने अब कोविड प्रतिबंध हटा दिए। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यू.के., आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों में जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2022 की आरंभ में लगभग एक मिलियन थी, जो कि महामारी के पहले के स्तरों से लगभग दोगुनी है। पहले के मुकाबले आवेदनों की संख्या कहीं ज्यादा बढ़ गई है जिसके कारण अब वीजा मिलने में भी देरी हो रही है। कोलकाता के रहने वाले एक छात्र एस घोष ने कहा कि यहां से वीजा मिलने में लगभग 440 दिन लग रहे हैं।

  • रूस को क्रीमिया से जोड़ने वाले पुल पर लगी भीषण आग, जेलेंस्की के एडवाइजर बोले- ‘शुरुआत’

    रूस को क्रीमिया से जोड़ने वाले पुल पर लगी भीषण आग, जेलेंस्की के एडवाइजर बोले- ‘शुरुआत’

    Russia Ukraine War: रूस ने साल 2014 में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर यूक्रेन से क्रीमिया को छीन लिया था. यह पुल, केर्च जलडमरूमध्य में शुरू होकर और क्रीमिया को रूस की मुख्य भूमि से जोड़ता है.

    रूस की सरकार समर्थक मीडिया ने शनिवार को रूस की मुख्यभूमि और उसके नियंत्रण वाले क्रीमिया प्रायद्वीप को जोड़ने वाले एक पुल पर भीषण आग लगने की खबर दी. इससे कुछ घंटे पहले पूर्वी यूक्रेन का खारकीव शहर शक्तिशाली बम धमाकों से दहल उठा.

    ‘आरआईए नोवोस्ती’ और ‘तास’ समाचार एजेंसी ने स्थानीय रूसी अधिकारी ओलेग क्रियुचकोव के हवाले से कहा कि ईंधन भंडारण टैंक जैसी लग रही एक वस्तु में आग लग गई, जिसके बाद पुल पर आवाजाही बंद हो गई है.

    सोशल मीडिया पर सामने आईं घटना की कथित तस्वीरों में पुल पर भीषण आग लगी दिखाई देती है, जिससे पुल को भारी नुकसान होने की आशंका है. घटना से जुड़ी खबरों और तस्वीरों का तत्काल सत्यापन नहीं किया जा सका है.

     

    इस बीच यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट किया, ‘गाइडेड मिसाइल क्रूजर मोस्कवा और केर्च ब्रिज यूक्रेनी क्रीमिया में रूसी शक्ति के दो कुख्यात प्रतीक- ढह गए हैं, लाइन में आगे क्या है।‘

    2018 में पुल को खोला गया
    बता दें रूस ने साल 2014 में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर यूक्रेन से क्रीमिया को छीन लिया था. मास्को द्वारा क्रीमिया पर कब्जा करने के चार साल बाद 2018 में इस पुल को खोला गया.

    पुल को प्रायद्वीप को रूस के परिवहन नेटवर्क से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया था. 19 किलोमीटर (11.8 मील) लंंबा यह पुल, केर्च जलडमरूमध्य में शुरू होकर और क्रीमिया को रूस की मुख्य भूमि से जोड़ता है, इसमें एक रेलवे और वाहन खंड शामिल हैं। यह 2020 में पूरी तरह से चालू हो गया था.

    कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क्रीमिया पुल यूक्रेनी बलों के लिए एक प्रमुख टारगेट है जो रूसी रसद पर हमला कर रहे हैं.

  • नोबेल शांति पुरस्कार 2022 का हो गया ऐलान, बेलारूस के अधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की और रूस-यूक्रेन के संगठनों के हुआ नाम

    नोबेल शांति पुरस्कार 2022 का हो गया ऐलान, बेलारूस के अधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की और रूस-यूक्रेन के संगठनों के हुआ नाम

     

    नोबेल पीस प्राइज 2022 का ऐलान हो चुका है। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार बेलारूस के अधिकार कार्यकर्ता, रूसी समूह ‘मेमोरियल’ और ‘यूक्रेनियन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ के नाम किया गया है।

    नोबेल शांति पुरस्कार 2022 का हो गया ऐलान, बेलारूस के अधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की और रूस-यूक्रेन के संगठनों के हुआ नाम
    इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार जेल में बंद बेलारूस के अधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की, रूसी समूह ‘मेमोरियल’ और यूक्रेन के संगठन ‘सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ को देने का ऐलान किया गया है। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को नार्वे नोबेल कमेटी के प्रमुख बेरिट रीज एंडर्सन ने ओस्लो में की। पिछले साल यह पुरस्कार दो पत्रकारों, रूस के दिमित्री मुरातोव और फिलीपीन्स के मारिया रेसा को दिया गया था। तब उन्हें यह पुरस्कार लोकतंत्र और शांति की अहम जरूरत, फ्रीडम ऑफ स्पीच की हिफाजत के लिए दिया गया था।

    सोमवार से शुरू हुई है नोबल पुरस्कारों की घोषणा

    निएंडरथल डीएनए के रहस्यों को उजागर करने वाले वैज्ञानिक को चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने के साथ सोमवार को नोबेल पुरस्कारों की घोषणा का सप्ताह शुरू हुआ था। तीन वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से मंगलवार को भौतिकी में इस खोज के लिए यह पुरस्कार जीता कि छोटे कण अलग होने पर भी एक दूसरे के साथ संबंध बनाए रख सकते हैं। केमिस्ट्री में इस साल का नोबेल पुरस्कार कैरोलिन आर बर्टोज्जी, मोर्टन मेल्डल और के बैरी शार्पलेस को समान भागों में ‘अणुओं के एक साथ विखंडन’ का तरीका विकसित करने के लिए बुधवार को दिया गया था।

    अर्थशास्त्र के लिए नोबेल का ऐलान 10 को
    वहीं गुरुवार को स्वीडिश अकादमी ने इस साल साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार फ्रांसीसी लेखिका एनी एरनॉक्स को ‘साहस और लाक्षणिक ​​तीक्ष्णता के साथ व्यक्तिगत स्मृति के अंतस, व्यवस्थाओं और सामूहिक बाधाओं को उजागर करने’ वाली उनकी लेखनी के लिए देने का ऐलान किया। अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा 10 अक्टूबर को की जाएगी।

  • अमेरिका में अपहरण किए गए पंजाब के होशियारपुर के परिवार के लोगों के शव बरामद, मृतकों में 8 महीने की बच्ची भी शामिल

    अमेरिका में अपहरण किए गए पंजाब के होशियारपुर के परिवार के लोगों के शव बरामद, मृतकों में 8 महीने की बच्ची भी शामिल

     

    न्यूयॉर्क : अमेरिका के कैलिफोर्निया में पंजाब के जिस परिवार का अपहरण हुआ था, उन चारों सदस्यों के शव बरामद किए गए हैं। इनमें एक आठ महीने की बच्ची भी शामिल है। मर्स्ड काउंटी शेरिफ वर्न वार्नके ने बताया कि यह बहुत भयानक और डरावना है। उन्होंने कहा कि चारों शव उसी इलाके में मिले हैं।

    अमेरिकी अधिकारियों ने बताया था कि चारों लोगों को बीते 3 अक्टूबर को दक्षिण हाईवे 59 के 800 ब्लॉक से जबरदस्ती अगवा किया गया था। अधिकारियों ने किसी भी संदिग्ध का नाम नहीं लिया। जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार का अमेरिका में खुद का ट्रांसपोर्ट बिजनेस है। ये परिवार पंजाब के होशियारपुर जिले के टांडा के हरसी गांव का रहने वाला है।

  • भारी गोलीबारी से थर्राया थाईलैंड, चाइल्ड केयर सेंटर पर अंधाधुंध फायरिंग में 23 बच्चों समेत 31 लोगों की मौत

    भारी गोलीबारी से थर्राया थाईलैंड, चाइल्ड केयर सेंटर पर अंधाधुंध फायरिंग में 23 बच्चों समेत 31 लोगों की मौत

     

    बैंकॉक : मेक्सिको के सैन मेगुल टोटोलेपन एरिया में अंधाधुंध फायरिंग की घटना के कुछ घंटे के अंदर ही थाइलैंड में भी अंधाधुंध गोलीबारी की घटना हुई है। थाईलैंड में गुरुवार को उस वक्त कोहराम मच गया, जब एक चाइल्ड केयर सेंटर पर अंधाधुंध गोलीबारी होने लगी और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। थाईलैंड के पूर्वोत्तर प्रांत में मास शूटिंग में 31 लोग मारे गए है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं।

    घटना के बारे में थाइलैंड की पुलिस का कहना है कि एक चाइल्ड केयर सेंटर में आज गुरुवार को हुई गोलीबारी में 30 से अधिक लोग मारे गए हैं। पुलिस मेजर जनरल अचयों क्रैथोंग ने बताया कि बंदूकधारी गुरुवार को दोपहर में नोंग बुआ लाम्फू शहर के सेंटर में अचानक से फायरिंग करनी शुरू कर दी।

    उन्होंने कहा कि हमले में 30 लोग मारे गए हैं, लेकिन उनके पास अभी अधिक जानकारी नहीं है। गोली मारने के बाद हमलावर ने भी खुद को जान से मार दिया। एक क्षेत्रीय सार्वजनिक मामलों के कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि अब तक 26 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो गई है, जिसमें 23 बच्चे, 2 शिक्षक और एक पुलिस अधिकारी शामिल हैं। हालांकि मामले को लेकर अधिक विवरण अधिक जानकारी नहीं है।

    बता दें कि इससे पहले मेक्सिको में भी आज सुबह एक बार फिर से खूनी संघर्ष देखने को मिला। मेक्सिको के सैन मेगुल टोटोलेपन में स्थित सिटी हॉल में बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दी जिससे कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। फायरिंग में मारे जाने वालों में मेयर भी शामिल हैं।