खत्म हो चुकी है नैनीताल की भार क्षमता
कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी प्रो. बीएस कोटलिया के अनुसार वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार ने स्वीकारा कि नैनीताल की भार क्षमता अब समाप्त हो गई है। यहां अब निर्माण नहीं होना चाहिए। लेकिन 2022 में भी यहां बेधड़क निर्माण चल रहा है।
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नैनीताल झील तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरी हुई है। ऊपर मल्लीताल की तरफ नैना पीक पहाड़ी, एक तरफ अयारपाटा पहाड़ी, दूसरी तरफ शेर का डांडा पहाड़ी और नीचे तल्लीताल की तरफ बलिया नाला। ऐसे में हर तरफ से हो रहा भूस्खलन शहर के अस्तित्व के लिए ठीक नहीं माना जा रहा।
तो यह है अहम कारण
प्रो. बीएस कोटलिया का मानना है कि नैनीताल और नैनी झील के बीच से गुजरने वाले फाल्ट के एक्टिव होने से भूस्खलन और भूधंसाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। असल में ज्योलीकोट से कुंजखड़क तक एक बड़ी क्षेत्रीय भ्रंश रेखा मौजूद है, जो बलियानले के समीप से नैनी झील के मध्य से होती हुई गुजरती है।
इसे नैनीताल फाल्ट कहते हैं। यह फाल्ट या दरार भूगर्भीय हलचलों का परिणाम है। इसी से इस फाल्ट के एक्टिव होने के संकेत मिल रहे हैं। इस दरार के सिकुड़ने या खुलने से ही भूस्खलन जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। शहर में लगातार बढ़ता भवनों का दबाव भी एक अहम वजह है। प्रो. कोटलिया ने चेताया कि अभी भी शहरवासी नहीं संभले तो परिणाम भयावह हो सकता है।
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बचाव के लिए उपाय
भूविज्ञानियों के अनुसार नैनीताल की लोअर माल रोड पर वाहनों का आवागमन नियंत्रित किया जाय। निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाय। पहाड़ी से जल निकासी के लिए बनाए गए पुराने 64 नालों से अतिक्रमण हटाया जाय। हरितपट्टी का विस्तार हो। खनन पर रोक लगे।
सौजन्य : दैनिक जागरण