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  • फांसी के फंदे से लटकी पाई गईं पूर्व सीएम की बेटी उमा माहेश्वरी,जानें पूरी खबर…

    फांसी के फंदे से लटकी पाई गईं पूर्व सीएम की बेटी उमा माहेश्वरी,जानें पूरी खबर…

     

    समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना में एक सनसनीखेज और हाइप्रोफाइल वारदात सामने आई है। तेलुगू देशम पार्टी (Telugu Desam party TDP) यानी टीडीपी के संस्थापक और पूर्व सीएम एनटी रामाराव की बेटी उमा माहेश्वरी हैदराबाद में अपने आवास पर फांसी के फंदे से लटकी पाई गई हैं।

    Uma Maheshwari Death: तेलंगाना में फांसी के फंदे से लटकी पाई गईं पूर्व सीएम एनटी रामाराव की बेटी उमा माहेश्वरी

  • वैन में करंट लगने से हुआ बड़ा हादसा,10 लोगों की मौत,27 हुए घायल…

    वैन में करंट लगने से हुआ बड़ा हादसा,10 लोगों की मौत,27 हुए घायल…

     

    पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में बड़ा हादसा हुआ है। पिकअप वैन में करंट दौड़ने से उसमें सवार 10 लोगों की मौत हो गई है। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं। मामले की जांच की जा रही है।

    कूच बिहार, एजेंसी। पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में बड़ा हादसा हुआ है। जलपेश जा रहे 10 लोगों की करंट लगने से मौत हो गई है। ये हादसा रविवार रात को हुआ है। बताया जा रहा है कि लोग पिकअप वैन में सवार थे।

    जेनरेटर में शार्ट सर्किट से दौड़ा करंट

    एजेंसी के मुताबिक, पिकअप वैन में डीजे लगा था। डीजे के लिए जेनरेटर लगा था। जेनरेटर में शार्ट सर्किट हुआ जिससे पिकअप वैन में करंट दौड़ गया। हादसे के वक्त लोग पिकअप वैन में सवार थे। करंट की चपेट में आने से 10 की मौत हो गई जबकि कई घायल हो गए। हादसे के तुरंत बाद, घायलों को अस्पताल ले जाया गया। 27 में से 16 लोगों को इलाज के लिए जलपाईगुड़ी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

     

    कई लोग घायल भी हुए

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने कहा, प्रारंभिक जांच में पता चला कि डीजे सिस्टम के जेनरेटर की वायरिंग की वजह से हादसा हो सकता है। जेनरेटर पिकअप वैन में ही रखा हुआ था। उन्होंने बताया कि लोगों को चंग्रबंध बीपीएचसी लाया गया था। चिकित्सा अधिकारी ने 27 में से 16 व्यक्तियों को बेहतर इलाज के लिए जलपाईगुड़ी जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

    उन्होंने आगे बताया कि घायलों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन चेकअप की जरूरत है। डॉक्टरों ने 10 लोगो को मृत घोषित कर दिया है। मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। पुलिस ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।

  • PM मोदी को लिखी चिठ्ठी ;इतनी महंगी क्यों हुई मेरी पेंसिल-रबर और मैगी, नन्ही बच्ची ने PM मोदी पूछे यह सवाल…

    PM मोदी को लिखी चिठ्ठी ;इतनी महंगी क्यों हुई मेरी पेंसिल-रबर और मैगी, नन्ही बच्ची ने PM मोदी पूछे यह सवाल…

     

    Viral News UP: महंगाई (Inflation) से बड़े तो बड़े अब बच्चे भी परेशान दिख रहे हैं. यकीन न हो रहा तो ये खबर पढ़ लीजिए. मामला उत्तर प्रदेश (UP) का है जहां पहली क्लास में पढ़ने वाली बच्ची ने पीएम मोदी (PM Modi) के नाम एक पत्र लिखा जो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहा है

    Letter To PM: इतनी महंगी क्यों हुई मेरी पेंसिल-रबर और मैगी, नन्ही बच्ची ने PM मोदी को लिखी चिठ्ठी
    girl letter to PM Modi: महंगाई को लेकर देश विदेश में बहुत सी फिल्में बनी हैं. कहानी और किताबों में तो इसके बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है. साहित्यकारों ने किसी लेख में तो कवि ने अपनी किसी कविता में महंगाई की एकदम सटीक व्याख्या की है. कुछ शायरों ने महंगाई पर ऐसा शेर और कलाम पढ़ा कि उसमें छिपे तंज को समझकर लोग दाद देने लगे. ‘महंगाई डायन खाय जात है’ जैसे फिल्मी गानों में आम आदमी के मन में छिपी पीड़ा को समझा जा सकता है. ऐसे में जब महंगाई ने बड़ों से लेकर बच्चों सबपर बराबर असर डाला तो कन्नौज की एक बच्ची ने पीएम मोदी को महंगाई के चलते लेटर लिख दिया. बच्ची ने अपने पत्र में पेंसिल-रबर से लेकर मैगी तक के दाम का जिक्र किया है और बच्ची की ये चिठ्ठी लोगों को खूब पसंद आ रही है.

    यूपी के कन्नौज जिले स्थित छिबरामऊ निवासी कृति दुबे, सुप्रभाष अकादमी में कक्षा एक में पढ़ती हैं. हाल ही में कॉपी-किताबों, रबर और पेंसिल सब महंगी हुई हैं, उससे परेशान होकर छात्रा कृति दुबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपने मन की बात और मंमी का गुस्सा दोनों को साझा किया है. कृति के पापा विशाल दुबे एक अधिवक्ता हैं जो अपनी बेटी की लिखी चार लाइनों की वजह से पूरे यूपी में मशहूर हो गए हैं.

    पीएम को लिखी चिट्ठी में बच्ची ने लिखा- ‘कि मेरा नाम कृति दुबे है। मैं कक्षा एक में पढ़ती हूं। मोदी जी आपने बहुत मंहगाई कर दी है। यहां तक पेंसिल, रबर तक महंगी कर दी है और मेरी मैगी भी दाम बढ़ा दिए हैं। अब मेरी मां पेंसिल मांगने पर मारती है। मैं क्या करूं। दूसरे बच्चे मेरी पेंसिल चोरी कर लेते हैं।’ इसी चिट्ठी को परिवार ने पोस्ट कर दिया. इस तरह बात निकली तो बड़ी दूर तक चली गई.

    एसडीएम ने दिया आश्वासन

    टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक छिबरामऊ के एसडीएम अशोक कुमार से सोशल मीडिया के जरिए बच्ची के इस पत्र के वायरल होने की पुष्टि की है. एसडीएम अशोक कुमार ने कहा, ‘मैं अपनी व्यक्तिगत क्षमता के स्तर पर इस बच्ची की मदद के लिए तैयार हूं. मुझे बड़ी खुशी होगी कि कृति अपनी पढ़ाई लिखाई या किसी भी और चीज के लिए मुझसे कुछ कहेगी तो मैं फौरन उसकी बात रखते हुए होनहार बच्ची की मदद के लिए वहां पहुंच जाऊंगा.’

  • सरकार को GST से अब तक का दूसरा सबसे ज्यादा कलेक्शन, लगातार पांचवें महीने आई अच्छी खबर

    सरकार को GST से अब तक का दूसरा सबसे ज्यादा कलेक्शन, लगातार पांचवें महीने आई अच्छी खबर

     

    वित्त मंत्रालय के द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार जुलाई के महीने में जीएसटी कलेक्शन 1,48,995 करोड़ रुपये का हुआ। पिछले साल अप्रैल की तुलना में इस बार कलेक्शन 28% अधिक है।

     

    जीएसटी कलेक्शन (GST Collection July 2022) को लेकर एक बार फिर अच्छी खबर आई है। लगातार पांचवें महीने जीएसटी कलेक्शन 1.40 लाख करोड़ रुपये के ऊपर रहा है। वित्त मंत्रालय के द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार जुलाई के महीने में जीएसटी कलेक्शन 1,48,995 करोड़ रुपये का हुआ। पिछले साल जुलाई की तुलना में इस बार कलेक्शन 28% अधिक है। बता दें, सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल इस महीने में जीएसटी कलेक्शन 1,16,393 करोड़ रुपये का हुआ था।

    जुलाई का जीएसटी कलेक्शन अप्रैल के बाद सबसे अधिक है। इस साल अप्रैल में सरकार ने जीएसटी कलेक्शन के जरिए 1.68 लाख करोड़ रुपये इकट्ठा किया था। बता दें, तब पहली बार जीएसटी कलेक्शन 1.50 लाख करोड़ रुपये का हुआ था।

    जुलाई के जीएसटी कलेक्शन में सीजीएसटी 25,751 करोड़ रुपये, एसजीएसटी (SGST) 32,807 करोड़ रुपये और IGST 79,518 करोड़ रुपये थी। जबकि सेस 10,920 करोड़ रुपये कलेक्ट हुआ है। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि लगातार पांचवें महीने जीएसटी कलेक्शन 1.40 लाख करोड़ रुपये के ऊपर रहा है। जीएसटी काउंसिल द्वारा लिए गए फैसलों का असर साफ दिख रहा है। हर एक महीने लगातार जीएसटी कलेक्शन में ग्रोथ दिखाई दे रहा है। समीक्षाधीन अवधि में वस्तुओं के आयात से राजस्व में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से राजस्व पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक था।

    अबतक के जीएसटी के टाॅप 5 कलेक्शन 

    अप्रैल 2022 – 1,67,540 करोड़ रुपये
    जुलाई 2022 – 1,48,995 करोड़ रुपये
    मार्च 2022 – 1,42,095 करोड़ रुपये
    जनवरी 2022 – 1,40, 986 करोड़ रुपये
    मई 2022 – 1,40,885 करोड़ रुपये

  • अमृतसर  में पुलिस को मिली बड़ी सफलता, 20 लाख रुपये की ड्रग मनी समेत एक नशा तस्कर गिरफ्तार

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    Police got a big success in Amritsar, a drug smuggler arrested with drug money of Rs 20 lakh

    अमृतसर  में पुलिस को मिली बड़ी सफलता, 20 लाख रुपये की ड्रग मनी समेत एक नशा तस्कर गिरफ्तार

     

    अमृतसरः पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम के तहत अमृतसर पुलिस को उस वक्त बड़ी सफलता हाथ लगी जब मेहता थाने की पुलिस ने शुक्रवार देर रात पंजाब में हथियार और हेरोइन सप्लाई करने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से 20 लाख रुपए ड्रग मनी, कार और अवैध हथियार बरामद हुए है।  गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान नाथ दी खुई गांव निवासी मोहब्बतजीत सिंह के रूप में हुई है। और फरार साथियों की पहचान गुरजीत सिंह उर्फ गोरा व मजीठा रोड निवासी कुलजीत सिंह उर्फ शिवा के तौर पर हुई है।

    जानकारी अनुसार, एसपी जुगराज सिह ने बताया कि मेहता थाने के प्रभारी लवजीत सिंह को सूचना मिली थी कि मोहब्बतजीत सिंह अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर हेरोइन की सप्लाई देकर इनोवा में सवार हो ड्रग मनी लेकर जा रहा है।  इनोवा की तलाशी के दौरान उसमें 20 लाख रुपये की ड्रग मनी, एक राइफल डबल बैरल 12 बोर और पांच जिदा कारतूस बरामद किए गए। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके पूछताछ शुरू कर दी है।

    महोब्बतजीत सिंह ने जानकारी दी कि वह लंबे समय से तस्करी के काम में जुड़ा हुआ है, जिसमें उसका साथ उसके गांव का ही कुलजीत सिंह शिवा और मजीठा रोड निवासी गुरजीत सिंह गौरा देता है। पुलिस ने गौरे के घर पर छापामारी की तो गौरे के घर से भी 80 हजार रुपए ड्रग मनी बरामद हुई। घटना के बाद गुरजीत सिंह गोरा और कुलजीत सिंह शिवा फरार हो गए हैं। वहीं शिवा के खिलाफ सदर थाने में हत्या, रामबाग थाने में पुलिस से हाथापाई और मोहाली में डकैती का मामला दर्ज है। इसके साथ ही गुरजीत गोरा के खिलाफ मेहता थाने में अस्लाह एक्ट का केस दर्ज है।

  • बटाला में अज्ञात हमलावरों ने दो सगे भाइयों पर अंधाधुंध गोलियां, दोनों गंभीर घायल

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    Unknown assailants fired indiscriminately at two real brothers in Batala, both seriously injured

    बटाला में अज्ञात हमलावरों ने दो सगे भाइयों पर अंधाधुंध गोलियां, दोनों गंभीर घायल

     

    बटालाः पंजाब में क्राइम ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और अपराधी आए दिन वारदातों को अंजाम देकर आराम से निकल जाते हैं। जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है, वहीं पुलिस प्रशासन इन अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने में असफल हो रही है। ऐसा ही एक मामला बटाला के अंतर्गत आते कोट मजलिस में दो अज्ञात व्यक्तियों ने दो युवकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि दोनों युवक सगे भाई हैं और किसी युवकों के साथ उनकी मामूली तकरार हो गई थीँ। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने अज्ञात युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवा दिया है। घायल युवकों की पहचान अमरजीत सिंह व कंवलजीत सिंह के रूप में हुई है।

    घटना की जानकारी देते घायल युवकों के परिजनों ने बताया कि अमरजीत और कंवलजीत अपने घर के बाहर खड़े थे और घर में निर्माण कार्य चल रहा था और उनका कुछ सामान रेहड़े वाले मोटरसाइकिल पर घर के बाहर खड़ा था। दो युवक मोटरसाइकिल पर आए और उन्हें सड़क से हटने को कहा। थोड़ी-सी बहस के बाद वे गाली-गलौज करने लगे और उक्त अज्ञात राहगीर युवक ने पिस्टल निकाल कर फायरिंग कर दी। जिसमें भाइयों अमरजीत सिंह व कंवलजीत गोली लगने से घायल हो गए। घायलों को उनके परिजन व गांव वालों ने इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया है वहीं, इस घटना के बाद हमलावार घटना स्थल से फरार हो गए।

    पुलिस को जानकारी देते परिवार ने कहा कि उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं है और हमलावार भी अज्ञात हैं। एक छोटे से विवाद में उन्होंने हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए। इस मामले में सिविल अस्पताल बटाला के सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. रविंदर सिंह ने बताया कि उनके पास दो युवक जख्मी हालत में ईलाज के लिए पहुंचे हैं जिन्हें गोली लगी है। गोली युवकों के टांग में लगी है और उनका इलाज चल रहा है। वहीं इस मामले को लेकर पुलिस को भी सूचित कर दिया गया है।

  • शहर में चोरों का आतंक, गुज्जा पीर रोड स्थित सेनेटरी की दुकान से लाखों की चोरी

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    Terror of thieves in the city, theft of lakhs from sanitary shop located on Gujja Peer Road

    शहर में चोरों का आतंक, गुज्जा पीर रोड स्थित सेनेटरी की दुकान से लाखों की चोरी

     

    जालंधरः महानगर में बेखौफ लुटेरों के हौंसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं, जिसके बाद शहर में आए दिन लूटपाट और चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं और लोगों मे दहशत पाई जा रही है, परन्तु पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। ऐसा ही एक मामला महानगर के अन्तर्गत आते गुज्जा पीर रोड से सामने आया है। यहां स्थित अल्फा इंडस्ट्री नामक सेनेटरी की दुकान पर चोरों ने धावा बोल दिया। यहां चोरों ने गल्ले में पड़ा कैश उड़ा लिया और पीतल की तैयार टूंटियां व अन्य सैनिटरी का सामान भी चोरी करके वहां से फरार हो गए। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    घटना संबंधी जानकारी देते हुए अल्फा के मालिक, धीरज जैन ने पुलिस को बताया कि चोरों ने ताले तोड़कर पहले गोदाम से ही चोरी की है, जबकि अंदर ही एक अन्य गोदाम भी था। उसके भी ताले तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वह तोड़ नहीं पाए। इंडस्ट्री मालिक ने बताया कि उनका सैनिटरी का होल सेल का बिजनेस है। पिछले कल उन्होंने जो सामान बेचा था, उसका करीब साढ़े 4 लाख कैश उन्होंने खुद स्टोर के गल्ले में रखा था। चोर वही कैश चोरी करके ले गए हैं। इसके अलावा पीतल-ब्रास इत्यादि की तैयार महंगी टूटियां व अन्य सैनिटरी का महंगा सामान चोरी करके ले गए हैं। दुकान के मालिक ने बताया कि चोरी हुए सामान की कीमत का पता लगाया जा रहा है पर अनुमान है कि नकदी के इलावा 8 लाख के करीब की सामान चोरी हुआ है।

  • सरोवरों के शहर पर मंडरा रहा 1880 के भूस्खलन जैसा बड़ा खतरा, जानें कौन सी है यह जगह

    सरोवरों के शहर पर मंडरा रहा 1880 के भूस्खलन जैसा बड़ा खतरा, जानें कौन सी है यह जगह

     

    Nainital Is In Danger नैनीताल में आज फिर भवाली रोड पर बड़ा भूस्खलन हुआ है। जिसके बाद सड़ी का करीब 30 मीटर हिस्सा खाई में समा गया है। लगातार बड़ी रही भूस्खलन की घटनाएं 1880 जैसे बड़े त्रासदी का संकेत दे रही हैं।

    सरोवर नगरी नैनीताल में खतरे का अलार्म बज रहा है। राजभवन की पहाड़ी से निहालनाला तक के निचले इलाके में खनन व मनमाने निर्माण से हालात इस कदर बदतर हो गए हैं कि तत्काल ठोस पहल नहीं की गई तो पूरा शहर ही खतरे में पड़ जाएगा।

    असल में बलियानाला, चायना पीक, टिफिनटाप व नैना पीक के साथ ही सात नंबर समेत अन्य संवेदनशील पहाड़ियों पर लगातार भूस्खलन व दरार चौड़ी होने लगी है। इससे यहां वर्ष 1980 जैसा खतरा फिर मंडराने लगा है। तब अल्मा पहाड़ी का बड़ा हिस्सा झील में समा गया था, जिसकी चपेट में आकर देखते ही देखते 43 ब्रिटिश नागरिकों समेत 151 लोगों की मौत हो गई थी।

    ब्रिटिश शासकों ने इस विनाशकारी भूस्खलन के बाद शहर को दोबारा संवारने की कोशिश की। लेकिन बाद के दिनों में उनके प्रयासों को दरकिनार कर मनमानी निर्माण, अतिक्रमण व आसपास के क्षेत्रों में खनन शुरू कर दिया गया। इससे 24 जुलाई को फिर उसी अल्मा पहाड़ी पर बड़ा भूस्खलन हुआ। उसकी चपेट में कई मकान भी आ गए। इससे प्रशासन सबक लेता कि शुक्रवार दोपहर में नैनीताल-भवाली रोड पर भी भूस्खलन शुरू हो गया।

    खत्म हो चुकी है नैनीताल की भार क्षमता

    कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी प्रो. बीएस कोटलिया के अनुसार वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार ने स्वीकारा कि नैनीताल की भार क्षमता अब समाप्त हो गई है। यहां अब निर्माण नहीं होना चाहिए। लेकिन 2022 में भी यहां बेधड़क निर्माण चल रहा है।

    jagran josh

    नैनीताल झील तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरी हुई है। ऊपर मल्लीताल की तरफ नैना पीक पहाड़ी, एक तरफ अयारपाटा पहाड़ी, दूसरी तरफ शेर का डांडा पहाड़ी और नीचे तल्लीताल की तरफ बलिया नाला। ऐसे में हर तरफ से हो रहा भूस्खलन शहर के अस्तित्व के लिए ठीक नहीं माना जा रहा।

    तो यह है अहम कारण

    प्रो. बीएस कोटलिया का मानना है कि नैनीताल और नैनी झील के बीच से गुजरने वाले फाल्ट के एक्टिव होने से भूस्खलन और भूधंसाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। असल में ज्योलीकोट से कुंजखड़क तक एक बड़ी क्षेत्रीय भ्रंश रेखा मौजूद है, जो बलियानले के समीप से नैनी झील के मध्य से होती हुई गुजरती है।

    इसे नैनीताल फाल्ट कहते हैं। यह फाल्ट या दरार भूगर्भीय हलचलों का परिणाम है। इसी से इस फाल्ट के एक्टिव होने के संकेत मिल रहे हैं। इस दरार के सिकुड़ने या खुलने से ही भूस्खलन जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। शहर में लगातार बढ़ता भवनों का दबाव भी एक अहम वजह है। प्रो. कोटलिया ने चेताया कि अभी भी शहरवासी नहीं संभले तो परिणाम भयावह हो सकता है।

    jagran josh

    बचाव के लिए उपाय

    भूविज्ञानियों के अनुसार नैनीताल की लोअर माल रोड पर वाहनों का आवागमन नियंत्रित किया जाय। निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाय। पहाड़ी से जल निकासी के लिए बनाए गए पुराने 64 नालों से अतिक्रमण हटाया जाय। हरितपट्टी का विस्तार हो। खनन पर रोक लगे।

    सौजन्य : दैनिक जागरण

     

  • यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों को सरकार ने दी बड़ी राहत , 30 जून तक डिग्री पूरी कर चुके छात्र दे सकेंगे FMGE

    यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों को सरकार ने दी बड़ी राहत , 30 जून तक डिग्री पूरी कर चुके छात्र दे सकेंगे FMGE

     

     

    उन भारतीय छात्रों के लिए जो अपने स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में थे और युद्ध की वजह से भारत लौट आए उनको विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा/FMGE (Foreign Medical Graduate Exam) में बैठने की अनुमति दी जाएगी।

    नई दिल्‍ली, एजेंसी। विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission, NMC) का कहना है कि उन भारतीय छात्रों के लिए जो अपने स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में थे और युद्ध की वजह से भारत लौट आए, उनको विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा/FMGE (Foreign Medical Graduate Exam) में बैठने की अनुमति दी जाएगी।

    समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय छात्र (Indian Medical Student) जो अपने अंडर ग्रेजुएट (Undergraduate education, UG) चिकित्सा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में थे और कोरोना महामारी या रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते भारत लौट आए और अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है और 30 जून को या उससे पहले पाठ्यक्रम पूरा करने का प्रमाण पत्र दिया है, उन्हें विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी।
    राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission, NMC) की ओर से जारी बयान के मुताबिक ऐसे FMGE (Foreign Medical Graduate Exam) एफएमजी छात्रों को क्लिनिकल प्रशिक्षण के लिए दो साल की अवधि के लिए अनिवार्य रोटेशन मेडिकल सीआरएमआई इंटर्नशिप (CRMI internship) से गुजरना पड़ता है, जो विदेशी संस्थान में स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम के दौरान शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सका है।
    राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission, NMC) कीकी ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 अप्रैल को पारित आदेश के अनुसार भारतीय छात्र जो अपने स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में थे और कोरोना महामारी या रूस यूक्रेन युद्ध की वजहों के चलते अपने विदेशी चिकित्सा संस्थान को छोड़कर भारत लौट आए, हालांकि बाद में पढ़ाई पूरी कर ली है। उन्हें फारेन मेडिकल ग्रेजुएट इक्‍जाम में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि ऐसे छात्रों के लिए 30 जून, 2022 को या उससे पहले संबंधित संस्थान से मेडिकल डिग्री प्राप्त करनी जरूरी है।
  • दुर्घटना का शिकार हुआ भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग -21, वायुसेना के दो पायलट हुए शहीद…

      दुर्घटना का शिकार हुआ भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग -21, वायुसेना के दो पायलट हुए शहीद…

     

     Crash: मिग-21 को ऑपरेशनली हैंडल कर चुके एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) कहते हैं, ये लड़ाकू जहाज एक पुरानी तकनीक वाला है। इस सुपरसोनिक जहाज की मार से दुश्मन कांप उठता था। 1971 की लड़ाई में मिग-21 ने शानदार नतीजे दिए थे। ग्राउंड अटैक में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया गया…

    MiG-21 Crash: मिग-21

     

    भारतीय वायुसेना की ताकत रहे मिग-21 लड़ाकू जहाज को अब कई तरह के विचलित करने वाले शब्दों का सामना करना पड़ रहा है। जिस तेजी से मिग-21 क्रैश हो रहे हैं, उसे देखकर इस हवाई जहाज को ‘ताबूत’ और ‘विधवा बनाने वाला’ जैसे नामों से पुकारा जाने लगा है। ताजा घटना राजस्थान के बाड़मेर की है। गुरुवार की रात वहां एक मिग-21 क्रैश हो गया। भारतीय वायुसेना के दो पायलट शहीद हो गए। आखिर इस पुराने लड़ाकू जहाज को वायुसेना रिटायर क्यों नहीं कर रही है, जबकि दुनिया के अधिकांश देश इससे किनारा कर चुके हैं। भारत ने ये लड़ाकू जहाज तत्कालीन सोवियत संघ अब ‘रूस’ से साठ के दशक में खरीदे थे, वह खुद इस फाइटर प्लेन को 1985 में रिटायर कर चुका है, जबकि भारत में आज तक इन विमानों का इस्तेमाल हो रहा है। एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) ने बताया, मिग-21 की सबसे बड़ी खासियत है कि ये गलती माफ नहीं करता। इसे किसी भी तरह से उड़ा लेंगे, ये बहुत बड़ी गलतफहमी है। अगर मिग-21 का सूझबूझ से इस्तेमाल करो तो ये कभी धोखा नहीं देगा।

    आधे से ज्यादा ‘मिग 21’ हुए हादसों का शिकार

    अभी तक 400 से अधिक मिग लड़ाकू जहाज, क्रैश हो चुके हैं। इन हादसों में वायुसेना के 200 से अधिक पायलट शहीद हो गए हैं। इसके अलावा ढाई सौ से ज्यादा सामान्य लोगों ने भी इन हादसों में अपनी जान गंवाई है। यूपीए सरकार में साल 2012 के दौरान तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में जानकारी देते हुए बताया था कि रूस से खरीदे गए 827 मिग विमानों में से अभी तक आधे से अधिक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। पिछले साल ही पांच मिग लड़ाकू जहाज क्रैश हुए थे। 2016-17 के दौरान मिग-21 एम, मिग-27 यूपीजी, मिग-21 टी 69, दो जगुआर, दो एसयू-30 एमकेआई और एक मिग-23 यूबी हादसों का शिकार हुए। साल 2018 में एक जगुआर, मिग-21 टी 75 और मिग-27 यूपीजी क्रैश हुए थे। अगले साल यानी 2019 में जगुआर, मिग-27 यूपीजी, मिग-21 बाइसन, मिग-21 यूपीजी, एसयू-30 एमकेआई और मिग-21 टी 69 क्रैश हो गए थे। जब मिग को वायुसेना का हिस्सा बनाया गया तो शुरुआत में काफी संख्या में ये जहाज क्रैश होते रहे। अगर 70 के दशक की बात करें तो 365 दिन में लगभग 50 फाइटर प्लेन हादसों का शिकार हो गए थे। अगले दशक में यह संख्या करीब तीन दर्जन पर सिमट गई। उससे अगले दशक यानी 1990 में यह आंकड़ा 30 के आसपास रहा। बाद में कई तरह के सुधार किए गए तो हादसों का ग्राफ और गिरता चला गया।