पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों ने आतंकी हाफिज सईद के राइट हैंड हमजा को सरेआम गोलियों से भूना
लाहौर : पाकिस्तान में भारत के दुश्मनों और कुख्यात आतंकवादियों पर अज्ञात हमलावरों का कहर लगातार जारी है। ताजा मामला लाहौर से सामने आया है, जहां प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक सदस्य और हाफिज सईद के बेहद करीबी आतंकी आमिर हमजा को अज्ञात बंदूकधारियों ने सरेआम गोलियों से भून डाला। इस जानलेवा हमले में हमजा बुरी तरह से घायल हो गया है और अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। इस घटना के बाद से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और आतंकी गुटों में भारी दहशत फैल गई है।
न्यूज चैनल के दफ्तर के बाहर दिया वारदात को अंजाम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आतंकी आमिर हमजा लाहौर में एक स्थानीय न्यूज चैनल के दफ्तर के बाहर मौजूद था। इसी दौरान वहां पहले से घात लगाए बैठे अज्ञात हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर बड़ी आसानी से वहां से फरार होने में कामयाब रहे। खून से लथपथ हमजा को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत बेहद नाजुक और चिंताजनक बताई है।
हाफिज सईद के साथ मिलकर रखी थी लश्कर की नींव
आमिर हमजा लश्कर-ए-तैयबा का कोई आम सदस्य नहीं है, बल्कि उसने कुख्यात आतंकी हाफिज सईद के साथ मिलकर इस खतरनाक संगठन की नींव रखी थी। उसे लश्कर के वैचारिक प्रचार-प्रसार और आतंक के लिए फंड जुटाने का मास्टरमाइंड माना जाता है। हमजा अफगानिस्तान में मुजाहिदीन के रूप में भी लड़ चुका है। वह अपनी कट्टरपंथी विचारधारा, जहरीले भड़काऊ भाषणों और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, वह लश्कर की आधिकारिक पत्रिकाओं का संपादक भी रह चुका है और उसने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली कई विवादित किताबें भी लिखी हैं।
बनाया था नया गुट, कश्मीर में आतंक फैलाने की थी साजिश
आतंकी गतिविधियों में उसकी गहरी संलिप्तता को देखते हुए अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने लश्कर को आतंकी संगठन घोषित करते हुए हमजा पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, जब साल 2018 में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों पर दिखावटी वित्तीय कार्रवाई हुई थी, तब हमजा ने दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए लश्कर से किनारा करने का नाटक करते हुए ‘जैश-ए-मनकफा’ नाम से एक नया गुट बना लिया था। यह गुट मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए काम कर रहा था। इसके बावजूद वह लश्कर के शीर्ष नेतृत्व के सीधे संपर्क में था और नए आतंकियों की भर्ती के साथ-साथ फंड जुटाने का काम बदस्तूर जारी रखे हुए था।









