जयशंकर ने दो टूक कही ये बात, भारत को दोस्त चाहिए, उपदेश देने वाले नहीं…
आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत को “उपदेशकों” की नहीं, “साझेदारों” की जरूरत है, खासकर ऐसे जो विदेश में अलग और घर में अलग नीति अपनाते हैं. उन्होंने यूरोप के “दोहरे मापदंड” पर भी चिंता व्यक्त की, लेकिन बदलाव की उम्मीद जताई. उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा.
विदेश मंत्री एस जयशंकर. (फाइल फोटो)
भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम के दौरान भारत की विदेश नीति पर तीखा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि भारत को उपदेशकों की नहीं, भागीदारों की तलाश है. यह टिप्पणी उन्होंने आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ओलाफुर राग्नार ग्रिम्सन और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष समीर सरन के साथ बातचीत के दौरान दी.
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जब दुनिया की ओर देखते हैं, तो उपदेश देने वालों की तलाश नहीं करते हैं. खासकर ऐसे उपदेशकों की जो विदेश में जो उपदेश देते हैं, उसे अपने घर में लागू नहीं करते हैं








