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ममता सरकार ने लिया बड़ा यू-टर्न: केंद्र का वक्फ संशोधन कानून बंगाल में लागू; 6 दिसंबर तक संपत्तियों का ब्यौरा देने के आदेश

ममता सरकार ने लिया बड़ा यू-टर्न: केंद्र का वक्फ संशोधन कानून बंगाल में लागू; 6 दिसंबर तक संपत्तियों का ब्यौरा देने के आदेश

 

कोलकाता : केंद्र सरकार के ‘वक्फ संशोधन अधिनियम 2025’ का कड़ा विरोध करने के बाद आखिरकार पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। महीनों तक इस कानून को टालने के बाद ममता सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए राज्य में लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि राज्य की करीब 82,000 वक्फ संपत्तियों का पूरा विवरण निर्धारित समयसीमा 6 दिसंबर 2025 तक केंद्रीय पोर्टल ‘उम्मीद’ (umeedminority.gov.in) पर अपलोड कर दिया जाए। यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंचों से घोषणा की थी कि वह इस कानून को बंगाल में किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगी।

राज्य प्रशासन ने केंद्र के निर्देशों का पालन करते हुए डेटा एंट्री की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पी.बी. सलीम ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर आठ सूत्रीय कार्रवाई योजना जारी की है। इस निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि केंद्रीय पोर्टल पर फिलहाल केवल निर्विरोध संपत्तियों का ही विवरण अपलोड किया जाए। प्रशासन ने अधिकारियों को इमामों, मुअज्जिनों और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें आयोजित कर उन्हें इस नई प्रक्रिया और पोर्टल की बारीकियों को समझाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, जहां भी तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो, वहां सुविधा केंद्र स्थापित करने और बिना किसी देरी के 6 दिसंबर तक काम पूरा करने को कहा गया है।

यह प्रशासनिक निर्णय इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी साल अप्रैल में जब यह विधेयक संसद में पारित हुआ था, तब पश्चिम बंगाल में इसके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 अप्रैल को एक कार्यक्रम में साफ कहा था कि वह वक्फ संशोधन अधिनियम को बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। उन्होंने तर्क दिया था कि राज्य में 33 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और उनका संरक्षण करना सरकार का कर्तव्य है। लेकिन, कानूनी मोर्चे पर राज्य सरकार को अपेक्षित राहत नहीं मिली। अदालत में याचिका दाखिल करने के बावजूद फैसला सरकार के पक्ष में नहीं आया। चूंकि अधिनियम की धारा 3बी के तहत सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर डालना अनिवार्य है और सुप्रीम कोर्ट ने भी क्रियान्वयन पर कोई रोक नहीं लगाई है, इसलिए राज्य प्रशासन को अंततः झुकना पड़ा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन कर वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 बनाया है। इसमें वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने का अंतिम अधिकार सरकार के पास होने जैसे बड़े बदलाव किए गए हैं। इन्हीं प्रावधानों को लेकर विवाद था। बहरहाल, अब राज्य के संशोधित नियमों के तहत पश्चिम बंगाल में 8,063 वक्फ संपत्तियों के मुतवल्लियों (देखभाल करने वालों) को दी गई समयसीमा के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण दर्ज कराना होगा। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि केंद्र द्वारा तय की गई डेडलाइन को पूरा करने के लिए प्रशासन पूरी ताकत से जुट गया है।