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  • काशी के बच्चों को कांग्रेस के युवराज ने नशेड़ी कहा,इस शब्द के अपमान को भूलेंगे नही यू पी के लोग..

     काशी के बच्चों को कांग्रेस के युवराज ने नशेड़ी कहा,इस शब्द के अपमान को भूलेंगे नही यू पी के लोग..

     

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस के युवराज यहां आए थे, उन्होंने हमारे काशी के बच्चों को नशेड़ी कहा, लेकिन उनको ये नहीं पता है कि बनारस के साथ-साथ पूरे यूपी के इस अपमान को कोई भूलेगा नहीं. जब चुनाव आते हैं तो गठबंधन बनने लगते हैं और उसके बाद सन्नाटा छा जाता है.

    मेरे काशी के बच्चों को कांग्रेस के युवराज ने नशेड़ी कहा, राहुल के बयान पर वाराणसी में पीएम मोदी ने घेरा

    पीएम नरेंद्र मोदी.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बनास डेयरी को उद्घाटन किया. इसके बाद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 10 साल में काशी ने मुझे बनारसी बना दिया है. यहां आए बिना मेरा मन नहीं लगता है. हमारी सरकार अन्नदाता को ऊर्जादाता बना रही है. पूर्वांचल में नौकरी के नए अवसर बनेंगे. काशी में कचरे से कंचन बनाने का नया मॉडल आया. वाराणसी में विकास का डमरू बज चुका है. अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर भी पलटवार किया.

    पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस के युवराज ने मेरे काशी के बच्चों को नशेड़ी कहा, लेकिन वो नहीं जानते हैं कि बनारस के साथ-साथ यूपी का अपमान कोई नहीं भूलेगा. जिनके अपने होश ठिकाने नहीं हैं, वो यूपी के, मेरे काशी के बच्चों को नशेड़ी कह रहे हैं. मुझे गाली देते-देते ये 2 दशक बिता दिए हैं और अब ईश्वर रूपी जनता-जनार्दन पर और यूपी के नौजवानों पर ये लोग अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. अरे परिवारवादियों, काशी का यूपी का नौजवान तो विकसित यूपी बनाने में जुटा है, अपना समृद्ध भविष्य लिखने के लिए परिश्रम की पराकाष्ठा कर रहा है.

    काशी और अयोध्या का नया स्वरूप कुछ लोगों को पसंद नहीं’

    विरोधियों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, आजकल तो इनके गुस्से और बौखलाहट का एक और भी कारण है. इनको काशी और अयोध्या का नया स्वरूप बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है. ये अपने भाषणों में राम मंदिर को लेकर कैसी-कैसी बातें करते हैं. मैं ये नहीं जानता था कि कांग्रेस को प्रभु श्रीराम से इतनी नफरत है. ये अपने परिवार और वोटबैंक से बाहर न तो देख सकते हैं और न ही सोच सकते है. तभी तो हर चुनाव के दौरान ये साथ आते हैं और जब परिणाम निल बटे सन्नाटा आता है तो फिर ये एक दूसरे को गाली देते हुए जुदा हो जाते हैं.

  • लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा मार्च के दूसरे सप्ताह में होना संभव, राज्यों के दाैरे कर रही चुनाव आयोग की टीम

     

    नई दिल्ली सबको लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान का इंतजार है। यह इंतजार कभी भी खत्म हो सकती है लेकिन संभावना है कि मार्च में ही तारीखों की घोषणा होगी। सूत्रों पर आधारित मीडिया रिपोर्टस में बताया गया है कि चुनाव आयोग 13 मार्च के बाद क‍िसी भी दिन लोकसभा चुनाव की तारीखों को ऐलान कर सकता है और ये चुनाव 7 से 8 चरणों में हो सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि आयोग आम चुनाव की तैयारियों का आकलन करने के लिए कई राज्यों का दौरा कर रहा है और एक बार यह पूरा होने के बाद तारीखों की घोषणा की जाएगी।

    Lok Sabha Election Dates… केंद्रीय चुनाव निकाय के अधिकारी अभी तमिलनाडु का दौरा कर रहे हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का दौरा किया जाएगा। राज्य का दौरा 13 मार्च से पहले पूरा होने वाला है। 2019 में आम चुनाव सात चरणों में मतदान हुआ था। 2019 में लोकसभा चुनाव की घोषणा 10 मार्च को हुई थी। ECI ने 11 अप्रैल 2019 से 19 मई 2019 के बीच सात चरणों में आम चुनाव कराए थे। 23 मई को चुनाव के नतीजे आए थे। बीजेपी ने आम चुनाव में 303 सीटें जीतीं थीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी. बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 353 सीटें जीती थीं।

  • राज्यों को विशेष योजनाएं लागू करने का निर्देश नहीं दे सकतीं अदालतेंः सुप्रीम कोर्ट

    राज्यों को विशेष योजनाएं लागू करने का निर्देश नहीं दे सकतीं अदालतेंः सुप्रीम कोर्ट

     

    नई दिल्ली  : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार के नीतिगत मामलों की जांच में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित है और अदालतें राज्यों को इस आधार पर किसी विशेष नीति या योजना को लागू करने का निर्देश नहीं दे सकती हैं कि ‘बेहतर, निष्पक्ष या समझदार’ विकल्प उपलब्ध है। भूख और कुपोषण से निपटने के लिए सामुदायिक रसोई स्थापित करने की योजना बनाने की अपील करने वाली एक जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए न्यायालय ने यह टिप्पणी की।

    Supreme Court… शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए मामले में कोई भी निर्देश पारित करने से इनकार कर दिया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और अन्य कल्याणकारी योजनाएं केंद्र और राज्यों द्वारा लागू की जा रही हैं। न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि नीति की विवेकशीलता या सुदृढ़ता के बजाय नीति की वैधता न्यायिक समीक्षा का विषय होगी। पीठ ने कहा, “यह सर्वविदित है कि नीतिगत मामलों की जांच में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित है। अदालतें किसी नीति की शुद्धता, उपयुक्तता या औचित्य की जांच नहीं करती हैं और न ही कर सकती हैं, न ही अदालतें उन नीतिगत मामलों में कार्यपालिका की सलाहकार हैं जिन्हें बनाने का कार्यपालिका को अधिकार है। अदालतें राज्यों को किसी विशेष नीति या योजना को इस आधार पर लागू करने का निर्देश नहीं दे सकतीं कि एक बेहतर, पारदर्शी या तार्किक विकल्प उपलब्ध है।”

  • सड़कों से क्यों गायब हो गए बख्तरबंद पोकलेन और JCB? जानें पूरी खबर..

    सड़कों से क्यों गायब हो गए बख्तरबंद पोकलेन और JCB? जानें पूरी खबर..

     

     

    मीडिया ने ग्राउंड जीरो पर थोड़ी पड़ताल की तो पाया कि शंभू बार्डर पर हरियाणा पुलिस से मुकाबले करने के लिए जो बंदोबस्त किसानों ने किए थे फिलहाल उनको हटा लिया गया है. शंभू बार्डर पर बुधवार को हरियाणा पुलिस से टकराव के बीच बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने या बार्डर पर ही डटे रहने को लेकर भी मतभेद दिखा था.

     

    Kisan Andolan 2.0: सड़कों से क्यों गायब हो गए बख्तरबंद पोकलेन और JCB? जानिए शंभू बार्डर की इनसाइड स्टोरी!

    किसान आंदोलन
    किसानों का दिल्ली कूच जारी है. वह बॉर्डर पर डटे हुए हैं. दूसरी तरफ पुलिस ने भी ठान रखी है कि उनको आगे जाने नहीं देंगे. इसके लिए सड़कों पर कड़ा पहरा है. पहरा तो छोड़िए किला बंदी कहना ज्यादा मुनासिब होगा. पूरे रास्ते पर बैरिकेडिंग है जिसकी तस्वीरें बीते कई दिनों से आप देख ही रहे हैं. लेकिन अब शंभू बार्डर की तस्वीर बदल गई है.
    दिल्ली कूच पर आमादा पिछले 10 दिनों से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बार्डर पर बैठे किसानों और हरियाणा पुलिस प्रशासन के बीच बुधवार को जमकर झड़प हुई. जहां एक तरफ किसान किसी भी सूरत में हरियाणा की नाकेबंदी और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखे तो हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने प्रदर्शनकारियों को पीछे खदेड़ने के लिए ड्रोन की मदद से सैकड़ों आंसू गैस के गोले बरसाये. लेकिन महज 12 घंटों के अंदर ही तस्वीर बदल चुकी है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या बुधवार को लाख जतन के बावजूद आगे बढ़ने में नाकाम रहे किसानों का मनोबल अब टूटने लगा है.
    सड़कों से गायब है बख्तरबंद पोकलेन और JCB
    ये सवाल इसलिए और लाजिमी हो जाते हैं क्योंकि केंद्र सरकार के बातचीत के बुलावे पर अभी तक किसान फैसला नहीं कर पाए हैं. बुधवार को ही किसानों ने 2 दिनों के आगे ना बढ़ने और संघर्ष विराम का एलान कर दिया था. जिन मॉडिफाई ट्रेक्टरों और मशीनों को फ्रंट पर तैनात कर किसान अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे गुरुवार को वो नदारद दिखे. जबकि हरियाणा की तरफ तैनाती जस की तस है. जिन बख्तरबंद पोकलेन और JCB मशीनों के बूते किसान बैरिकेडिंग तोड दिल्ली कूच की हूंकार भर रहे थे, उन मशीनों को फ्रंट लाइन से हटाकर वापस ट्रालियों पर लाद दिया गया है. JCB मशीनों और मॉडिफाइड ट्रेक्टरों को अंडरग्राउंड कर दिया गया है.
    मीडिया ने ग्राउंड जीरो पर थोड़ी पड़ताल की तो पाया कि शंभू बार्डर पर हरियाणा पुलिस से मुकाबले करने के लिए जो बंदोबस्त किसानों ने किए थे फिलहाल उनको हटा लिया गया है. रात में ही जुगाड़ तकनीक से लैस ट्रेक्टरों, पोकलेन और JCB मशीनों को फ्रंट लाइन से हटा लिया गया था. ढूंढने पर एक पॉकलेन मशीन जाने के लिए तैयार ट्रॉली पर लदी हुई मिली. बाकियों को या तो हटा दिया गया है या फिर अंडरग्राउंड कर दिया गया है. शंभू बार्डर पर पंजाब पुलिस की मौजूदगी भी पिछले दिनों से ज्यादा बढ़ी नजर आई. इतना ही नहीं शंभू बार्डर पर हर रोज मीडिया के सामने अपनी बात रखने वाले किसान नेता भी आज बार्डर पर कैमरे के सामने नहीं आए. सेकेंड लीडरशिप को आगे रखा गया. हालांकि जगजीत सिंह डल्लेवाल आंसू गैस के गोले लगने के बाद बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं. सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि वो घायल किसानों की तीमारदारी में व्यस्त हैं.
  • शंभू बॉर्डर के बाद खनौरी बॉर्डर पर पुलिस ने लिया एक्शन, किसानों को रोकने के लिए दागे गए आंसू गैस के गोले

    शंभू बॉर्डर के बाद खनौरी बॉर्डर पर पुलिस ने लिया एक्शन, किसानों को रोकने के लिए दागे गए आंसू गैस के गोले

     

    Kisan Andolan News: हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर जेसीबी-क्रेन के साथ डटे 14000 हजार प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली कूच के लिए तैयार हैं. अब तक सरकार और किसान संगठनों के बीच चार दौर की वार्ता हुई है, जो असफल रही है. किसान आंदोलन की तमाम खबरों से जुड़े लेटेस्ट अपडेट के लिए हमारे लाइव ब्लॉग के साथ बने रहिए…

    एमएसपी समेत कई अन्य मांगों को लेकर किसान बीते कई दिनों से पंजाब और हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं. रना दे रहे प्रदर्शनकारी आज सुबह 11 बजे दिल्ली रवाना होंगे. बताया गया कि शंभू बॉर्डर के साथ खनौरी बॉर्डर से भी किसान दिल्ली जाने के लिए हरियाणा में दाखिल होंगे.

    हालांकि, शंभू बॉर्डर पर सीमेंट के गार्डर, कंटीली तारें बिछाकर कई लेयर बैरिकेडिंग की गई है ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके. लेकिन, इस बार प्रदर्शनकारी भी पूरी तैयारी के साथ आए हैं. बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने के लिए किसान JCB और हाईड्रोलिक क्रेन जैसी हैवी मशीनें लेकर पहुंचे हैं. इतना ही नहीं, दावा है कि बुलेटप्रूफ पोकलेन मशीन भी लाई गई हैं और इनको इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इन पर आंसू गैस के गोलों का भी असर न हो.अब तक सरकार और किसान संगठनों के बीच चार दौर की वार्ता हुई है. चौथे दौर की वार्ता के दौरान सरकार ने पांच फसलों पर MSP का एक प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन सोमवार रात किसान संगठनों ने उस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया और दिल्ली तक मार्च करने का फैसला कर लिया. मार्च के लिए किसानों ने बुलडोजर और पोकलेन जैसी मशीनों का इंतजाम भी कर लिया है.

    टोहाना बॉर्डर पर तैनात एसआई का निधन

    हरियाणा के टोहाना बॉर्डर पर तैनात हरियाणा पुलिस के एसआई विजय कुमार का निधन हो गया है. ड्यूटी के दौरान उनका स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा. वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. किसान आंदोलन के दौरान ड्यूटी पर तैनात अब तक तीन पुलिस कर्मियों की मौत हो चुकी है.

  • UP में सीट बंटवारे और गठबंधन पर बोले अखिलेश,“अंत भला तो सब भला…

     UP में सीट बंटवारे और गठबंधन पर बोले अखिलेश,“अंत भला तो सब भला…

     

     

    नई दिल्ली : आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन पर अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। सपा प्रमुख ने कांग्रेस से गठबंधन की बात खुद कही है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “अंत भला तो सब भला… गठबंधन होगा।” सीट शेयरिंग पर उन्होंने कहा, “कोई विवाद नहीं है, जल्दी ही इसका ऐलान होगा।”

    वहीं, समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेताओं पर उन्होंने कहा कि वह सभी पार्टी में वापस आएंगे। अगर नहीं आए तो उनके खिलाफ वाले सपा में आएंगे। माना जा रहा है कि सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बात बन गई है। बुधवार शाम को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की जा सकती है। अखिलेश यादव यूपी में कांग्रेस को 17 से 19 सीटें दे सकते हैं।

    बता दें कि उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तीन सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। सपा मुरादाबाद, बिजनौर और बलिया सीटें कांग्रेस को देने के लिए राजी नहीं है। जिसको लेकर दोनों दलों के बीच गठबंधन पर सहमति नहीं हो पा रही है। इसके पहले समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने 32 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है।

  • जानें किस जगह स्कूल की टाइमिंग को लेकर विधानसभा में हो गया हंगामा, शिक्षकों को 15 मिनट पहले आना होगा

    जानें किस जगह स्कूल की टाइमिंग को लेकर विधानसभा में हो गया हंगामा, शिक्षकों को 15 मिनट पहले आना होगा

     

     

    पटना : बिहार में सरकारी स्कूलों की टाइमिंग को लेकर बुधवार को विधानसभा में विपक्ष ने फिर हंगामा किया। इस बीच, मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि शिक्षकों को छात्रों के स्कूल आने से 15 मिनट पहले आना होगा। दरअसल, मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने स्कूल टाइमिंग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की भी बात अधिकारी नहीं सुनते।

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि शिक्षकों को छात्रों से आने के 15 मिनट पहले यानी सुबह 9.45 बजे आना होगा और छात्रों के जाने के बाद यानी शाम को 4.15 पर स्कूल से जाएंगे। यही नियम है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष की शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक के तबादले की मांग को नकारते हुए उन्हें ईमानदार अधिकारी बताया। उन्होंने विपक्ष पर भड़कते हुए कहा कि जितना मुर्दाबाद के नारे लगाएंगे अगली बार विपक्ष की संख्या और कम हो जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि सीएम ने मंगलवार को ही साफ कर दिया था कि स्कूल की टाइमिंग सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक होगी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने इसे लेकर एक अधिसूचना भी जारी कर दी। लेकिन अपर मुख्य सचिव के शिक्षकों के स्कूल पहुंचने को लेकर दिए गए एक आदेश के बाद भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इधर, शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी सदन में कहा कि मुख्यमंत्री ने जो घोषणा की है वह सरकार का आदेश है। इधर, विपक्ष ने सदन से वॉक आउट कर गया।

  • विराट कोहली फिर बने पापा, पत्नी अनुष्का शर्मा ने दिया बेटे को जन्म

    विराट कोहली फिर बने पापा, पत्नी अनुष्का शर्मा ने दिया बेटे को जन्म

     

    मुंबई – टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर और बालीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के घर बेटे ने जन्म लिया है। इनकी पहले से एक बेटी है। इसका नाम वामिका है। 15 फरवरी को अनुष्का ने बेटे को जन्म दिया। हालांकि उन्होंने इसकी जानकारी 20 फरवरी को इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी। कपल ने बेटे का नाम अकाय रखा है। इसका अर्थ निराकार या पूर्ण चंद्रमा या पूर्ण चंद्रमा की रोशनी भी होता है। विराट ने अपनी पोस्ट में लिखा, “हमें यह बताते हुए अत्यधिक खुशी हो रही है कि 15 फरवरी को हमने अपने बेटे अकाय और वामिका के छोटे भाई का इस दुनिया में स्वागत किया है। हमने अपने जीवन के इस खूबसूरत समय में आपका आशीर्वाद और शुभकामनाएं चाहते हैं। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि हमारी प्राइवेसी का सम्मान करें।”

  • महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण पर लिया बड़ा फैसलाः शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत मराठा आरक्षण के ड्राफ्ट को मंजूरी

    महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण पर लिया बड़ा फैसलाः शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत मराठा आरक्षण के ड्राफ्ट को मंजूरी

     

     

    मुंबई : महाराष्ट्र कैबिनेट ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत मराठा आरक्षण के बिल के मसौदे को मंजूरी दी। पिछले चार दशकों से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए शिंदे सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मसौदे में सरकार ने उन त्रुटियों को दूर कर लिया है, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को खारिज कर दिया था। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा था कि मराठा समाज को टिकाऊ और कानून के दायरे में आरक्षण देने के लिए विधानमंडल का विशेष सत्र आयोजित किया गया।

    इससे पहले मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने सोमवार को सभी मराठा विधायकों से अपील की थी कि एकमत से आरक्षण बिल का समर्थन करें। अगर आरश्रण को लेकर विधायकों ने आवाज नहीं उठाई तो समझा जाएगा वे मराठा विरोधी हैं।

    मराठा आरक्षण की मांग करने वाले मनोज जरांगे की मांग है कि सरकार मराठाओं को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र जारी करे। असल में कुनबी जाति के लोगों को सरकारी नौकरियों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिलता है। अगर मराठाओं को कुनबी जाति का प्रमाण मिलता है तो उन्हें खुद-ब-खुद आरक्षण का फायदा मिल जाएगा।

    आजादी से पहले मराठवाड़ा क्षेत्र हैदराबाद के रियासत का हिस्सा था। मनोज जरांगे ने कहा है कि सितंबर 1948 में निजाम का शासन खत्म होने तक मराठाओं को कुनबी जाति माना जाता था और वो ओबीसी जाति में आते थे। इसलिए मराठाओं को कुनबी जाति में एक बार फिर जोड़ा जाए।

  • किसान आंदोलन : केन्द्र सरकार ने दिया है प्रस्ताव

    किसान आंदोलन : केन्द्र सरकार ने दिया है प्रस्ताव

     

     

    केन्द्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य एवं उद्योगमंत्री पीयूष गोयल और केन्द्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय और किसान संगठनों के बीच हुई चौथे दौर की वार्ता की समाप्ति के बाद जो प्रस्ताव केन्द्र सरकार द्वारा किसान संगठनों को दिया गया है उससे समझौते की आशा बनी है।

    पत्रकारों से बात करते हुए केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि किसानों से सकारात्मक चर्चा हुई। हमने दलहन समेत कुछ फसलों पर पांच वर्ष की गारंटी का प्रस्ताव दिया है। किसान नेताओं ने पंजाब में गिरते जलस्तर का मुद्दा उठाया। इस पर हमने प्रस्ताव दिया कि अगर अरहर, उड़द जैसे अनाज को एमएसपी में लाया जाता है तो आयात में कमी आएगी व जल स्तर की भी रिकवरी होगी। किसानों ने मक्का और कपास को भी एमएसपी पर खरीदने की मांग की। हमने कहा कि एनसीसीएफ व नैफेड फसलों को एमएसपी पर खरीदेंगी। यह अनुबंध पांच वर्ष चलेगा। एक पोर्टल बनेगा। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।

    काटन कारपोरेशन आफ इंडिया भी किसानों से पांच साल का एग्रीमेंट करेगी जो कपास एमएसपी पर खरीदेगी। उन्होंने किसानों से प्रदर्शन खत्म कर घर लौटने की अपील की। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री होने के चलते पंजाब के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल हुआ। तीन फसलों पर पांच साल तक एमएसपी की लिखित गारंटी देने का प्रस्ताव दिया है। अब निर्णय किसानों को लेना है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सकारात्मक वार्ता हुई, लेकिन निष्कर्ष अभी बाकी है। केन्द्र ने जो प्रस्ताव दिया है, उस पर हम अपने संगठनों से बात करेंगे। कृषि विशेषज्ञों से भी राय लेंगे। फिर किसान संगठनों से चर्चा करेंगे कि यह किसान हित में है या नहीं। सरकार ने जो प्रस्ताव दिया है, उस पर हम विचार करेंगे। यदि कोई सहमति नहीं बनी तो 21 फरवरी को 11 बजे हम शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली के लिए आगे बढ़ेंगे। सरकार की तरफ से सकारात्मक संकेत दिए गए है। सरकार के अनुसार सरकारी बैंकों का कृषि ऋण माफ हो सकता है, निजी ऋण चुकाना होगा। पिछले आंदोलन में किसानों पर दर्ज 3500 केस वापस हो सकते हैं।

    किसान संगठनों की तरफ से सरकार द्वारा दिए प्रस्ताव पर विचार करने की बात एक सकारात्मक संकेत ही है। सरकार द्वारा दिया प्रस्ताव व्यवहारिक है क्योंकि इससे किसानों को गेहूं और चावल की फसल चक्र से बाहर निकलने का अवसर मिलेगा और आर्थिक सुरक्षा भी बनी रहेगी। प्रस्ताव पंजाब के हित में भी है क्योंकि जब गेहूं और चावल को छोड़ अन्य फसलों की एमएसपी पर खरीद शुरू होगी तो गिरते हुए भू- जलस्तर पर नकेल और भूमि की क्षीण होती उपजाऊ शक्ति भी थम जाएगी।

    सरकार ने किसानों की मुश्किलों को समझते हुए जो प्रस्ताव दिया है उस को किसानों को स्वीकार करते हुए जिन अन्य कठिनाइयों का सामना वह कर रहे हैं उनको लेकर सरकार के साथ अपनी बातचीत जारी रखनी चाहिए। किसानों को यह भी समझना चाहिए कि रास्ता रोकने के कारण पंजाब की अर्थ व्यवस्था पर तत्काल रूप से बुरा प्रभाव तो पड़ ही रहा है अगर धरना जारी रहा तो वर्तमान के साथ-साथ पंजाब का भविष्य भी धूमिल हो जाएगा। क्योंकि धरने और प्रदर्शनों के कारण पंजाब व पंजाबियों की छवि भी बिगड़ रही है।

    पंजाब उद्योग के क्षेत्र में पिछड़ता जा रहा है। धरने और रास्ता रोकने के कारण निवेशक पंजाब में निवेश करने से घबराएगा जिस कारण प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ेगी। इस स्थिति से बचने का एक ही हल है कि प्रस्ताव स्वीकार कर बातचीत जारी रहे। मुख्यमंत्री मान ने बैठक में पंजाब के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया है। उनकी प्राथमिकता पंजाब के हित को सम्मुख रख कर किसानों को टकराव की जगह संवाद की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना ही होनी चाहिए। यह भी पंजाब व पंजाबियों की सेवा ही होगी।