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मैं कल मरने वाला हूं…’, मौत से एक महीने पहले नाना पाटेकर ने कर दी थी भविष्यवाणी

मैं कल मरने वाला हूं…’, मौत से एक महीने पहले नाना पाटेकर ने कर दी थी भविष्यवाणी

 

मुंबई: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से पूरा फिल्म जगत शोक में डूब गया है। 75 वर्षीय अभिनेता ने 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित अपने आवास पर आखिरी सांस ली। उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था और अस्पताल में करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके।

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी पुरानी बातें और इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में हैं। खासतौर पर जीवन, मृत्यु और एक अभिनेता के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को लेकर उनके विचार लोगों को भावुक कर रहे हैं।

मौत से कुछ दिन पहले ही जिंदगी पर की थी बात

नाना पाटेकर ने अपनी आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति से कुछ दिन पहले जिंदगी और मृत्यु को लेकर बेहद गहरी बातें कही थीं। 4 अक्टूबर को गोवा में एक कार्यक्रम में नजर आए नाना ने इस बात पर विचार किया था कि इंसान को जिंदगी में मिले समय का किस तरह इस्तेमाल करना चाहिए।

उनकी बातों में जिंदगी की अनिश्चितता साफ नजर आती थी। उन्होंने इस भावना को व्यक्त किया था कि इंसान अक्सर यह मानकर चलता रहता है कि उसके पास अभी बहुत समय है, जबकि जिंदगी कब बदल जाए, इसका किसी को पता नहीं।

‘आस-पास की चीजों से प्रभावित होना चाहिए अभिनेता’

एक पुराने इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने अभिनय को लेकर भी अपनी सोच साझा की थी। उनका मानना था कि एक अभिनेता को अपने आसपास होने वाली घटनाओं से प्रभावित होना चाहिए। समाज में जो कुछ हो रहा है, उसे महसूस करना और उन भावनाओं को अपने अभिनय के जरिए सामने लाना कलाकार की जिम्मेदारी है।

नाना के मुताबिक, अगर कोई कहानी इंसान को भीतर तक प्रभावित नहीं करती और उसे कुछ महसूस नहीं होता, तो उस कहानी का हिस्सा बनने का मकसद ही क्या है।

पैसे से ज्यादा जरूरी है जिंदगी को समझना

नाना पाटेकर ने सिनेमा के व्यावसायिक पहलू और जिंदगी की अनिश्चितता पर भी बेबाक अंदाज में बात की थी। उनका कहना था कि इंसान पैसे कमाने और चीजें इकट्ठा करने में लगा रहता है, लेकिन यह भूल जाता है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है।

उनके इन विचारों को अब उनके निधन के बाद नए नजरिए से देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर फैंस उनकी पुरानी बातों को साझा करते हुए कह रहे हैं कि अभिनेता ने जिंदगी और मौत के बारे में जिस तरह बात की थी, वह आज बेहद अलग और भावुक महसूस हो रही है।

अभिनय था भावनाओं को बाहर निकालने का जरिया

नाना पाटेकर के लिए अभिनय सिर्फ पर्दे पर किरदार निभाने का माध्यम नहीं था। वह इसे अपने भीतर की भावनाओं और बेचैनी को व्यक्त करने का जरिया भी मानते थे।

करीब पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने गंभीर से लेकर कॉमेडी तक कई तरह के किरदार निभाए। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग अंदाज ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत फिल्म जगत की कई हस्तियों ने शोक जताया है।

नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, अभिनय और जिंदगी को लेकर कही गई बेबाक बातें लंबे समय तक लोगों के बीच याद की जाती रहेंगी। उनकी मौत के बाद सामने आए ये विचार एक बार फिर यही सवाल छोड़ जाते हैं—क्या हम जिंदगी को उतनी गंभीरता से जी रहे हैं, जितनी गंभीरता से मौत को टालते रहते हैं?