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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तलवन गांव में किसानों के लिए जागरूकता कैंप लगाया गया

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तलवन गांव में किसानों के लिए जागरूकता कैंप लगाया गया..

 

गन्ने की खेती के तरीकों, कीट नियंत्रण, बीमारी के प्रबंधन और गन्ने के साथ दूसरी फसलें उगाने (इंटरक्रॉपिंग) के बारे में जानकारी दी गई..

 

किसानों की भलाई के लिए चलाई जा रही अलग-अलग सरकारी योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया

 

MBD NEWS जालंधर (हनी)17 जुलाई: कृषि और किसान कल्याण विभाग, जालंधर की गन्ना शाखा ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत नकोदर की सहकारी चीनी मिल से जुड़े तलवन गांव (नूरमहल) में किसानों के लिए एक जागरूकता कैंप आयोजित किया।

पंजाब के केन कमिश्नर डा. अमरीक सिंह के दिशा-निर्देशों और जालंधर के प्रोजेक्ट ऑफिसर डा. रणधीर सिंह ठाकुर के नेतृत्व में आयोजित इस कैंप में जालंधर के सहायक गन्ना विकास अधिकारी डा. गुरचरण सिंह, नकोदर की कृषि विकास अधिकारी (गन्ना) डा. सरबजीत कौर, कपूरथला के गन्ना अनुसंधान केंद्र से डा. राजिंदर कुमार और के.वी.के. नूरमहल से डा. संजीव कटारिया और डा. रचना गर्ग शामिल हुए। उन्होंने किसानों को गन्ने की खेती के तरीकों, कीट नियंत्रण, बीमारी के प्रबंधन, गन्ने के साथ दूसरी फसलें उगाने और किसानों की भलाई के लिए चलाई जा रही अलग-अलग सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

किसानों को संबोधित करते हुए डा. गुरचरण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पंजाब सरकार प्रति हेक्टेयर गन्ने के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से, पंजाब में इंटरक्रॉपिंग (गन्ने के साथ दूसरी फसलें उगाना) का दायरा बढ़ाने के लिए शरद ऋतु में गन्ने की बुवाई के मौसम के दौरान प्रदर्शन प्लॉट लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मिशन का उद्देश्य फसल उत्पादन, तकनीक और बीज के लिए सहायता देकर उत्पादन बढ़ाना, मिट्टी की सेहत सुधारना, किसानों की आय बढ़ाना और पोषण सुरक्षा को बेहतर बनाना है।

डा. रचना गर्ग ने के.वी.के. नूरमहल की किसानों को मिट्टी की जांच करवाने और संतुलित खाद का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। जिला प्रशिक्षण अधिकारी और के.वी.के नूरमहल के निदेशक डा. संजीव कुमार कटारिया ने कहा कि प्रति हेक्टेयर गन्ने की उत्पादकता बढ़ाकर गन्ने की खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रति हेक्टेयर गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के मकसद से गन्ना किसानों को ‘वाइड स्पेसिंग’ (पौधों के बीच ज़्यादा दूरी रखने) का तरीका अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

कीट विज्ञानी डा. राजिंदर कुमार ने गन्ने की फसल में कीटों और बीमारियों की रोकथाम के बारे में जानकारी दी। नकोदर के गन्ना कृषि विकास अधिकारी डा. सरबजीत कौर ने कहा कि शरद ऋतु की गन्ने की फसल से ज़्यादा आमदनी पाने के लिए इंटरक्रॉपिंग (मिश्रित खेती) बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि गेहूं, सरसों, आलू जैसी फ़सलें और सब्ज़ियां उगाकर घरेलू और बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है। नकोदर की कोऑपरेटिव मिल के सी.सी.ओ.डी. मनदीप सिंह ने किसानों को ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन पर गन्ने की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया।