क्या आप जानते है भारत की 5 सबसे तीखी मिर्ची के बारे में, एक का तो सेना भी बम बनाने में करती है इस्तेमाल
नई दिल्ली : भारतीय रसोई मसालों के बिना अधूरी है, और जब बात मिर्च की हो, तो इसके बिना तो हमारे व्यंजनों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमारा देश दुनियाभर में अपने चटक, तीखे और लजीज स्वाद के लिए मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के विभिन्न राज्यों में कुछ ऐसी मिर्च भी उगाई जाती हैं, जिनका तीखापन अच्छे-अच्छों के पसीने छुड़ा सकता है? आज हम आपको भारत की उन चुनिंदा और सबसे खतरनाक मिर्चों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी महक और तीखापन न सिर्फ आपके खाने का स्वाद बदल देंगे, बल्कि इनमें से एक मिर्च इतनी प्रचंड है कि भारतीय सेना भी इसका इस्तेमाल हथियार के रूप में करती है।
गिनीज बुक में दर्ज है भूत जोलोकिया का नाम
असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में पाई जाने वाली भूत जोलोकिया को भारत की सबसे तीखी मिर्च माना जाता है। साल 2007 में इसे दुनिया की सबसे तीखी मिर्च होने का खिताब मिला था और इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। इसका तीखापन इतना ज्यादा होता है कि इसका एक छोटा सा टुकड़ा भी पूरे बर्तन के खाने को तीखा करने के लिए काफी है। इसकी इसी खासियत के कारण भारतीय सेना भीड़ को तितर-बितर करने के लिए चिली ग्रेनेड (मिर्च बम) बनाने में इसका इस्तेमाल करती है। इसका उपयोग पैपर स्प्रे और तीखे अचार बनाने में भी किया जाता है।
आकार में छोटी लेकिन तीखेपन में है कांथारी का जलवा
केरल और गोवा के तटीय इलाकों में उगाई जाने वाली कांथारी मिर्च आकार में भले ही बेहद छोटी होती है, लेकिन इसके तीखेपन को हल्के में लेना भूल हो सकती है। देखने में मासूम लगने वाली इस मिर्च को स्थानीय लोग रोजमर्रा के खाने में चटनी, सब्जी और तीखे अचार बनाने के लिए बड़े चाव से इस्तेमाल करते हैं।
जीआई टैग से सम्मानित है सिरारखोंग हाथेई
मणिपुर की खूबसूरत वादियों में उगाई जाने वाली सिरारखोंग हाथेई मिर्च अपने अनूठे स्वाद और बेमिसाल तीखेपन के लिए पहचानी जाती है। इस मिर्च का जायका इसे देश की अन्य मिर्चों से बिल्कुल अलग खड़ा करता है। इस मिर्च की विशिष्टता और इसकी खास उपज को देखते हुए इसे भौगोलिक संकेतक (GI टैग) भी प्रदान किया गया है, जो इसकी गुणवत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
विदेशों तक फैली है गुंटुर सन्नम की महक
आंध्र प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध गुंटुर सन्नम मिर्च अपने आकर्षक गहरे लाल रंग और तेज स्वाद के लिए जानी जाती है। भारत के अलावा विदेशी बाजारों में भी इसकी भारी मांग बनी रहती है। इस मिर्च का उपयोग मुख्य रूप से मसाले, तीखे अचार और विभिन्न प्रकार के भारतीय व्यंजनों को जायकेदार बनाने के लिए भारी मात्रा में किया जाता है।
रंग और खुशबू से खाने की जान बनती है ब्यादगी
कर्नाटक के इलाकों में पैदा होने वाली ब्यादगी मिर्च भले ही अन्य मिर्चों की तुलना में बहुत ज्यादा तीखी नहीं होती, लेकिन इसका चटक लाल रंग और मनमोहक खुशबू इसे बेहद खास बनाती है। यही कारण है कि देशभर में लाल मिर्च पाउडर और मसालों के निर्माण में इसका सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है, ताकि खाने में एक शानदार रंगत आ सके।
इस पैमाने से तय होता है मिर्च का असली तीखापन
किसी भी मिर्च में कितना तीखापन है, इसे मापने के लिए ‘स्कोविल हीट यूनिट’ (SHU) का इस्तेमाल किया जाता है। जिस मिर्च का स्कोविल अंक जितना अधिक होता है, वह उतनी ही ज्यादा तीखी और खतरनाक मानी जाती है। आम भारतीय मिर्च का तीखापन जहां पांच हजार से पचास हजार एसएचयू के बीच होता है, वहीं भूत जोलोकिया का तीखापन दस लाख एसएचयू के पार पहुंच जाता है, जो इसे दुनिया की सबसे खौफनाक मिर्चों की श्रेणी में खड़ा करता है।









