Category: SPIRITUAL

  • आज खाटू श्याम लक्खी मेले का होगा समापन, क्या आप जानते हैं  हारे का सहारा माने जाने वाले बाबा श्याम की कहानी…

     आज खाटू श्याम लक्खी मेले का होगा समापन, क्या आप जानते हैं  हारे का सहारा माने जाने वाले बाबा श्याम की कहानी…

     

    Khatu Shyam Mela 2023: आज यानी 4 मार्च को राजस्थान के शीकर जिले में बाबा खाटू श्याम के लक्खी मेले का समापन होने जा रहा है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा श्याम के शरंण में पहुंच रहे हैं। बता दें मेले की शुरुआत 22 फरवरी को खाटू श्याम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। मान्यता है कि इस दौरान बाबा श्याम नगर भ्रमण पर निकलते हैं। बाबा श्याम का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है।

    Khatu shyam Mela 2023

    Khatu shyam Mela 2023: कौन हैं बाबा खाटू श्याम, पढ़िए महाभारत काल से जुड़ी कहानी

     

    मुख्य बातें
    आज यानी 4 मार्च को होगा लक्खी मेले का समापन। बाबा खाटू श्याम को माना जाता साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार। पौराणिक ग्रंथों में है खाटू श्याम का वर्णन।
    Khatu Shyam Mela 2023: उड़ती गुलाल नाचते गाते श्याम भक्त खाटू श्याम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि लक्खी मेले के दौरान बाबा श्याम के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। तथा जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का अंत (Falgun Mela 2023 Khatu Shyam) होता है। प्रत्येक वर्ष होली के दौरान राजस्थान के सीकर जिले में खाटू श्याम के लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है। इस साल 22 फरवरी को खाटू श्याम जी के कपाट खुलने के साथ मेले की शुरुआत हुई थी। वहीं आज यानी 4 मार्च को इसका समापन होने जा रहा है। बता दें खाटू श्याम को भगवान श्री कृष्ण का कलयुगी अवतार माना जाना (Falgun Mela 2023) जाता है। नीले रंग के अश्व पर सवार बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है। मान्यता है कि, बाबा का आशीर्वाद होने पर भक्त कभी अपने किसी कार्य में असफल नहीं होते तथा उस पर आने वाली सभी विपदाओं का नाश होता है।
    पौराणिक ग्रंथों में बाबा खाटू श्याम का उल्लेख मिलता है। खाटू श्याम का संबंध महाभारत काल से जुड़ा (Khatu Shyam Ji Mela) है। कहा जाता है कि बाबा खाटू श्याम पांडुपुत्र भीम के पौत्र थे। उनकी अपार शक्ति और क्षमता से प्रभावित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने अवतार में पूजन का आशीर्वाद दिया था।

    यही कारण है कि बाबा को भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप माना (Lakhi Mela 2023 Date) जाता है। बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बाबा आस लगाने वालों की झोली खाली नहीं रखते। बाबा खाटू श्याम को लखदातार, हारे का सहारा और शीश का दानी आदि नामों से जाना जाता है। ऐसे में इस लेख के माध्यम से आइए जानते हैं महाभारत काल से जुड़े बाबा श्याम की कहानी।

    महाभारत काल से जुड़ी है बाबा श्याम की कहानी

    बाबा खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है। पौराणिक ग्रंथों में बाबा श्याम को लेकर एक कथा वर्णित है। पांडव जब अपनी जान बचाते हुए इधर-उधर भटक रहे थे, तब भीम की मुलाकात हिडिम्बा से हुई थी। यह भीम को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थी। माता कुंती की आज्ञा से भीम और हिडिंबा का विवाह हुआ, जिससे घटोत्कच का जन्म हुआ। घटोत्कच को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम था बर्बरीक। बर्बरी अपने पिता से भी ज्यादा मायाबी और बलशाली था। बर्बरीक देवी भगवती का उपासक था। देवी के वरदान से उसे तीन दिव्य बाण प्राप्त हुए थे, जो अपने लक्ष्य को भेदकर वापस लौट आते थे। यही कारण था कि वह अत्यंत बलशाली था। साथ ही बर्बरीक को अमरता का वरदान भी प्राप्त था।
    महाभारत युद्ध के दौरान बर्बरीक नीले अश्व पर सवार कुरुक्षेत्र आ रहे थे।भगवान श्रीकृष्ण को आभास हो गया कि, यदि बर्बरीक युद्ध में शामिल हुआ तो परिणाम पाण्डवों के विरुद्ध हो सकता है। यही कारण है कि, भगवान श्रीकृष्ण एक ब्राह्मण का रूप धारण कर बर्बरी के पास आ गए और उन्होंने बर्बरीक से पूछा कि, तुम कौन हो और कुरुक्षेत्र क्यों जा रहे हो। बर्बरीक ने बड़े सहजता से जवाब देते हुए कहा कि, वह एक दानी योद्धा हैं, जो अपने एक बांण से महाभारत के युद्ध का निर्णय कर सकता है। इसे सुन भगवान श्रीकृष्ण चिंतित हो गए, उन्हें बर्बरीक की शक्ति का अहसास हो गया।

    भगवान श्रीकृष्ण को किया था शीश दान

    भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को युद्ध में शामिल होने से रोकने के लिए, दान में उनका सिर मांग लिया। बर्बरीक को आभास हो गया कि, वह ब्राह्मण नहीं बल्कि श्रीहरि भगवान विष्णु का स्वरूप हैं और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान दे दिया। बर्बरीक की सहजता को देख श्रीकृष्ण ने अपना साक्षात दर्शन दिया और उन्हें कलयुग में बाबा खाटू श्याम के रूप में पूजे जाने का आशीर्वाद दिया।
    सौजन्य : times now नवभारत
  • जालंधर प्रशासन के भगवा मार्च को रोकने हेतू अपनाएं यदाशक्ति प्रयासों के बावजूद भी शहर में जोरशोर से निकला विशाल भगवा मार्च,”जय श्री राम” से गुंजा पूरा शहर…

    जालंधर प्रशासन के भगवा मार्च को रोकने हेतू अपनाएं यदाशक्ति प्रयासों के बावजूद भी शहर में जोरशोर से निकला विशाल भगवा मार्च,”जय श्री राम” से गुंजा पूरा शहर…

    MBD WEB NEWS : जालंधर ( सुमेश शर्मा ) हिन्दू मंदिर एक्ट की मांग को लेकर जिला प्रशासन द्वारा बार-बार रोकने के प्रयासों के बावजूद भी भगवा धारियों द्वारा संत समाज के नेतृत्व में शहर में जोर शोर से विशाल रूप में भगवा मार्च निकाला गया। विशाल भगवा मार्च पटेल चौक स्थित साईं दास स्कूल के मैदान से निकाला गया।

     विशाल भगवा मार्च हिंदू मंदिर एक्ट टीम के प्रांत संयोजक मनोज नन्ना की अध्यक्षता में निकाला गया। जिसमें संत समाज से महंत रविकांत, महंत भगवत दास, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्वामी सजनानंद जी, महाराज महामंडलेश्वर बंसी दास जी, महामंडलेश्वर केशव दास जी, बाबा राज किशोर जी, विजय सिंह भारद्वाज, बाबा पवन दास, बाबा रघुनाथ राय , महंत सिया शरण जी, महंत मुरलीधर जी, महंत पवन राय जी , महंत रघुनाथ राय जी, महंत बलिराम जी, महंत जोगेश्वर जी ,महंत रामदास जी, महंत रघुनाथ राय ,महामंडलेश्वर ईश्वर दास, जी, महंत परमेश्वर दास ,स्वामी विश्वेश्वर दास जी ,निरंकारी समाज से संत पलविंदर सिंह जी , मास्टर सुखदेव सिंह, जी, अमरीक सिंह, रतन सिंह जी के नेतृत्व में शहर में विशाल भगवा मार्च निकाला गया ।

    भगवा मार्च में प्रांत संयोजक मनोज नन्ना ने विधायक रमन अरोड़ा विधायक शीतल अंगूराल तथा मुख्यमंत्री भगवंत मान के नाम तहसीलदार प्रवीण छिब्बर को मांग पत्र दिया। इस मौके पर बोलते हुए प्रांत संयोजक मनोज अन्ना ने कहा कि आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा चुनावों से पहले हिंदू मंदिर एक्ट बनाए जाने का वादा किया था। अब अरविंद केजरीवाल को हिंदुओं से किया गया वायदा जल्द पूर्ण किया जाना चाहिए।

    गौरतलब है कि आज का विशाल भगवा मार्च भी शहर के तमाम धार्मिक सामाजिक संगठनों मंदिर कमेटियों संत समाज शहर वासियों द्वारा जल्द हिंदू मंदिर एक्ट बनाए जाने की मांग को लेकर निकाला गया है। हालांकि जिला प्रशासन ने हिंदू मंदिर एक्ट की मांग को लेकर निकाले जाने वाले विशाल भगवा मार्च को रोकने के बहुत प्रयास किए। लेकिन हिंदू संगठनों में यहां इस बात को लेकर जिला प्रशासन के विरुद्ध रोष व्यापक था

    वही भगवा मार्च निकाले जाने को लेकर हिंदू संगठन दृढ़ संकल्पित दिखें और आखिरकार जिला प्रशासन को मजबूर होकर हिंदू संगठनों को भगवा मार्च निकाले जाने की अनुमति देनी ही पड़ी। जिसके उपरांत साईं दास स्कूल के मैदान से वाल्मीकि गेट, माई हीरा गेट , अड्डा टांडा , अड्डा होशियारपुर, खिंगरा गेट, पांच पीर चौक, प्रताप बाग चौक , फगवाड़ा गेट मार्केट, मिलाप चौक और अंत में श्रीराम चौक पर जाकर समापन हुआ। इस विशाल भगवा मार्च में मंदिर एक टीम के रुद्राक्ष शर्मा, हेमंत कुमार, रोहित अरोड़ा , संजीव शर्मा, आशु शर्मा, पंकज मोहन शर्मा, लकी अरोड़ा, गौरव शर्मा , गुरमीत निक्का, साहिल शर्मा ,रूद्र सेना संगठन के चेयरमैन दयाल वर्मा ,मोहित शर्मा, दिनेश कुमार, विशाल शर्मा, गौरव, संदीप वर्मा, रुषम शर्मा,लक्की बेदी,सुमेश शर्मा, विशाल, जोता सिंह, दीपक बठला, आशु पंडित, किशन लाल शर्मा, प्रदीप खुल्लर, दविंदर अरोड़ा, रविंदर अरोड़ा, संतोष शर्मा , ललित शर्मा, अरुण शर्मा, अजय मल्होत्रा ,गुरबख्श मदान, अधरव, इत्यादि भी उपस्थित रहे।

  • भोले बाबा के भक्तों के लिए आई बड़ी खुशखबरी, 25 अप्रैल से खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

     भोले बाबा के भक्तों के लिए आई बड़ी खुशखबरी, 25 अप्रैल से खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

    देहरादून : उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थल केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक केदारनाथ मंदिर के कपाट 25 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 20 मिनट में खुलेंगे। ऊखीमठ के ओम्कारेश्वर मंदिर से बाबा धाम के कपाट खुलने की घोषणा की गई है। 21 अप्रैल को बाबा की उत्सव डोली ऊखीमठ से केदारनाथ रवाना होगी।

    22 अप्रैल को विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में रात्रि प्रवास में करेगी। वहीं 23 अप्रैल को फाटा में बाबा की उत्सव डोली रात्रि प्रवास करेगी, जबकि 24 अप्रैल को गौरीकुंड में रात्रि प्रवास होगा। हर साल महाशिवरात्रि के पर्व पर केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि का ऐलान किया जाता है। हर साल देश के करोड़ो श्रद्धालु केदारनाथ धाम के कपाट खुलने का इंतजार करते हैं। ऐसे में ये खबर तमाम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है।

    सर्दियों में हर साल भारी बर्फबारी और भीषण ठंड की चपेट में रहने के कारण केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सभी चारों धामों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल दोबारा अप्रैल-मई में खोले जाते हैं।

  •  रेलवे शिवभक्तों के लिए लेकर आया खास तोहफा, कम पैसों में करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन

     

    नई दिल्ली – महाशिवरात्रि 18 फरवरी को है और शिवभक्तों के लिए भारत रेलवे खास ताेहफा लाया है। यह तोहफा है कम पैसों में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का। रेलवे की तरफ से महाशिवरात्रि नव ज्योतिर्लिंग यात्रा नामक पैकेज में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, ग्रिश्नेश्वर ज्योतिर्लिंग, औंढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग, परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग, मल्लिकार्जुन स्वामी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करवाए जाएंगे। यह टूर 13 और 12 रात का है। टूर की शुरुआत मदुरई से होगी। पैकेज का बोर्डिंग प्वाइंट है तिरुनेलवेली, मदुरै, डिंडीगुल, इरोड, सलेम, जोलारपेट्टई, काटपाडी, पेरम्बूर, नेल्लोर।

    पैकेज का शुल्क- 5,350 रुपये है। इस पैकेज के जरिए आप 8 मार्च 2023 से लेकर 20 मार्च 2023 तक इन सभी जगहों की यात्रा करेंगे। पैकेज में आपको ट्रेन में स्लीपर कोच से यात्रा करने की सुविधा मिलेगी। आपको हर जगह ठहरने के लिए उचित व्यवस्था मिलेगी।

  • अयोध्या पहुंची शिलाओं का राम भक्तों ने फूलों से किया भव्य स्वागत

     अयोध्या पहुंची शिलाओं का राम भक्तों ने फूलों से किया भव्य स्वागत

     

    अयोध्या : भगवान राम के भक्तों के लिए खुशखबरी है। 373 किलोमीटर और 7 दिन का सफर तय करने के बाद के बाद दो विशाल शालिग्राम शिलाएं अयोध्या पहुंच गई हैं। इसी 6 करोड़ साल पुराने शालिग्राम पत्थर से भगवान राम और सीता की मूर्ति बनेगी, जो राम दरबार में स्थापित होगी। जैसे ही शालिग्राम शिला अयोध्या पहुंची श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, निवर्तमान महापौर ऋषिकेश उपाध्याय सहित अन्य भाजपा नेताओं ने पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया।

    आज सुबह रामसेवक पुरम में 51 वैदिक ब्राह्मणों ने शालिग्राम शिलाओं का पूजन कराया। इसके बाद नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि और जानकी मंदिर के महंत तपेश्वर दास ने चंपत राय को शालिग्राम शिलाएं सौंप दी। रामनगरी पहुंची शिलाओं को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ नाचते भक्तों की भीड़ व जय श्रीराम के उद्घोष के बीच शालिग्राम शिलाएं रामसेवक पुरम कार्यशाला पहुंचीं, जहां अयोध्या तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी, सृष्टि महंत देवेंद्र दास ने शिलाओं पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

  • शालिग्राम शिला से बनेगी Ayodhya में भगवान राम-सीता की मूर्ति, शिलाओं के दर्शन के लिए सड़कों पर उमड़े राम भक्त…

    शालिग्राम शिला से बनेगी Ayodhya में भगवान राम-सीता की मूर्ति, शिलाओं के दर्शन के लिए सड़कों पर उमड़े राम भक्त…

     शालिग्राम शिला से बनेगी Ayodhya में भगवान राम-सीता की मूर्ति, शिलाओं के दर्शन के लिए सड़कों पर उमड़े राम भक्त…

     

     

     

    ​Shaligram for Ayodhya Ram Mandir: नेपाल के जनकपुरधाम यानि त्रेतायुग की मिथिला से अयोध्या का 6 करोड़ सालों से ज्यादा पुराना संबंध न सिर्फ गहरा है बल्कि भावों से भरा हुआ भी है। श्रीराम का बालस्वरूप साकार होने में अब विलंब नहीं है रामभक्त आह्लादित हैं क्योंकि ये शिला अति विशिष्ट है।

     

     

    झलक पाने के लोग बेताब

    शिलाओं से रामलला और माता जानकी की मूर्ति बनाई जाएंगी। रास्ते में हजारों की संख्या में खड़े लोग इन शिलाओं की एक झलक पाने को बेताब हैं। शालिग्राम शिलाओं के स्वागत में कई जगहों पर भजन-कीर्तन हो रहे हैं।  शालिग्राम शिलाओं को लेकर मेगा कवरेज दिन भर कई चैनलो पर जारी रहेगी। ट्रक पर फूल मालाओं से लदी, रोली से श्रंगार की गई ये शिला कोई मामूली शिला नहीं ये है बल्कि इससे ही बनेगी श्रीरामलला की प्रतिमा जो विराजेगी अयोध्या उनके धाम में।

    नेपाल (Neapl) से भेजी गई 2 शालिग्राम शिलाओं को लेकर बड़ी खबर आ रही है। नेपाल से भेजी गई 2 शालिग्राम (Shaligram) शिलाएं आज यूपी के गोरखपुर पहुंचेंगी..जिसका सीएम योगी (Yogi Adityanath) खुद स्वागत करेंगे। आज दोपहर तक इन शिलाओं के गोरखपुर पहुंचने की संभावना है। गोरखनाथ मंदिर में ही देवशिला रथ का रात्रि विश्राम होगा। इसके बाद 1 फरवरी की सुबह मुख्यमंत्री विधि-विधान से रथ को अयोध्या के लिए रवाना करेंगे। जगह जगह पर लोग शालिग्राम वाहन की पूजा कर रहे हैं। जिस वाहन में यह लाई जा रही हैं उसके टायर और शालिग्राम शिला को छूने की होड़ लगी है

  • चारधाम यात्रा इस वर्ष इस  तारीख से खुलेंगे गंगोत्री यमुनोत्री के कपाट

    चारधाम यात्रा इस वर्ष इस  तारीख से खुलेंगे गंगोत्री यमुनोत्री के कपाट

     

     

    देहरादून : चारधाम यात्रा 2023 का शंखनाद हो चुका है। चारोंधामों के कपाट खुलने की तिथियां घोषित हो रही हैं। गंगोत्री धाम के कपाट इस बार 22 अप्रैल को खुल रहे हैं। साथ ही यमुनोत्री धाम के कपाट भी 22 अप्रैल को ही खुलेंगे। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने धामों के कपाट खुलने की तिथियों की आज घोषणा की। इस तरह इस बार 22 अप्रैल से चारोंधामों के दर्शन के लिए तीर्थयात्री उत्तराखंड पहुंच जाएंगे।

    गंगोत्री और यमुनोत्री धाम उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं। गंगोत्री धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुल रहे हैं। गंगोत्री प्रमुख हिन्दू तीर्थस्थल है। गंगोत्री नगर से 19 किमी दूर गोमुख है, जो गंगोत्री हिमानी का अन्तिम छोर है और गंगा नदी का उद्गम स्थान है। गंगोत्री का गंगाजी मंदिर, समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भागीरथी के दाहिने ओर का परिवेश अत्यंत आकर्षक एवं मनोहारी है। यह स्थान उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर स्थित है।

    गंगा मैया के मंदिर का निर्माण गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा 18 वी शताब्दी के शुरूआत में किया गया था। वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था। प्रत्येक वर्ष मई से अक्टूबर के महीनो के बीच पतित पावनी गंगा मैया के दर्शन करने के लिए लाखो श्रद्धालु तीर्थयात्री यहां आते हैं। इस साल 22 अप्रैल को गंगोत्री के कपाट खुल रहे हैं। यमुनोत्री की ही तरह गंगोत्री का पतित पावन मंदिर भी अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खुलता है और दीपावली के दिन मंदिर के कपाट बंद होते हैं।

    वही, बसंत पंचमी के मौके पर बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित कर दी गई थी। इस साल बदरीनाथ के कपाट 27 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर खोले जाएंगे। कपाट खुलने की तिथि का ऐलान नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में राजपुरोहितों ने किया गया था।

  • बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री को मिली क्लीन चिट

    बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री को मिली क्लीन चिट

     

    नागपुर  : बागेश्वर धाम बाबा पंडित धीरेंद्र शास्त्री को नागपुर पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है। ये क्लीनचिट धीरेंद्र शास्त्री पर लगे अंधविश्वास फैलाने के आरोपों को लेकर है। धीरेंद्र शास्त्री का नागपुर में 5 से 11 जनवरी के बीच कार्यक्रम हुआ था जिसमें बाबा पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा था। इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के उपाध्यक्ष श्याम मानव ने शिकायत दर्ज कराई थी। वहीं जांच के बाद अब नागपुर पुलिस ने बाबा को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस का कहना है कि बाबा के ऊपर जो आरोप श्याम मानव की ओर से लगाए गए थे। वे पूरी तरह से निराधार हैं। हमने जांच में पाया कि बाबा ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कि उनके ऊपर अंधविश्वास फैलाने जैसा आरोप साबित हो।

  • संतों ने प्रयागराज में ‘धर्म सेंसर बोर्ड’ का किया गठन, देवी-देवताओं के अपमान वाली फिल्मों को नहीं होने देगा रिलीज

  • सजीपीसी ने सिख गुरुओं, उनके परिवार के सदस्यों से संबधित फिल्मों पर लगाया प्रतिबंध

    सजीपीसी ने सिख गुरुओं, उनके परिवार के सदस्यों से संबधित फिल्मों पर लगाया प्रतिबंध

     

    अमृतसर -शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने सिख भावनाओं के मद्देनजर अपने अगले फैसले तक किसी भी तरह की फिल्मों के माध्यम से गुरु साहिब और उनके परिवार के सदस्यों के चित्रण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह फैसला अधिवक्ता हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में मंगलवार को यहां हुई धर्म प्रचार कमेटी की बैठक में लिया गया। इसके साथ ही सिख जनरल अकाली बाबा फूला सिंह की 200 साल की शहादत शताब्दी मनाने के लिए शिरोमणि कमेटी और निहंग सिंह पार्टियों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त कमेटी बनाने का भी फैसला लिया है। एसजीपीसी के अध्यक्ष धामी ने कहा कि हाल ही में सिख गुरुओं और उनके परिवार के सदस्यों पर फिल्म बनाने की प्रवृत्ति के कारण सिख संगत में भारी रोष है, जिसे देखते हुए शिरोमणि कमेटी ने गुरुओं पर फिल्म बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। किसी भी तरह की फिल्मों के माध्यम से और उनके परिवार के सदस्यों के चरित्र के फिल्मांकन पर प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने कहा कि इस गंभीर मामले पर शिरोमणि कमेटी के पास समय-समय पर विभिन्न धार्मिक समाजों और जमातियों की आपत्तियां पहुंचती रही हैं, जिसके कारण गुरु साहिब और उनके परिवार से जुड़ी फिल्मों पर अगले फैसले तक रोक लगाई जाएगी। अगले वर्ष मार्च में आने वाले अकाली बाबा फूला सिंह की 200 साल की शहीदी शताब्दी के संबंध में उन्होंने कहा कि इस संबंध में निहंग सिंह संगठन और शिरोमणि कमेटी संयुक्त रूप से कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस बारे में शिरोमणि पंथ अकाली बुढा दल के प्रमुख जत्थेदार बाबा बलबीर सिंह से विचार-विमर्श कर एक संयुक्त कमेटी का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कमेटी में शिरोमणि कमेटी और निहंग सिंह दल के तीन सदस्यों को शामिल किया जाएगा।

    अधिवक्ता धामी ने कहा कि धार्मिक आंदोलन को और बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में एक विशेष वैन तैयार की गई है, जिसमें प्रचारक गांव-गांव जाएंगे। सीमावर्ती इलाकों में विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांवों में धार्मिक दीवानों के साथ-साथ मिशनरी समूह परिवारों के साथ सिख इतिहास, सिद्धांतों और नैतिकता के बारे में चर्चा करेंगे, ताकि लोग सिख धर्म की उत्पत्ति को आसानी से समझ सकें। इस दौरान शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने भी धार्मिक प्रवचन के लिए तैयार वैन को रवाना किया, जिसका उपयोग शहीद सिख मिशनरी कॉलेज की देखरेख में धर्म प्रचार कार्य के लिए किया जाएगा।