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  • लद्दाख में बने गोला बारूद के लिए स्टोरेज, रक्षा मंत्रालय ने पर्यावरण मंत्रालय से मांगी मंजूरी

    लद्दाख में बने गोला बारूद के लिए स्टोरेज, रक्षा मंत्रालय ने पर्यावरण मंत्रालय से मांगी मंजूरी

     

    भारतीय सेना की ताकत और सुविधा को बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मांगी है. गोला-बारूद की उपलब्धता आसानी से हो सके इसके लिए इस प्रस्ताव को भेजा गया है. सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फॉर्मेशन एम्युनिशन स्टोरेज फैसिलिटी स्थापित करना है.

     

    रक्षा मंत्रालय ने लद्दाख में अतिरिक्त गोला बारूद स्टोरेज क्षमता बनाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मांगी है. इससे सैन्य यूनिट्स की तैनाती के दौरान गोला-बारूद की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी. पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के बेहद करीब हानले और फोती ला जैसी जगह पर स्टोरेज सुविधा स्थापित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है.

    सूत्रों के अनुसार, ये प्लान खासतौर पर पूर्वी लद्दाख के उन इलाकों के लिए बनाया जा रहा है, जो चीन की सीमा से सटे हुए हैं. इन इलाकों में गलवान घाटी भी शामिल है. इससे सैन्य यूनिट्स को ऑपरेशनल तैनाती के दौरान गोला-बारूद की उपलब्धता बेहतर तरीके से हो सकेगी. इससे रणनीतिक स्थानों पर फॉर्मेशन एम्युनिशन स्टोरेज फैसिलिटी स्थापित करना शामिल है. स्टोरेज फैसिलिटी स्थापित करने के लिए गलवान घाटी को भी शामिल किया गया है. यहां पर 2020 में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.

    अभी स्टोरेज सेंटर की दूरी है ज्यादा

    हानले से लगभग 250 किलोमीटर और फोती ला से लगभग 300 किलोमीटर दूर हथियारों का स्टोरेज है. दूरी की वजह से अगर अचानक जरूरत हो तो आपूर्ति में बाधाएं पैदा हो जाती हैं. इसलिए ऐसी लोकेशन में गोला बारूद का स्टोरेज होना चाहिए. जहां से ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से जवानों को हथियार और गोला बारूद जल्द से जल्द मिल सके.

  • सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच श्रीनगर में भीषण मुठभेड़, निशात बाग में सेना ने तीन दहशतगर्दों को घेरा;पूरा इलाका किया गया सील

    सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच श्रीनगर में भीषण मुठभेड़, निशात बाग में सेना ने तीन दहशतगर्दों को घेरा;पूरा इलाका किया गया सील

     सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच श्रीनगर में भीषण मुठभेड़, निशात बाग में सेना ने तीन दहशतगर्दों को घेरा;पूरा इलाका किया गया सील

     

     श्रीनगर (Srinagar) के निशात इलाके में सुरक्षा बलों (Security Forces) और आतंकियों (Terrorist) के बीच मुठभेड़ हो रही है। आतंकी (Terrorist) एक मकान में छिपे हुए हैं उनकी संख्या तीन तक हो सकती है। इन आतंकियों (Terrorist) को पकड़ने के लिए शनिवार की रात को अभियान चलाया गया था। जिस जगह यह मुठभेड़ हो रही है वहां से कुछ ही दूरी दाचीगाम नेशनल पार्क और जंगल का इलाका भी शुरू होता है।

    इससे पहले, सोपोर में सुरक्षाबलों (Security Forces) और आतंकियों (Terrorist) के बीच फिर मुठभेड़ (Encounter) शुरू हुई थी। इस दौरान जवानों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी थी। जवानों ने एक आतंकी (Terrorist) को ढेर कर दिया था। इलाके में आतंकियों (Terrorist) के छिपे होने का इनपुट मिलने पर जवानों ने सर्च ऑपरेशन (Search Operation) चलाया गया। इस दौरान ने आतंकियों (Terrorist) ने फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने एक आतंकी को मार गिराया।

  • दिल्ली में प्रदूषण रोकने में जुटेंगे 10 हजार सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स; CM आतिशी का बड़ा ऐलान

    दिल्ली में प्रदूषण रोकने में जुटेंगे 10 हजार सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स; CM आतिशी का बड़ा ऐलान

     

     

    नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स यानी बस मार्शलों को फिर से काम पर लगाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री आतिशी ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी। मुख्यमंत्री आतिशी ने बताया कि बस मार्शलों की नियुक्ति महिलाओं की सुरक्षा के लिए की गई थी।

    इस फैसले से लगभग 10 हजार सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को रोजगार मिलेगा। इन मार्शलों को अगले चार महीनों के लिए नौकरी पर रखा गया है। सीएम आतिशी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने साजिश के तहत पिछले साल अक्टूबर में बस मार्शलों को हटा दिया था। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए 2018 में इनकी तैनाती की गई थी, लेकिन भाजपा ने राजनीतिक कारणों से इन्हें हटा दिया।

    अगले चार महीनों के दौरान बस मार्शल प्रदूषण रोकने के अभियान में शामिल होंगे। उन्हें प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की पहचान करने और प्रदूषण फैलाने वाले कार्यों को रोकने का काम सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि वह बस मार्शलों की स्थायी नियुक्ति के लिए भी प्रयास कर रही हैं। उन्होंने इस संबंध में उपराज्यपाल को एक प्रस्ताव भेजा है।

  • अयोध्या में ठंडक होने के बाद 20 नवंबर से गुनगुने जल से स्नान करेंगे रामलला, ठंड के बचाव के लिए होंगे ये सब उपाय

    अयोध्या में ठंडक होने के बाद 20 नवंबर से गुनगुने जल से स्नान करेंगे रामलला, ठंड के बचाव के लिए होंगे ये सब उपाय

     

     

    अयोध्या : सर्दियों की शुरुआत के साथ अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला के लिए विशेष तैयारी की जा रही है। भारतीय परंपरा के अनुसार, देवताओं का भी मौसम के अनुसार ध्यान रखा जाता है। अब इसी परंपरा के तहत 20 नवंबर (अगहन की पंचमी) से रामलला को रजाई ओढ़ाई जाएगी।

    श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास महाराज ने बताया कि जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, प्रभु के स्नान, भोग और वस्त्रों में बदलाव किए जाएंगे, ताकि ठंडक का अहसास न हो। उन्होंने बताया कि जैसे हम अपने परिजनों का बदलते मौसम में ध्‍यान रखते हैं, उसी तरह भगवान श्रीराम की देखभाल होगी। ठंड के आगमन के साथ ही भगवान रामलला की देखभाल में कई बदलाव किए जाएंगे, इसमें गुनगुने जल से स्नान, गर्म भोग और वस्त्र परिवर्तन शामिल हैं।

    बता दें कि मंदिर के मुख्य पुजारी पिछले कुछ दिनों से लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे और अब पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अयोध्या लौट आए हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही सर्दी बढ़ती है, वैसे ही मंदिर में भी रामलला के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। अगहन की पंचमी से नियमित रूप से भगवान को रजाई ओढ़ाई जाती है, ताकि प्रभु को ठंड न लगे। साथ ही, गुनगुने पानी का उपयोग स्नान में किया जाने लगता है, जिससे श्रीरामलला को शीत से बचाया जा सके। भोग में भी परिवर्तन किया जाता है। ठंड के दिनों में गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थों का भोग लगाया जाता है, ताकि प्रभु को मौसम की अनुकूलता के अनुसार भोजन प्राप्त हो। जैसे ही ठंड बढ़ती है, जरूरत पड़ने पर मंदिर में ब्लोअर भी लगाया जाता है, ताकि वहां का वातावरण ठंड न हो।

    आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि भारतीय संस्कृति में देवताओं का ऐसा ध्यान रखना परंपरा का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह भावना दर्शाती है कि भक्तजन अपने आराध्य के प्रति कैसी निष्ठा और प्रेम रखते हैं।

  • जानें किस जगह अब पुरुष टेलर नहीं ले सकेंगे महिलाओं का माप ? जिम में दिखेंगी केवल महिला ट्रेनर… नया प्रस्ताव तैयार

    जानें किस जगह अब पुरुष टेलर नहीं ले सकेंगे महिलाओं का माप ? जिम में दिखेंगी केवल महिला ट्रेनर… नया प्रस्ताव तैयार

     

    लखनऊ : अब पुरुष टेलर महिलाओं के कपड़ों का माप नहीं ले सकेंगे और न ही जिम और योगा सेंटर में महिलाओं को पुरुष जिम ट्रेनर ट्रेनिंग देंगे। यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने कानपुर के एकता हत्याकांड के बाद तैयार किया है। हालांकि प्रस्ताव पारित नहीं हुआ लेकिन प्रस्ताव के तथ्य सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। प्रस्ताव के मुताबिक कोचिंग सेंटरों पर सक्रिय सीसीटीवी एवं वाशरूम आदि की व्यवस्था अनिवार्य है। महिलाओं से सम्बन्धित वस्त्र आदि की ब्रिकी की दुकानों पर महिला कर्मचारी का होना अनिवार्य है।

    आयोग की सदस्य हिमानी अग्रवाल ने शुक्रवार को बताया कि 28 अक्टूबर को हुई आयोग की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया है कि महिलाओं के कपड़ों का नाप सिर्फ महिला दर्जी ही लें और जिस जगह नाप लिया जा रहा हो वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने रखा था जिसका बैठक में मौजूद सदस्यों ने समर्थन किया। महिला आयोग की ओर से नए प्रस्तावों को योगी सरकार के समक्ष भेज दिया गया है। अब शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा रहेगा बरकरार..

     सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा रहेगा बरकरार..

     

     

    नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसख्यंक दर्जे (AMU minority status will remain) पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट का कहना है कि एएमयू का अल्पसंख्यक का दर्जा बरकरार रहेगा। कोर्ट ने 4-3 (4-3 verdict) के बहुमत से यह फैसला सुना दिया है। इस मामले पर सीजेआई समेत चार जजों ने एकमत फैसला दिया है जबकि तीन जजों ने डिसेंट नोट दिया है। मामले पर सीजेआई और जस्टिस पारदीवाला एकमत हैं। वहीं, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का फैसला अलग है।

     अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है, जो धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने तथा उनके प्रशासन का अधिकार भी देता है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुना दिया। पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे बी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा भी शामिल हैं। जजों की पीठ ने 8 दिन तक दलीलें सुनने के बाद एक फरवरी को इस सवाल पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    एक फरवरी को एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे के मसले पर देश की शीर्ष अदालत ने कहा था कि एएमयू एक्ट में 1981 का संशोधन, जिसने प्रभावी रूप से इसे अल्पसंख्यक दर्जा दिया, ने केवल आधे-अधूरे मन से काम किया। प्रतिष्ठित संस्थान को 1951 से पहले की स्थिति में बहाल नहीं किया। एएमयू एक्ट, 1920 अलीगढ़ में एक शिक्षण और आवासीय मुस्लिम विश्वविद्यालय की बात करता है। जबकि 1951 के संशोधन के जरिए विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों के लिए अनिवार्य धार्मिक शिक्षा को खत्म करने का प्रावधान किया गया।

    इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना साल 1875 में सर सैयद अहमद खान की अगुवाई में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज के रूप में की गई थी। कई साल के बाद 1920 में, इसे एक विश्वविद्यालय में तब्दील कर दिया गया।

  • सरकारी नौकरियों के भर्ती नियमों को बीच में नहीं बदले सकते, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

    सरकारी नौकरियों के भर्ती नियमों को बीच में नहीं बदले सकते, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

     

    नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सरकारी नौकरियों में भर्ती नियमों में बीच प्रक्रिया में तब तक नहीं बदल सकते जब तक कि मौजूदा नियम या विज्ञापन (जो मौजूदा नियमों के विपरीत न हो) इसकी अनुमति न दे। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले निर्धारित किए जा चुके नियमों से बीच में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। पीठ में न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि चयन नियम मनमाने नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप होने चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से कहा कि पारदर्शिता और गैर-भेदभाव सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की पहचान होनी चाहिए तथा बीच में नियमों में बदलाव करके उम्मीदवारों को हैरान- परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

    संविधान पीठ ने तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय मामले में यह फैसला सुनाते हुए कहा कि उम्मीदवारों को चौंकाने के लिए नियमों को नहीं बदला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि चयन सूची में रखे जाने के बाद उक्त पद के उम्मीदवार को नियुक्ति का अधिकार प्राप्त नहीं होता, लेकिन सरकार वास्तविक कारणों से रिक्तियों को नही भरने का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि अगर वैकेंसी हैं तो सरकार चयन सूची में विचाराधीन क्षेत्र के किसी व्यक्ति को नियुक्ति देने से मनमाने ढंग से इनकार नहीं कर सकते।

    इस मामले को तेज प्रकाश पाठक और अन्य बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय और अन्य (2013) के मामले में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजा गया था, जिसने कि ‘मंजूश्री बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य (2008)’ के मामले में पिछले फैसले पर संदेह जताया था। इस मामले कहा गया था कि चयन मानदंड को बीच में नहीं बदला जा सकता है। संविधान पीठ ने जुलाई में सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    मामला राजस्थान हाईकोर्ट में 13 अनुवादकों की भर्ती से जुड़ा है। इस भर्ती में राज्य सरकार ने बीच में ही भर्ती के नियम बदल दिए थे। भर्ती के बीच में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने का नियम लागू कर दिया गया था। इस संशोधित मानदंड को लागू करने पर 3 उम्मीदवारों का चयन किया गया और शेष उम्मीदवार बाहर हो गए थे। 3 असफल उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट के समक्ष एक रिट याचिका दायर करके इस परिणाम को चुनौती दी जिसे मार्च 2010 में खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और के.मंजुश्री आदि बनाम आंध्र प्रदेश राज्य केस में 2008 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।

  • शाहरुख खान को मिली जान से मारने की धमकी

    शाहरुख खान को मिली जान से मारने की धमकी

     

     

    मुंबई : बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान (Shahrukh Khan) को जान से मारने की धमकी मिली है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, फैजान नाम के शख्स ने धमकी भरा कॉल किया था। जब उसका कॉल ट्रेस किया गया, तो वो रायपुर का निकला। अब पुलिस की टीम रायपुर चली गई है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है।

    शाहरुख खान की कंपनी रेड चिली के दफ्तर में फोन करके उन्हें धमकी दी गई है। कॉल करने वाले ने कहा कि अगर शाहरुख खान अपनी जान बचाना चाहता है तो हमें करोड़ों रुपया दे, नहीं तो अंजाम भुगतना पड़ेगा और फिर कॉल को काट दिया गया। आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। साल 2023 में ‘पठान’ और ‘जवान’ की सफलता के बाद भी उन्हें जान से मारने की धमकी मिल चुकी है, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

  • School जा रहे Principal को Bike सवारों ने गोलियां से भूना, मौके पर ही मौत, CCTV में कैद हुई वारदात

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    Principal going to school was shot by bike riders, died on the spot, incident captured in CCTV

    School जा रहे Principal को Bike सवारों ने गोलियां से भूना, मौके पर ही मौत, CCTV में कैद हुई वारदात

    •  मुरादाबादः यूपी के मुरादाबाद में कुछ बदमाशों द्वारा एक प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है, वहीं हत्यारों के खिलाफ मामला दर्ज करके उनकी तलाश में छापामारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि मृतक प्रिंसिपल प्राइवेट स्कूल में कार्यरत थे और पैदल ही स्कूल जा रहे थे। मृतक की पहचान शबाबुल हुसैन के रूप में हुई है।

     

    इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार प्रिंसिपल शबाबुल हुसैन लाकड़ी फाजलपुर स्थित श्री साईं पब्लिक स्कूल में कार्यरत थे और मंगलवार सुबह पैदल स्कूल जा रहे थे इस दौरान पीछे से आए बाइक सवार बदमाशों ने आकर उनके सिर में गोली मार दी

    जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें आसपास के लोगों ने तुरंत उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हत्या की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई। वहीं, सीनियर पुलिस अधिकारी और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर जांच कर रही है।

    मामले की जांच कर रहे मौके पर पहुंचे एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि घटना सुबह लगभग 8:00 बजे के करीब हुई है। उन्होंने बताया कि प्रिंसिपल सबाबुल अपने घर से पैदल स्कूल जा रहे थे, तभी पीछे से आए बाइक पर आए बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया और फायरिंग करने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। वहीं यह पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। सूचना के बाद भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया है। वहीं, आसपास के लोगों ने प्रिंसिपल को पास के अस्पताल में पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    इस संबंध में जानकारी देते हुए एसपी सिटी ने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर बाइक सवार अज्ञात हमलावरों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है। इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई है, और स्थानीय लोगों में गुस्से का माहौल है। पुलिस सभी एंगल से मामले की जांच कर रही है, और जल्द ही मामले का खुलासा किए जाने की उम्मीद है। पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई। सीनियर पुलिस अधिकारी और फोरेंसिक टीम घटनास्थन पर जांच कर रही है।

  • LMV लाइसेंस धारक रखने वाला व्यक्ति अब 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकेंगा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

    LMV लाइसेंस धारक रखने वाला व्यक्ति अब 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकेंगा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

     

     

    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) का ड्राइविंग लाइसेंस रखने वाला व्यक्ति अब 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकता है। यह फैसला बीमा कंपनियों और ड्राइवरों दोनों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ इस पर फैसला सुनाया है।

    बीमा कंपनियां लंबे समय से इस बात पर सवाल उठाती रही थीं कि क्या एलएमवी लाइसेंस धारक ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने के लिए योग्य हैं। उनका तर्क था कि दोनों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की आवश्यकता होती है। इस मुद्दे पर कई बार विवाद हुए और अदालतों में मुकदमे भी हुए।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है कि एलएमवी लाइसेंस धारक 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकते हैं। इस फैसले से बीमा कंपनियों को अब ऐसे मामलों में क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकेंगी। सरकार ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन करके इस फैसले को कानूनी रूप देगी।

    इस फैसले के बाद अब ड्राइवरों को अलग से ट्रांसपोर्ट वाहन का लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। बीमा कंपनियों को अब इस मुद्दे पर विवाद करने की जरूरत नहीं होगी। इस फैसले से यातायात नियमों में एकरूपता आएगी। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चलाते हैं।