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  • बढ़ती गर्मी के कारण पंजाब में गहराया बिजली संकट, बदला जा सकता है दफ्तरों का समय

    बढ़ती गर्मी के कारण पंजाब में गहराया बिजली संकट, बदला जा सकता है दफ्तरों का समय

    पटियाला- पंजाब में बढ़ती गर्मी के कारण पारा 44 डिग्री के पार चला गया है तो वहीं अब प्रदेश के लोगों को लंबे बिजली कटों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्ज फेडरेशन ने राज्य में गंभीर हो रही बिजली की उपलब्धता व आपूर्ति की स्थिति पर चिंता जताई है। जिसको लेकर फेडरेशन की तरफ से मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा गया है।

    कार्यालय का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक
    पत्र में कहा गया है कि “पंजाब राज्य में, 2023 के दौरान इसी अवधि की तुलना में 1 से 15 जून, 2024 के बीच बिजली की खपत में 43% की वृद्धि हुई है, जबकि अधिकतम मांग जून 2023 में 11309 मेगावाट से बढ़कर जून 2024 में 15775 मेगावाट हो गई है। पूरे पंजाब राज्य में धान की खेती के कारण जून के अंत तक अतिरिक्त कृषि भार बढ़ने की उम्मीद है, जिससे बिजली की असहनीय स्थिति पैदा हो सकती है।” “महोदय (पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का जिक्र करते हुए), एआईपीईएफ आपको भारत का सबसे कुशल और जनहितैषी मुख्यमंत्री मानता है और इसलिए आपसे अनुरोध करता है कि आप हमारे उपरोक्त पत्र में सूचीबद्ध बिजली खपत को नियंत्रित करने की पहल का नेतृत्व करें। हमारी राय में, यदि नीचे दोहराए गए इन कदमों को तुरंत लागू नहीं किया गया तो स्थिति गंभीर हो जाएगी।”

    सुझाए गए कदम इस प्रकार हैं:
    – कार्यालय का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जाना चाहिए।
    – सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, मॉल और दुकानें शाम 7 बजे बंद कर दी जानी चाहिए।
    – उद्योग पर पीक लोड प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    बिजली से कई दिन तक रहना पड़ सकता है वंचित
    फेडरेशन का कहना है कि यदि स्थिति ऐसी ही रही तो ग्रिड में गड़बड़ी की पूरी संभावना है और लोगों को बिजली से कई दिन वंचित भी रहना पड़ सकता है। फेडरेशन ने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से बिजली की मांग नियंत्रित करने के लिए कोई कदम न उठाने पर भी चिंता जताई है। इसके साथ ही फेडरेशन ने राज्य में बिजली चोरी पर चिंता जता सरकार को सुझाव दिया है कि बिजली चोरों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज करें। बता दें कि 2023 में अधिकतम मांग 11,309 मेगावाट थी। अब वह 15,775 मेगावाट है।

    धान की रोपाई का बिजली पर असर
    धान की रोपाई शुरू होने से बिजली की मांग भी बढ़ती जा रही है। राज्य में बिजली की मांग बढ़ने से कट भी लग रहे हैं। यहां तक कि कई जगह तो आठ घंटे तक के कट भी लगाए जा रहे हैं। यहां तक कि आने वाले समय में लोगों को आठ घंटे से भी ज्यादा लंबे कटों का सामना करना पड़ सकता है और यह संकट कई दिनों तक रहने का भी अनुमान है।

    ताजा आंकड़ों के मुताबिक 10 जून को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 12607 मेगावाट, धान सीजन शुरू होते ही 11 जून को बढ़कर 13761 मेगावाट पहुंच गई थी। इसके बाद 12 जून को 14798 मेगावाट, 13 को 15379 मेगावाट और शुक्रवार को 15704 मेगावाट दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि 11 जून को धान की रोपाई शुरू होते ही चार दिनों में बिजली की मांग में 3097 मेगावाट की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

  • जानें किस जगह इंजीनियरिंग कॉलेज की कैंटीन के खाने में निकला जहरीले सांप का बच्चा? 15 छात्र बीमार

    जानें किस जगह इंजीनियरिंग कॉलेज की कैंटीन के खाने में निकला जहरीले सांप का बच्चा? 15 छात्र बीमार

     

     

    बिहार के बांका में स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने खाने में सांप का मरा हुआ बच्चा निकलने का दावा दिया. जैसे ही एक छात्र के खाने में सांप का मरा हुआ बच्चा मिला तो उसने बाकी के छात्रों को बताया. इसके बाद छात्रों ने जमकर हंगामा किया. लेकिन तब तक कुछ छात्र खाना खा चुके थे. थोड़ी देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ी. तुरंत उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. फिलहाल मामले में जांच की जा रही है.

     

    बिहार: इंजीनियरिंग कॉलेज की कैंटीन के खाने में निकला जहरीले सांप का बच्चा? 15 छात्र बीमार

    खाने में निकला सांप का बच्चा.

    जरा सोचिए, आप खाना खा रहे हों और तभी आपको उसमें रेंगता हुआ कोई कीड़ा दिख जाए? यह सोचते ही किसी का भी मन खराब हो जाएगा. उसे उल्टी होने लगेगी. लेकिन बिहार के बांका से तो खाने में मरा हुआ सांप का बच्चा निकलने की खबर सामने आई है. जी हां, ये बात बिल्कुल सच है. घटना बांका से महज 7 किलोमीटर दूर इंजीनियरिंग कॉलेज की है. छात्रों का दावा है कि एक छात्र के खाने में सांप का मरा हुआ बच्चा निकला.

    उसने इस बारे में अन्य छात्रों को बताया. जिसके बाद सभी छात्रों ने इसे लेकर खूब हंगामा किया. आरोप है कि कैंटीन के खाने की गुणवत्ता को लेकर पहले भी इसकी शिकायत कॉलेज प्रशासन से की गई थी. लेकिन इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया गया. गुरुवार की रात जब छात्रों को डिनर दिया गया तो उस खाने में जहरीले सांप का बच्चा निकला. जब तक खाने में सांप का पता चलता तब तक कुछ छात्रों ने डिनर कर लिया था.

    खाने के बाद उन छात्रों की तबीयत खराब होने लगी. 15 छात्रों को तुरंत बांका के सदर अस्पताल लाया गया. इलाज के बाद सभी छात्रों को वापस कॉलेज भेज दिया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए बांका सदर एसडीएम और एसडीपीओ मौके पर पहुंचे. कुछ देर बाद बांका की जिलाधिकारी अंशुल कुमार भी कॉलेज पहुंचीं और खुद मामले की जांच की.

    प्रशासन ने खारिज किया दावा

    बांका SDO अभिनाश कुमार ने कहा कि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि खाने में निकला कीड़ा कोई जहरीले सांप का बच्चा था. उसकी जांच अभी की जा रही है. खाने के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है. लेकिन खाने में गुणवत्ता की कमी को लेकर मेस वाले पर जुर्माना जरूर लगाया गया है. SDO ने कहा हमने मामले की जांच की है. मेस वाले पर जुर्माना लगाया गया है. बच्चों को समझाकर फिर से खाना बनवाया गया. उसके बाद प्रिंसिपल और छात्रों ने एक साथ भोजन किया. फिलहाल मामले की जांच जारी है

  • हाय ये भयंकर गर्मी; लू की चपेट में पंजाब , मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए जारी किया रेड अलर्ट 

    हाय ये भयंकर गर्मी; लू की चपेट में पंजाब , मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए जारी किया रेड अलर्ट 

    हाय ये भयंकर गर्मी; लू की चपेट में पंजाब , मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए जारी किया रेड अलर्ट

    चंडीगढ़ – पंजाब और हरियाणा में शुष्क मौसम के कारण यह राज्य भीषण लू की चपेट में हैं। पंजाब में अधिकांश स्थानों से भीषण गर्मी की खबरें आ रही हैं। पंजाब में कल की तुलना में, आज औसत अधिकतम तापमान में 0.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। पंजाब में तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है। राज्य में बठिंडा में सबसे अधिक तापमान 48.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कल की तुलना में आज औसत अधिकतम तापमान में 0.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है।

    पंजाब में में भीषण गर्मी देख कह रहे हाय ये गर्मी । अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, पठानकोट , फरीदकोट और चंडीगढ़ में गर्मी का प्रकोप देखा गया। इकतीस मई तक अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस रहने के आसार हैं। हरियाणा में तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस अधिक है। राज्य के सिरसा में 48.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया।· नारनौल, रोहतक, सिरसा में भीषण गर्मी देखी गयी। चंडीगढ़ , अंबाला, हिसार, करनाल, भिवानी में गर्मी का प्रकोप देखा गया। अगले दो दिनों के लिये पंजाब और हरियाणा में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

  • आखिर कौन है जिम्मेदार! अस्पतालों में बार बार लगती आग के लिए, इसका कोई हल है क्या ?

    आखिर कौन है जिम्मेदार! अस्पतालों में बार बार लगती आग के लिए, इसका कोई हल है क्या ?

     

    शनिवार को पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार इलाक़े के बच्चों के अस्पताल में भयंकर आग लग गई. इस आग ने 6 नवजात बच्चों की जान ले ली. दिल्ली में आग लगने की ये घटना कोई पहली नहीं है इसने अस्पतालों की लच्चर व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. आखिर क्या वजह है कि बार बार अस्पतालों में आग लगती है और इसका हल क्या है?

     

    अस्पतालों में बार बार लगती आग के लिए कौन जिम्मेदार, इसका हल क्या है?

    अस्पतालों में क्यों लगती है आग

    जिन अस्पतालों में मरीज अपना इलाज करने और सेहतमंद होने के लिए के लिए जाते हैं, वहां अगर इंसानों की मौत होने लगे, तो भला इससे बड़ी और कौन सी त्रासदी हो सकती है? शनिवार को पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार इलाक़े के बच्चों के अस्पताल में भी कुछ ऐसा ही घटना घटी. इस आग ने 7 नवजात बच्चों की जान ले ली. दिल्ली में आग लगने की ये घटना कोई पहली नहीं है लेकिन हैरानी ये देखकर होती है कि इन हादसों से कोई सीख नहीं रहा. इस असतर्क रवैया का खामियाज सिर्फ हॉस्पिटल आर्थिक तौर पर नहीं उठाते बल्कि लोगों का विश्वास भी कम होते चला जाता है.

    इस तरह की लापरवाही कितनी बड़ी है इसका अंदाजा आप हालिया हादसे से ही लगा सकते हैं. पुलिस ने जानकारी दी है कि अस्पताल का नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी 31 मार्च को ही समाप्त हो गया था. और तो और नर्सिंग होम को सिर्फ 5 बेड की परमिशन थी जबकि एक साथ 25-30 बच्चों को भर्ती किया जा रहा था. इसके अलावा नर्सिंग होम में 5 बेड के हिसाब से ही ऑक्सीजन सिलेंडर होने चाहिए थे. लेकिन हादसे के बाद 32 ऑक्सीजन सिलेंडर बरामद हुए. नतीजन शॉर्ट सर्किट से सिलेंडर में आग लगी और वहीं से बाकी जगहों पर आग फैलती चली गई.

    दिल्ली में 2 साल में 66 अस्पतालों में लगी आग

    आंकड़े बताते हैं कि बीते 2 साल में दिल्ली के 66 अस्पताल आग की चपेट में आ चुके हैं. जिनमें से 30 मामले 2022 में और 36 मामले पिछले साल यानी 2023 में सामने आए. इसी साल 26 फरवरी को, मध्य दिल्ली के नायक अस्पताल में भयानक आग लग गई थी. जिसकी वजह से सात मंजिला इमरजेंसी ब्लॉक इमारत से 50 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला गया था. इसमें मरीज और अस्पताल के कर्मचारी दोनों शामिल थे. 2023 में जनवरी से मई महीनों में आग लगने की घटनाओं के लिए 5,970 कॉल किए गए. वहीं 2024 में इन्हीं महीनों के दौरान 8,201 कॉल किए जा चुके हैं.

  • आग ने मचाया मौत का तांडव;आग लगने की घटनाओं से 19 बच्चों समेत 38 की हुई मौत

    आग ने मचाया मौत का तांडव;आग लगने की घटनाओं से 19 बच्चों समेत 38 की हुई मौत

     

    पिछले 24 घंटे में गुजरात से लेकर दिल्ली तक मौत का तांडव जारी रहा. आगजनी की तीन बड़ी घटना में 19 बच्चों समेत 38 लोगों की मौत हो गई. दिल्ली बेबी केयर कांड में 7 बच्चों की मौत हो गई. वहीं, राजकोट में राजकोट अग्निकांड में 12 बच्चों समेत 28 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा कृष्णा नगर के एक घर में आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई

    गुजरात से दिल्ली तक मौत का तांडव, आग लगने से 19 बच्चों समेत 38 की मौत

    आगजनी की घटना में गुजरात से दिल्ली तक मौत का त

    आगजनी की तीन बड़ी घटना में 19 बच्चों समेत 38 लोगों की मौत हो गई. दिल्ली बेबी केयर कांड में 7 बच्चों की मौत हो गई. वहीं, राजकोट में राजकोट अग्निकांड में 12 बच्चों समेत 28 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा कृष्णा नगर के एक घर में आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई.

     शनिवार रात 11:30 बजे विवेक विहार के न्यू बॉर्न बेबी केयर सेंटर में आग लगने से सात मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि कृष्णा नगर के एक घर में आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई. वहीं, राजकोट अग्निकांड में 12 बच्चों समेत 28 लोगों की मौत हो गई. दिल्ली के फायर डायरेक्टर अतुल गर्ग का कहना है कि 11:32 पर आग लगने की कॉल मिली और कॉलर ने बताया कि ब्लास्ट हो रहे हैं. हमने शुरू में सात फायर गाड़ी भेजी लेकिन अस्पताल में बच्चों को देखते हुए हमने कुल 14 गाड़ियों को मौके पर भेजा.

    बताया जा रहा है की पांच सिलेंडर ब्लास्ट हुई, जिसकी वजह से आग बहुत तेजी से फैल गई. छोटे बच्चे थे, खुद निकल नहीं सकते थे, इसलिए फायर की टीम के लिए बहुत चैलेंजिंग काम था. बच्चों को सुरक्षित बाहर निकलना और साथ ही आग को बुझाना ताकि आग फैलने ना पाए. इसलिए हमने दो टीमें बनाईं, जिनमें से एक बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाले और दूसरी आग पर काबू पाए. 12 बच्चों को हमने रेस्क्यू कर अस्पताल भेजा, जिनमें से सात की मौत हो चुकी है.

    फायर के कोशिश के बाद भी हम उन्हें बचा नहीं पाए. क्योंकि ब्लास्ट हुए थे इस वजह से आग फैली और बराबर की बिल्डिंग में भी आग फैल गई. फायर की टीम मौके पर पहुंची तो उन्हें वहां अस्पताल के कर्मचारी नहीं मिले. ऐसा लग रहा है कि ब्लास्ट हुआ था तो लगता है कि अस्पताल के कर्मचारी निकल गए थे ,क्योंकि सारे बच्चे हमें ही निकालने पड़े. हो सकता है कि अस्पताल के कर्मचारी खुद घायल हो गए हो और बच्चों को उठाने पर वहां से चले गए.

    अपनी जान बचाकर भागे अस्पताल के कर्मचारी

    ऐसा लग रहा है कि बच्चों को नहीं बचाया और अपनी जान बचाकर अस्पताल के कर्मचारी वहां से चले गए. रेस्क्यू ऑपरेशन काफी मुश्किल था क्योंकि ब्लास्ट हुआ था, तो पूरी बिल्डिंग में आग लगी हुई थी, इसलिए बिल्डिंग की सीढ़ियों का इस्तेमाल नहीं कर सकते, इसलिए खिड़की से बच्चों को बाहर निकाल गया. सीढ़ी लगाई गई. ह्यूमन चैन बनाई गई और उसके जरिए मासूम बच्चों को खिड़की के रास्ते बाहर निकाला गया. 10 दिन के छोटे बच्चों को उठाना ,उनको संभाल के निकालना बहुत चैलेंजिंग काम था. अंदर धुआ था, बाहर ब्लास्ट हो रहा था.

  • पतंजलि की मुश्किलें बड़ी,अब सोन पापड़ी का सैंपल हुआ फेल, AGM समेत 3 को जेल

    पतंजलि की मुश्किलें बड़ी,अब सोन पापड़ी का सैंपल हुआ फेल, AGM समेत 3 को जेल

     

    पिथौरागढ़ – बाबा रामदेव की पतंजलि की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामले में पतंजलि की सोन पापड़ी का सैंपल फेल होने पर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कंपनी के असिस्टेंट जनरल मैनेजर (एजीएम), डिस्ट्रीब्यूटर कान्हा जी प्राइवेट लिमिटेड के असिस्टेंट मैनेजर और एक व्यापारी को छह-छह माह की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा कोर्ट ने तीनों पर अर्थदंड भी लगाया। दरअसल 17 सितंबर 2019 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के जिला सुरक्षा अधिकारी ने बेरीनाग बाजार में लीलाधर पाठक की दुकान से पतंजलि नवरत्न इलायची सोनपापड़ी के सैंपल लिए थे। सैंपल को जांच के लिए रुद्रपुर के जांच लैब में भेजा गया था। जांच में सोनपापड़ी के सैंपल मानकों के विपरीत पाए गए यानी कि फेल हो गए। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 59 के तहत सजा सुनाई गई है। असिस्टेंट मैनेजर को 50 हजार और अन्य 2 दोषियों को 10 और 25 हजार रुपये जुर्माना भरना होगा। मामले में शिकायतकर्ता की ओर से रितेश वर्मा ने पैरवी की।

  • सिविल सर्जन दफ्तर के सामने बैठ मुलाजिमो ने किया कामकाज ठप्प, जाने वजह

    सिविल सर्जन दफ्तर के सामने बैठ मुलाजिमो ने किया कामकाज ठप्प, जाने वजह

    जालंधर (शर्मा) जालंधर सिविल हॉस्पिटल के सिविल सर्जन के अंतर्गत आते सभी विभागों के मुलाजिमो ने कामकाज ठप्प करतें हुए हड़ताल की l हड़ताल का नेतृत्व कर रहे प्रधान दिनेश ने बताया की सरकार द्वारा एक प्रपोजल के तहत सिविल सर्जन दफ़्तर को ध्वस्त कर अन्य क्रिटिकल केयर ब्लॉक दफ्तर बनाया जा रहा है l जिसको लेकर 16 मई डेड लाइन दी गई है l उन्होंने कहाँ की इतनी जल्दी यदि सामान उठाते हैँ या कोई मिसप्लेस हो जाता है तों उसकी जिम्मेवारी उनकी बनती है l जबकि यह प्रपोजल पहले रद्द किया जा चूका था l दोबारा से प्रपोजल लगाकर उन्हें तंग किया जा रहा है l वह धक्केशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे
    उधर जब इस सम्बन्ध में सिविल सर्जन से बात की गई तों उन्होंने कहाँ की मुलाजिमो से बातचीत चल रही है उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी l सरकार का जो प्रपोजल है जनता के हित में है l क्यूंकि कॉविड के समय काफ़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा था l और क्रिटिकल केयर ब्लॉक जो प्रोजेक्ट है बहुत अच्छा प्रोजेक्ट है

  • FSSAI ने मसालों में 10 गुना ज्यादा कीटनाशक को मंजूरी वाली खबरों को लेकर कही ये बात,पढ़े पूरी खबर…

    FSSAI ने मसालों में 10 गुना ज्यादा कीटनाशक को मंजूरी वाली खबरों को लेकर कही ये बात,पढ़े पूरी खबर…

     

    नई दिल्ली- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जड़ी-बूटियों और मसालों में तय मानक से 10 गुना अधिक कीटनाशक मिलाने की इजाजत देने से जुड़ी सभी मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है। फूड रेगुलेटर ने एक प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि इस तरह की सभी खबरें फर्जी और दुर्भावनापूर्ण हैं।

    FSSAI ने कहा, ‘भारत में मैक्सिमम रेसेड्यू लेवल यानी कीटनाशक मिलाने की तय सीमा दुनियाभर में सबसे सख्त मानकों में से एक है। किस खाद्य सामाग्री में कितना कीटनाशक का MRL होगा, यह उनके जोखिम के आधार पर अलग-अलग तय किए जाते हैं।’

    कुछ कीटनाशकों के लिए बढ़ी थी लिमिट
    फूड रेगुलेटर FSSAI ने यह स्वीकार किया कि कुछ कीटनाशक के लिए उसने लिमिट बढ़ाई थी, जो भारत में केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIB & RC) से रजिस्टर्ड नहीं हैं। उनके लिए यह लिमिट 0.01 mg/kg से 10 गुना बढ़ाकर 0.1 mg/kg की गई थी। FSSAI ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव साइंटिस्ट पैनल की सिफारिश पर किया था। भारत में CIB & RC कीटनाशकों की मैन्युफैक्चरिंग, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज जैसी चीजों की निगरानी करती है। FSSAI ने कहा, ‘MRL प्रकृति में गतिशील हैं और इनमें वैज्ञानिक डेटा के आधार पर नियमित रूप से बदलाव होता रहता है। यह चीज ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से होती है।’

    FSSAI भी कर रहा मसालों की जांच
    पिछले महीने सिंगापुर और हांगकांग ने MDH और एवरेस्ट के कुछ मसालों पर बैन लगा दिया और उन्हें वापस लेने का भी आदेश दिया। उनका आरोप था कि इन मसालों में हानिकारक एथिलीन ऑक्साइड है, जो कैंसर की वजह बन सकता है। अमेरिका समेत कम से कम पांच देश भारतीय मसालों की जांच कर रहे हैं। एफएसएसएआई भी मसालों कंपनियों की जांच कर रहा है। उसने मसाला पाउडर बनाने वाली कंपनियों के कारखानों का निरीक्षण करने के साथ सैंपल जुटाने और टेस्टिंग करने का निर्देश दिया है। फूड रेगुलेटर यह भी जांच करेगा कि क्या मसाला कंपनियों के प्रोडक्ट्स में एथिलीन ऑक्साइड मौजूद है।

  • कॉमेडियन भारती सिंह की तबीयत बिगड़ने के कारण करवाया गया अस्पताल में भर्ती…

    कॉमेडियन भारती सिंह की तबीयत बिगड़ने के कारण करवाया गया अस्पताल में भर्ती…

    मुंबई : कॉमेडियन भारती सिंह ने अपने लेटेस्ट व्लॉग में बताया कि वो मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में एडमिट है। व्लॉग में उन्होंने फैंस से उनके लिए प्रार्थना करने के लिए कहा। कॉमेडियन ने बताया कि उन्हें कुछ दिन से पेट में काफी दर्द हो रहा था। जब ये दर्द बर्दाशत से बाहर हो गया तो वो अस्पताल चेकअप के लिए गई, जहां उन्हें पता चला कि उनके गाल ब्लैडर में स्टोन है।

    भारती सिंह ने अपने व्लॉग में बताया कि अभी वो हॉस्पिटल में है। कॉमेडियन ने बताया कि उनके पेट में तीन दिन से दर्द हो रहा था। पहले उन्हें लगा कि ये एसिडिटी की वजह से हो रहा है। कॉमेडियन ने बताया कि दर्द की वजह से ना तो भारती और ना ही उनके पति हर्ष लिंबाचिया सो पाए। जब दर्द ज्यादा बढ़ गया को वो हॉस्पिटल आई, जहां कुछ टेस्ट के बाद डॉक्टर ने बताया कि उनके गाल ब्लैडर में स्टोन है। व्लॉग में उन्होंने अपने फैंस से प्रार्थना करने के लिए भी कहा। वीडियो में हॉस्पिटल में एडमिट होते हुए भी भारती सिंह स्टाफ के साथ हंसी-मजाक करते दिखे। वहीं, वो अपने बेटे गोला को याद कर भावुक हो जाती है।

  • डिप्टी कमिशनर ने लोगों के लिए साफ़-सुथरा और गुणवत्ता भरपूर खाने-पीने का सामान यकीनी बनाने के लिए दिए आदेश

    डिप्टी कमिशनर ने लोगों के लिए साफ़-सुथरा और गुणवत्ता भरपूर खाने-पीने का सामान यकीनी बनाने के लिए दिए आदेश

     

    डिप्टी कमिशनर ने लोगों के लिए साफ़-सुथरा और गुणवत्ता भरपूर खाने-पीने का सामान यकीनी बनाने के लिए दिए आदेश

     

    ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी को खाने- पीने वाले समान की दुकानों/ संस्थानों की फूड सैंपलिंग करने को कहा

     

    MBD NEWS (सुमेश शर्मा) जालंधर, 30 अप्रैल लोगों के लिए साफ़- सुथरे और गुणवत्ता भरपूर खाने- पीने वाले पदार्थ यकीनी बनाने के उदेश्य से डिप्टी कमिशनर डा. हिमांशु अग्रवाल ने आज ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी जालंधर को ज़िले में नियमित तौर पर खाने- पीने वाले समान की दुकानों/ संस्थानों की फूड सैपलिंग करने के निर्देश दिए।

    डिप्टी कमिशनर ने बताया कि यह निर्देश लोगों की स्वास्थ्य संभाल के मद्देनज़र जारी किए गए है क्योंकि उनको ज़िले की कुछ दुकानों/ संस्थानों द्वारा ख़राब और कम गुणवत्ता वाली खाने- पीने वाली वस्तुओं की बिक्री सम्बन्धित शिकायतें प्राप्त हुई थी।

    डा. हिमांशु ने कहा कि खाने- पीने के समान की दुकानों/ संस्थानों की साफ़- सफ़ाई का विशेष ध्यान रखा जाना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इनकी तरफ से बेचा जाने वाला समान अच्छी गुणवत्ता वाला हो क्योंकि यह विषय लोगों की स्वास्थ्य के साथ जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी को आदेश दिए कि लोगों को सुरक्षित और साफ़- सुथरे खाना मुहैया करवाने के लिए इन संस्थाओं को उपयुक्त
    ट्रेनिंग देने का प्रबंध किया जाए, जिस में खाने- पीने वाली वस्तुओं की तैयारी, परोसने, पैकिंग दौरान सफ़ाई और गुणवत्ता बरकरार रखने के बारे में बताया जाए।

    उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारी को इन संस्थानो को साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखने संबंधी एडवाइजरी जारी करने को भी कहा।

    डिप्टी कमिशनर ने ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी को इन संस्थानों की नियमित सैंपलिंग करने के आदेश दिए कि यदि खाने- पीने वाले चीजों की गुणवत्ता निर्धारित पैमाने से कम पाई जाती है तो उस संस्थान के ख़िलाफ़ बनती कार्यवाही करके उनके दफ़्तर में रिपोर्ट भेजना सुनिश्चित किया जाए।

    कैप्शन -डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल इस संबंधी जानकारी देते हुए ।