जबतक पाक द्वारा आतंकवाद जारी तबतक PAK से कोई बात नहीं- जयशंकर की जर्मन विदेश मंत्री को कही दो टूक

जबतक पाक द्वारा आतंकवाद जारी तबतक PAK से कोई बात नहीं- जयशंकर की जर्मन विदेश मंत्री को कही दो टूक

 

जर्मनी की विदेश मंत्री ने एस जयशंकर से मुलाकात की. इस दौरान दोनों के बीच हिन्द प्रशांत, यूक्रेन संकट, अफगानिस्तान में स्थिति, पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे, सीरिया की स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर चर्चा हुई.

आतंकवाद जारी रहने तक PAK से कोई बात नहीं- जयशंकर की जर्मन विदेश मंत्री को दो टूक

एस जयशंकर से जर्मनी की विदेश मंत्री ने की मुलाकात.

भारत और जर्मनी ने ऊर्जा, कारोबार, जलवायु परिवर्तन सहित द्विपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ करने एवं यूक्रेन संकट सहित वैश्विक मुद्दों पर सोमवार को विस्तृत चर्चा की और आवाजाही साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए. रूस से कच्चे तेल के आयात का बचाव करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पिछने नौ महीने में यूरोपीय देशों ने इसकी जितनी खरीद की है, उसका छठा हिस्सा ही भारत ने खरीदा है. दोनों देशों ने हिन्द प्रशांत, यूक्रेन संकट, अफगानिस्तान में स्थिति, पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे, सीरिया की स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के साथ तब तक बातचीत नहीं हो सकती, जब तक कि वह सीमापार से आतंकवाद को जारी रखता है. जयशंकर ने जर्मनी की अपनी समकक्ष एनालेना बेयरबॉक की मौजूदगी में यह टिप्पणी की और कहा कि बर्लिन इस बात को समझता है. विदेश मंत्री ने कहा, हमने हिन्द प्रशांत के विषय और ईरान के मुद्दे, लचीली आपूर्ति श्रृंखला सृजित करने और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बारे में भी चर्चा की. इसके साथ ही हमारी चर्चा में अधिक सुरक्षित वैश्विक अर्थव्यस्था का विषय भी रहा.

रूस से तेल आयात करने का उठा मुद्दा

जयशंकर ने जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक के साथ द्विपक्षीय सहयोग के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा की. बैठक के बाद जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक के साथ संयुक्त प्रेस संबोधन में जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के कारोबार को बढ़ाने के बारे में चर्चा यूक्रेन संघर्ष से काफी पहले शुरू हुई थी. जयशंकर ने रूस से कच्चे तेल के आयात पर कहा कि यह बाजार से जुड़े कारकों से प्रेरित हैं. उन्होंने कहा कि फरवरी से नवंबर तक यूरोपीय संघ ने रूस से अधिक मात्रा में जीवाश्म ईंधन का आयात किया है.

जयशंकर ने कहा, मैं समझता हूं कि संघर्ष की स्थिति (यूक्रेन में) है. मैं यह भी समझता हूं कि यूरोप का एक विचार है और यूरोप अपने विकल्प चुनेगा और यह यूरोप का अधिकार है. लेकिन यूरोप अपनी पसंद के अनुसार ऊर्जा जरूरतों को लेकर विकल्प चुने और फिर भारत को कुछ और करने के लिए कहे. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया से यूरोप द्वारा तेल खरीदने से भी दबाव पड़ा है. उनसे पूछा गया था कि भारत क्यों रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है. वहीं, बेयरबॉक ने कहा, जब दुनिया कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही है तो हमारे लिये मिलकर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है.

आतंकवाद पर भी हुई बात

क्षेत्र को चीन की चुनौतियों के बारे में एक प्रश्न के जवाब में जर्मनी की विदेश मंत्री ने कहा कि खतरों का आकलन करने की जरूरत है. उन्होंने साथ ही चीन को कई मायने में प्रतिस्पर्धी बताया. बेयरबॉक दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार को भारत पहुंची. उनकी यात्रा ऐसे समय में हुई है जब चार दिन पहले ही भारत ने जी20 समूह की औपचारिक अध्यक्षता ग्रहण की है. जयशंकर ने कहा, हमने अफगानिस्तान की स्थिति और पाकिस्तान के बारे में चर्चा की जिसमें सीमा पार आतंकवाद से जुड़ा विषय भी शामिल था.

विदेश मंत्री ने कहा, हमने दोनों देशों के लोगों के बीच सम्पर्क बढ़ाने पर चर्चा की. साथ ही इस दिशा में समग्र प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे लोगों के लिए एक-दूसरे के देश में पढ़ाई, शोध और काम करना आसान होगा. जयशंकर ने कहा, हमारी चर्चा में वीजा से जुड़ा मुद्दा भी उठा. बेयरबॉक ने कहा कि दुनिया कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही है और इस समय में भारत ने जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की है, साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मासिक अध्यक्ष भी बना है. उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाना चाहते हैं जो सबसे बड़ा लोकतंत्र और उभरती हुई अर्थव्यवस्था है तथा दुनिया के कई देशों के लिए आदर्श है

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