MBD WEB NEWS

PoK में पाकिस्तानी सेना का ‘डर्टी गेम’, शांतिपूर्ण आंदोलन कुचलने के लिए रची खौफनाक साजिश

PoK में पाकिस्तानी सेना का ‘डर्टी गेम’, शांतिपूर्ण आंदोलन कुचलने के लिए रची खौफनाक साजिश

 

नई दिल्ली : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुनियादी अधिकारों, बेलगाम महंगाई और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चल रहा ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) का शांतिपूर्ण नागरिक आंदोलन अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। एक विशेष खुफिया रिपोर्ट में इस बात का बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी (ISI) इस जन-आंदोलन को पूरी तरह से कुचलने और दुनिया की नजरों में बदनाम करने के लिए एक बेहद खौफनाक साजिश रच रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुजफ्फराबाद मार्च से ठीक पहले पाकिस्तानी सेना लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों के गुर्गों की इन प्रदर्शनों में घुसपैठ कराने की तैयारी में है। पाकिस्तानी सेना की इस नापाक और खौफनाक साजिश को चार बड़े रणनीतिक हिस्सों में अंजाम देने की तैयारी है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने का घिनौना प्लान

पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान का सबसे पहला और मुख्य उद्देश्य इन खूंखार आतंकी गुर्गों को आम नागरिकों के भेष में प्रदर्शन कर रही भीड़ के अंदर घुसाना है। योजना के तहत ये घुसपैठिए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों पर जानलेवा हमला करेंगे, सार्वजनिक संपत्तियों में भारी तोड़फोड़ और आगजनी करेंगे। जैसे ही यह शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक रूप ले लेगा, पाकिस्तानी सेना को इसे एक “राष्ट्र-विरोधी और आतंकी साजिश” घोषित करने का मनचाहा मौका मिल जाएगा। इसके तुरंत बाद सेना आम और बेगुनाह नागरिकों के खिलाफ कड़े मिलिट्री और काउंटर-टेरर ऑपरेशन शुरू कर देगी।

बुनियादी मांगों को ‘जिहादी नैरेटिव’ से बदलने की कोशिश

अब तक PoK में चल रहा यह जन-आंदोलन मुख्य रूप से बिजली बिलों में कटौती, आटे पर सब्सिडी, बेतहाशा महंगाई और स्थानीय गवर्नेंस जैसे पूरी तरह से गैर-धार्मिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। लेकिन अब पाकिस्तानी सेना लश्कर और जैश के नेटवर्क को PoK के सूचना तंत्र में खुली छूट देने जा रही है। इसका सीधा मकसद स्थानीय नागरिकों की जायज मांगों को दबाकर वहां ‘कट्टरपंथी इस्लामिक एजेंडा’ और ‘भारत-विरोधी बयानबाजी’ को हवा देना है। इस तरह सेना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस जायज नागरिक आंदोलन की साख को पूरी तरह से खत्म करना चाहती है।

प्रॉक्सी आतंकियों के जरिए शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की साजिश

खुफिया इनपुट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना इस बार सीधे तौर पर पुलिस या रेंजर्स का इस्तेमाल करने के बजाय लश्कर और जैश के ‘डिनाइबल नेटवर्क’ का सहारा लेगी। सेना ऐसे आतंकी ठिकानों का इस्तेमाल करेगी जिनसे वह बाद में आसानी से पल्ला झाड़ सके। इन्हीं आतंकियों के जरिए आंदोलन के मुख्य आयोजकों और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं को डराने, अगवा करने या उन्हें हमेशा के लिए खत्म करने की योजना बनाई जा रही है। अगर किसी बड़े अवामी नेता की हत्या होती है, तो पाकिस्तानी सेना अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए इसे ‘आतंकी गुटों की आपसी रंजिश’ का नाम देकर आसानी से खुद को बचा लेगी।

पूरे PoK का पूर्ण रूप से सैन्यीकरण करने की तैयारी

कथित तौर पर सेना द्वारा प्रायोजित इस पूरी हिंसा का अंतिम और सबसे बड़ा उद्देश्य पाकिस्तानी फौज को पूरे PoK में बड़े पैमाने पर अतिरिक्त बलों की तैनाती का एक कानूनी बहाना सौंपना है। काउंटर-टेरर ऑपरेशन और इमरजेंसी सुरक्षा उपायों की आड़ में पूरे इलाके में पाकिस्तान रेंजर्स और फ्रंटियर कोर (FC) के हजारों जवानों को तैनात किया जाएगा। इस तरह सेना नागरिक इलाकों पर अपनी दमघोंटू पकड़ को और ज्यादा मजबूत कर लेगी, ताकि भविष्य में कोई भी नागरिक अपने हकों के लिए आवाज उठाने की हिम्मत न कर सके।