वॉशिंगटन डीसी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को तुरंत परमाणु हथियारों की परीक्षण प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। उनका कहना है कि यह परीक्षण चीन और रूस के समान स्तर पर किए जाने चाहिए। गौरतलब है कि अमेरिका ने आखिरी बार वर्ष 1992 में परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था। बुधवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दूसरे देशों द्वारा किए जा रहे परमाणु परीक्षणों को देखते हुए उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को समान आधार पर तुरंत परीक्षण शुरू करने का आदेश दिया है।
America will conduct nuclear test after 33 years, Trump said – tests should be equal to Russia and China : राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में रूस और चीन का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में रूस दूसरे स्थान पर और चीन तीसरे स्थान पर है, लेकिन आने वाले पांच वर्षों में दोनों देश बराबरी पर पहुंच सकते हैं। ट्रंप की यह घोषणा उस समय आई जब वे दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से कुछ समय पहले थे।
ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 1996 में ‘कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी’ (CTBT) के तहत भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर वैश्विक प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि अमेरिका और चीन ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन अब तक इसे औपचारिक स्वीकृति नहीं दी गई है।
पूर्ण परमाणु परीक्षण (फुल न्यूक्लियर वेपन टेस्ट) में वास्तविक परमाणु बम का विस्फोट किया जाता है, जिससे उसकी क्षमता, विकिरण प्रभाव और तकनीकी दक्षता का आकलन किया जा सके। ऐसे परीक्षण आमतौर पर भूमिगत या वायुमंडल में किए जाते हैं, लेकिन इनसे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने का खतरा होता है।
अमेरिका ने आखिरी बार 23 सितंबर 1992 को नेवादा में परमाणु परीक्षण किया था। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने की घोषणा की थी। रूस और चीन ने भी 1990 के दशक के बाद से परीक्षण रोक दिए थे। अब ट्रंप द्वारा परीक्षण दोबारा शुरू करने का संकेत दिए जाने से वैश्विक स्तर पर नई परमाणु प्रतिस्पर्धा की आशंका बढ़ गई है।










