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दिल्ली-मुंबई छोड़ यहां बस रहे हैं लोग, रिटायरमेंट के लिए सबसे पसंदीदा बना यह शहर

दिल्ली-मुंबई छोड़ यहां बस रहे हैं लोग, रिटायरमेंट के लिए सबसे पसंदीदा बना यह शहर

 

नई दिल्ली : अपनी पूरी जिंदगी दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों की तेज रफ्तार और तनावभरी जिंदगी में गुजारने के बाद लोग सुकून भरे बुढ़ापे के लिए एक नए ठिकाने का रुख कर रहे हैं। भारत में रिटायरमेंट के बाद बसने के लिए अब किसी बड़े मेट्रो शहर के बजाय दक्षिण भारत का कोयंबटूर पहली पसंद बन चुका है। कभी मजबूरी और लाचारी का प्रतीक माने जाने वाले ओल्ड एज होम्स की जगह अब अल्ट्रा-लक्जरी सीनियर लिविंग कम्युनिटीज ने ले ली है, जहां संपन्न वर्ग अपनी मर्जी और शान से दूसरी पारी जीने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है।

5,500 से अधिक यूनिट्स के साथ कोयंबटूर का दबदबा
हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट एडवाइजरी फर्म नोएसिस (Noesis) के अनुसार, कोयंबटूर में इस समय करीब 5,500 ऑर्गेनाइज्ड सीनियर लिविंग यूनिट्स मौजूद हैं, जो देश के किसी भी अन्य शहर के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं। पूरे देश की कुल सीनियर लिविंग संपत्तियों का 22 फीसदी हिस्सा अकेले कोयंबटूर में केंद्रित है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां घर खरीदने वालों में सिर्फ 25 फीसदी स्थानीय लोग हैं; बाकी 75 प्रतिशत खरीदार चेन्नई, बेंगलुरु, केरल और मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) से स्वदेश लौटने वाले अप्रवासी भारतीय (NRI) हैं।

70 लाख का विला 3.5 करोड़ में, कीमतों में 5 गुना उछाल
चेन्नई स्थित एल्डरकेयर कंसल्टिंग फर्म ‘केयर फाइंडर’ के अनुसार, कोयंबटूर में कुछ साल पहले जिस सीनियर लिविंग विला की कीमत 70 लाख रुपये हुआ करती थी, उसकी कीमत आज उछलकर 3.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह भारी उछाल दिखाता है कि लोग अपने बुढ़ापे को सुरक्षित, आरामदायक और गरिमापूर्ण बनाने के लिए बड़ा प्रीमियम चुकाने में जरा भी हिचक नहीं रहे हैं। समाज में सीनियर कम्युनिटी में रहने को लेकर जो झिझक या सामाजिक संकोच था, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

70 की उम्र का इंतजार नहीं, 58 साल में ही बुकिंग
सीनियर लिविंग खरीदने वालों की प्रोफाइल में भी जमीन-आसमान का फर्क आया है। करीब एक दशक पहले तक इन घरों में 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग जाते थे और अक्सर फैसला बच्चों की मजबूरी पर निर्भर होता था। लेकिन आज खरीदार की औसत उम्र घटकर 58 से 65 साल रह गई है। लोग नौकरी में रहते हुए या रिटायर होते ही पहले से एडवांस में अपने लिए लग्जरी घर खरीद रहे हैं। एकल परिवारों (न्यूक्लियर फैमिली) के बढ़ते चलन ने इस मांग को और हवा दी है।

बेहतरीन मौसम, वर्ल्ड-क्लास अस्पताल और शांत जीवन
कोयंबटूर को ‘दक्षिण भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता है। साल भर सुहावना रहने वाला मौसम बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होता है। इसके अलावा, शहर का वर्ल्ड-क्लास हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतरीन एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे बड़े केंद्रों से नजदीकी इसे सबसे मुफीद बनाती है, जिससे दूर रहने वाले बच्चे आसानी से कुछ ही घंटों में माता-पिता तक पहुंच सकते हैं।

रियल एस्टेट नहीं, 20 साल की सर्विस का खेल
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी जेएलएल (JLL) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में जून 2026 तक ऑर्गेनाइज्ड सीनियर लिविंग सप्लाई 25,050 यूनिट्स तक पहुंच जाएगी, जबकि देश की कुल जरूरत 3 लाख यूनिट्स की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेक्टर सिर्फ ईंट-पत्थर बेचने का नहीं, बल्कि अगले 20 सालों तक लगातार होटल जैसी हाई-क्लास सर्विस और मेडिकल केयर देने का काम है। कोयंबटूर की भारी सफलता के बाद अब मैसूर, कोच्चि, देहरादून, गोवा और पुडुचेरी जैसे शांत शहर भी नए सीनियर लिविंग हब के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।