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संसद में जारी गतिरोध को शांत करने और गतिरोध खत्म करने के लिए किरेन रिजिजू ने की राहुल गांधी से मुलाकात, परिसीमन बिल पर मांगा समर्थन

संसद में जारी गतिरोध को शांत करने और गतिरोध खत्म करने के लिए किरेन रिजिजू ने की राहुल गांधी से मुलाकात, परिसीमन बिल पर मांगा समर्थन

 

नई दिल्ली  संसद के मानसून सत्र में पिछले एक सप्ताह से ज्यादा समय से जारी हंगामे को शांत करने और गतिरोध खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है। इसी कड़ी में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से उनके कक्ष में मुलाकात की। करीब 50 मिनट तक चली इस अहम बैठक में रिजिजू ने सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में विपक्ष का सहयोग मांगा। हालांकि, राहुल गांधी ने अपनी मांग दोहराते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब तक गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बयान नहीं देते, तब तक कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी।

परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर मांगा समर्थन
कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, रिजिजू ने राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान आगामी परिसीमन बिल और महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का पूरा समर्थन मांगा। लेकिन राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ‘चंदा चोरी’ और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जब तक गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आकर जवाब नहीं देते, तब तक विपक्ष शांत नहीं बैठेगा। इस बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं। राहुल से मुलाकात के बाद रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की और फिर गृह मंत्री अमित शाह को पूरी स्थिति से अवगत कराया।

वेणुगोपाल का तंज, सरकार के पास क्या हैं विकल्प?
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस मुलाकात पर तंज कसते हुए कहा कि रिजिजू दरअसल प्रधानमंत्री का एजेंडा लेकर आए थे। उन्होंने दोहराया कि विपक्ष हर हाल में चंदा चोरी के मुद्दे पर चर्चा चाहता है। मानसून सत्र खत्म होने में अब केवल छह दिन बचे हैं और राहुल-रिजिजू की इस मुलाकात के बावजूद संसद का गतिरोध टूटता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में सरकार के पास अब दो ही विकल्प बचते हैं: या तो वह विपक्ष को विश्वास में लेकर सत्र के आखिरी हफ्ते में परिसीमन बिल पेश करे या फिर 15 अगस्त के ब्रेक के बाद मानसून सत्र को आगे बढ़ाए।

परिसीमन बिल पर बदल गए हैं सियासी समीकरण
आपको बता दें कि सरकार ने विस्तारित बजट सत्र के दौरान भी इस संविधान संशोधन विधेयक को पेश किया था, लेकिन विपक्ष के भारी विरोध के कारण यह पास नहीं हो सका था। इस विधेयक में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में 50% की बढ़ोतरी और अगले लोकसभा चुनाव से 33% महिला आरक्षण लागू करने का प्रावधान है। अप्रैल में विपक्ष ने यह कहकर इसका विरोध किया था कि इससे छोटे और दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घट जाएगा।

हालांकि, बीते पांच महीनों में राजनीतिक समीकरण काफी बदल चुके हैं। डीएमके विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन से किनारा कर चुकी है। वहीं, टीएमसी के 20 और उद्धव ठाकरे गुट के 6 लोकसभा सांसद एनडीए में शामिल हो गए हैं, जिससे सरकार दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच गई है। सूत्रों की मानें तो अगर सरकार परिसीमन बिल में सीटों में 50% बढ़ोतरी का लिखित आश्वासन देती है, तो डीएमके इस बिल का समर्थन कर सकती है। अब सबकी नजरें मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते पर टिकी हैं, जहां परिसीमन बिल के साथ-साथ एनजीओ पर सख्ती करने वाले एफसीआरए (FCRA) बिल को लेकर भी बड़ा दांव खेला जा सकता है।