जानें किस वजह से धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी पर ही PM मोदी ने दिखाया विश्वास, क्यों मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान?
नई दिल्ली : नीट पेपर लीक और लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों के दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। करीब पांच साल तक शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने वाले धर्मेंद्र प्रधान की विदाई के बाद सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि आखिर पीएम मोदी ने पहले से ही दो बड़े मंत्रालयों का जिम्मा संभाल रहे प्रह्लाद जोशी पर ही इतना बड़ा भरोसा क्यों जताया।
संकट मोचक के रूप में प्रह्लाद जोशी पर पीएम का भरोसा
कर्नाटक से आने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह पहले से ही भारत सरकार में ‘उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय’ के साथ-साथ ‘नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय’ जैसे दो भारी-भरकम विभागों का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में संकट के इस संवेदनशील दौर में उन्हें शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपना यह स्पष्ट करता है कि सरकार किसी नए चेहरे पर प्रयोग करने के बजाय एक अनुभवी और सुलझे हुए रणनीतिकार के हाथों में मंत्रालय की बागडोर देना चाहती थी।
संसदीय अनुभव और सर्वसम्मति बनाने में माहिर
प्रह्लाद जोशी को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से संकट प्रबंधन का लंबा अनुभव है। वह साल 2019 से 2024 तक देश के संसदीय कार्यमंत्री रह चुके हैं। उस दौरान उन्होंने संसद के भीतर विपक्ष सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने और सदन को सुचारू रूप से चलाने में महारत हासिल की थी। वर्तमान में संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और नीट पेपर लीक को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। ऐसे समय में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह मोचा संभालने के लिए जोशी सरकार के सबसे सटीक सिपहसालार साबित हो सकते हैं।
छात्रों का डगमगाया विश्वास जीतना होगी सबसे बड़ी चुनौती
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इस महत्वपूर्ण मंत्रालय को संभालना प्रह्लाद जोशी के लिए कांटों के ताज से कम नहीं होगा। पूरे देश की निगाहें अब शिक्षा मंत्रालय के अगले कदमों पर टिकी हैं। नए शिक्षा मंत्री के सामने देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के डगमगाए भरोसे को फिर से बहाल करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार करना, पेपर लीक के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और छात्रों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें सरकार की सख्ती और पारदर्शिता का भरोसा दिलाना उनकी प्राथमिक सूची में होगा।
सियासी फैसले के बजाय मजबूत प्रशासनिक रणनीति का संकेत
मौजूदा स्थिति में शिक्षा मंत्रालय के सामने स्थिरता और निरंतरता बनाए रखना सबसे जरूरी है। किसी नए राजनीतिक चेहर की ताजपोशी करने के बजाय एक वरिष्ठ और भरोसेमंद नेता को अतिरिक्त प्रभार सौंपकर पीएम मोदी ने एक स्पष्ट प्रशासनिक संदेश दिया है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई राजनीतिक समाधान खोजने के बजाय मजबूत प्रशासनिक नियंत्रण और क्राइसिस मैनेजमेंट को प्राथमिकता दे रही है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर होगी कि प्रह्लाद जोशी अपने इस नए और चुनौतीपूर्ण सफर में कैसे शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाते हैं।









