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डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा आदेश; 24 दिन से चल रहे विनाशकारी युद्ध के बाद अचानक क्यों लिया ये फैसला?…

 डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा आदेश; 24 दिन से चल रहे विनाशकारी युद्ध के बाद अचानक क्यों लिया ये फैसला?…
 

वॉशिंगटन : अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के चल रहे भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। पूरी दुनिया को हैरान करते हुए ट्रंप ने ईरान पर हो रहे सैन्य हमलों को फिलहाल रोकने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ने अपने युद्ध विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगले 5 दिनों तक ईरान पर कोई भी हमला न किया जाए। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस महाविनाशकारी युद्ध का आज 24वां दिन है और इस बीच ट्रंप का यह फैसला एक बड़े कूटनीतिक बदलाव का संकेत दे रहा है। ट्रंप का दावा है कि उनकी ईरान के साथ इस मामले पर सीधी बातचीत हुई है और आगे की रणनीति इसी बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी।

ट्रंप का दावा- ‘ईरान के साथ हुई बेहद अच्छी बातचीत’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए दुनिया को यह जानकारी दी है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्हें यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व की शत्रुता को पूरी तरह खत्म करने को लेकर बहुत ही अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है। इन रचनात्मक और गहन वार्ताओं के सकारात्मक संकेतों को देखते हुए ही उन्होंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि ईरानी पावर प्लांट्स और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किसी भी तरह के सैन्य हमले को 5 दिनों के लिए पूरी तरह स्थगित कर दिया जाए। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी और हमलों पर लगी यह रोक चर्चाओं की सफलता पर ही टिकी होगी।

खामेनेई की मौत और दुनिया भर में गहराया ऊर्जा संकट

आपको बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान में तख्तापलट के स्पष्ट इरादे से 28 फरवरी को तेहरान पर एक बेहद बड़ा और अचूक हमला किया था। इस भीषण हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता और बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए थे। अपने सर्वोच्च नेता की मौत के बाद बौखलाए ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर ताबड़तोड़ जवाबी हमले शुरू कर दिए। पिछले 24 दिनों से चल रहे इस युद्ध में ईरान ने पूरे मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इन हमलों का सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ा है, जिससे एक गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है और दुनिया भर में तेल और गैस के दाम आसमान छूने लगे हैं।