पंजाब; मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बिक्रम मजीठिया से पूछा सवाल, 5 दिसंबर तक अरबी घोड़ों के बारे में बताओ, नहीं तो…

 

चंडीगढ़ -CM Bhagwant Maan …एक तरफ शिअद नेता बिक्रम मजीठिया बार-बार मान सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं वहीं आज मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मजीठिया से सवाल पूछते हुए कहा कि 5 दिसंबर तक मजीठिया अरबी घोड़ों के बारे में बताएं। मान ने कहा कि अगर जवाब नहीं दिया तो मैं खुद मीडिया के सामने बताऊंगा। सीएम ने कहा कि बिक्रम मजीठिया के पास कोई उपलब्धि नहीं है, सिर्फ वे सुखबीर बादल के साले हैं।

चंडीगढ़ के म्यूनिसिपल भवन में कैंडिडेट्स को नियुक्ति पत्र देने के मौके पर उन्होंने अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया को घेरा। भगवंत मान ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि बात 1957 की है। तब भारत में वोटिंग के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल अरब देशों के दौरे पर गया था। उस प्रतिनिधिमंडल को अरब नस्ल के घोड़े दिए।

प्रतिनिधिमंडल में बिक्रम मजीठिया के पूर्वज सुरजीत सिंह मजीठिया भी थे। वह घोड़े मेरठ पहुंचने थे, कुछ दिनों बाद  अरबी राजे ने दूतावास को फोन करके घोड़ों के बारे में पूछा। अधिकारियों को पता चला कि घोड़े यहां नहीं आए हैं। राजा की नाराजगी पर तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सुरजीत सिंह मजीठिया से इस्तीफा मांग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी अगर कोई महान व्यक्ति मेरठ जाता है तो लोग कहते हैं कि घोड़ा चोर आ गए। मजीठिया के परिवार ने यह इज्जत बनाई है।

 

पंजाब की महान और उपजाऊ धरती छोड़ कर विदेश जाने के रुझान पर चिंता प्रकटाते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह रुझान बदल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बहुत ख़ुशी की बात है कि पंजाब में अब रिवर्स माइग्रेशन (वतन वापसी) का रुझान शुरू होने लगा है और कई नौजवानों ने विदेश छोड़ कर पंजाब में सरकारी नौकरियाँ हासिल की हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि वास्तव में हमारे नौजवान पंजाब की पवित्र धरती से बहुत मोह करते हैं परन्तु पिछले समय में बुरी व्यवस्था से तंग आकर विदेश जाने के लिए मजूबर थे। उन्होंने कहा कि अब नौजवानों को अपनी मनपसंद की नौकरी करने के मौके प्रदान किये जा रहे हैं जिससे उनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।

पंजाब के खजाने को खाली कह कर लोगों के आंखों झोंकने वाले राजनैतिक नेताओं पर तीखा निशाना साधते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में ख़ज़ाना कभी खाली नहीं होता, बल्कि नेताओं की नीयत खोटी होती है। यह नेता लोगों का पैसा अपने चाचे- भतीजे, साले- जीजे को दोनों हाथों से लुटाते थे।

मुख्यमंत्री पद को लोक सेवा का पद बताते हुये भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह कुर्सी आरामप्रसती के लिए नहीं होती, बल्कि 24 घंटे जन सेवा को समर्पित होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पंजाब की ज़मीनी हकीकतों से अच्छी तरह अवगत हैं जिस कारण वह पंजाब के हित में तुरंत फ़ैसला लेते हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भी नसीहत दी कि ज़मीनी स्थिति को समझने से बिना चंडीगढ़ बैठ कर फ़ैसले न किये जाएँ क्योंकि हर इलाके के हालात अलग-अलग होते हैं।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *