दुर्घटना का शिकार हुआ भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग -21, वायुसेना के दो पायलट हुए शहीद…
Crash: मिग-21 को ऑपरेशनली हैंडल कर चुके एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) कहते हैं, ये लड़ाकू जहाज एक पुरानी तकनीक वाला है। इस सुपरसोनिक जहाज की मार से दुश्मन कांप उठता था। 1971 की लड़ाई में मिग-21 ने शानदार नतीजे दिए थे। ग्राउंड अटैक में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया गया…

भारतीय वायुसेना की ताकत रहे मिग-21 लड़ाकू जहाज को अब कई तरह के विचलित करने वाले शब्दों का सामना करना पड़ रहा है। जिस तेजी से मिग-21 क्रैश हो रहे हैं, उसे देखकर इस हवाई जहाज को ‘ताबूत’ और ‘विधवा बनाने वाला’ जैसे नामों से पुकारा जाने लगा है। ताजा घटना राजस्थान के बाड़मेर की है। गुरुवार की रात वहां एक मिग-21 क्रैश हो गया। भारतीय वायुसेना के दो पायलट शहीद हो गए। आखिर इस पुराने लड़ाकू जहाज को वायुसेना रिटायर क्यों नहीं कर रही है, जबकि दुनिया के अधिकांश देश इससे किनारा कर चुके हैं। भारत ने ये लड़ाकू जहाज तत्कालीन सोवियत संघ अब ‘रूस’ से साठ के दशक में खरीदे थे, वह खुद इस फाइटर प्लेन को 1985 में रिटायर कर चुका है, जबकि भारत में आज तक इन विमानों का इस्तेमाल हो रहा है। एयर कमोडोर बीएस सिवाच (रिटायर्ड) ने बताया, मिग-21 की सबसे बड़ी खासियत है कि ये गलती माफ नहीं करता। इसे किसी भी तरह से उड़ा लेंगे, ये बहुत बड़ी गलतफहमी है। अगर मिग-21 का सूझबूझ से इस्तेमाल करो तो ये कभी धोखा नहीं देगा।
आधे से ज्यादा ‘मिग 21’ हुए हादसों का शिकार
अभी तक 400 से अधिक मिग लड़ाकू जहाज, क्रैश हो चुके हैं। इन हादसों में वायुसेना के 200 से अधिक पायलट शहीद हो गए हैं। इसके अलावा ढाई सौ से ज्यादा सामान्य लोगों ने भी इन हादसों में अपनी जान गंवाई है। यूपीए सरकार में साल 2012 के दौरान तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में जानकारी देते हुए बताया था कि रूस से खरीदे गए 827 मिग विमानों में से अभी तक आधे से अधिक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। पिछले साल ही पांच मिग लड़ाकू जहाज क्रैश हुए थे। 2016-17 के दौरान मिग-21 एम, मिग-27 यूपीजी, मिग-21 टी 69, दो जगुआर, दो एसयू-30 एमकेआई और एक मिग-23 यूबी हादसों का शिकार हुए। साल 2018 में एक जगुआर, मिग-21 टी 75 और मिग-27 यूपीजी क्रैश हुए थे। अगले साल यानी 2019 में जगुआर, मिग-27 यूपीजी, मिग-21 बाइसन, मिग-21 यूपीजी, एसयू-30 एमकेआई और मिग-21 टी 69 क्रैश हो गए थे। जब मिग को वायुसेना का हिस्सा बनाया गया तो शुरुआत में काफी संख्या में ये जहाज क्रैश होते रहे। अगर 70 के दशक की बात करें तो 365 दिन में लगभग 50 फाइटर प्लेन हादसों का शिकार हो गए थे। अगले दशक में यह संख्या करीब तीन दर्जन पर सिमट गई। उससे अगले दशक यानी 1990 में यह आंकड़ा 30 के आसपास रहा। बाद में कई तरह के सुधार किए गए तो हादसों का ग्राफ और गिरता चला गया।








Leave a Reply