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  • डोनाल्ड ट्रंप की जीत के पीछे रहे ये है 5 बड़े कारण..

    डोनाल्ड ट्रंप की जीत के पीछे रहे ये है 5 बड़े कारण..

     

    नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में अपनी जीत का ऐलान किया है। उन्होंने जीत को अमेरिका का ‘स्वर्ण युग’ बताया। रिपब्लिकन उम्मीदवार ने कहा, “यह अमेरिकी लोगों के लिए एक शानदार जीत है, जो हमें अमेरिका को फिर से महान बनाने का अवसर देगी।” चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हमला भी हुआ, खून से लथपथ ट्रंप ने फिर भी हार नहीं मानी। डोनाल्ड ट्रंप की जीत के कुछ अहम कारण जो अभी तक के सर्वेक्षणों और लोगों की राय से सामने आए हैं वह कुछ इस प्रकार हैं।

    सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई
    अमेरिका में ट्रंप के शासन के बाद सत्ता में आए जो बाइडेन को महंगाई के मुद्दे पर खूब खरी खोटी सुननी पड़ी थी। खाद्य उत्पादों के दाम में वृद्धि से लोग परेशान हुए। आंकड़े बताते हैं सितंबर में फरवरी 2021 से महंगाई इस वर्ष कम रही लेकिन बाइडेन के कार्यकाल के दौरान आंकड़ा ऊपर ही बना रहा था। खास बात यह है कि खाद्य महंगाई को छोड़कर बाकी मामलों में अर्थव्यवस्था में कोई खास समस्या नहीं रही थी। अमेरिका में 1970 के बाद से वर्तमान में सबसे ज्यादा महंगाई है। यह वह मुद्दा है जो हर अमेरिकी पर असर डालता है। और इस बार रिपब्लिकन उम्मीदवार ने लगातार इस मुद्दे को जनता के बीच उछाला।

    अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी
    राष्ट्रपति चुनाव देश की अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी को लोगों ने एक अहम मुद्दा बताया। कई लोगों को साफ लगता है कि जो बाइडेन के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गौरतलब है कि 2020 में ट्रंप के जाने के बाद और जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद से देश को कोरोना महामारी का सामना करना पड़ा। वैसे इस महामारी ने दुनिया को पूरी तरह से प्रभावित किया था। और इस दौरान अमेरिका में भी उच्च स्वास्थ्य व्यवस्था के बावजूद 3।5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान भी लोगों का बाइडेन पर गुस्सा फूटा था। साथ ही इस दौरान जिस प्रकार अर्थव्यवस्था गिरी थी उसे उठने में समय लगा। इसके साथ बेरोजगारी दर भी बढ़ती गई। यह अलग बात है कि अमेरिका अर्थव्यवस्था में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था और आज भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था दुनिया की नंबर वन अर्थव्यवस्था है। ट्रंप ने अपने भाषणों में अर्थव्यवस्था का मुद्दा जमकर उठाया और बताया कि कैसे उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था दुनिया में किस प्रकार मजबूत स्थिति में थी।

    विदेश नीति
    चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन उम्मीदवार ने डेमोक्रैट्स की वर्तमान सरकार यानी जो बाइडेन की सरकार पर विदेश नीति में सही पॉलिसी न अपनाने का आरोप लगाया। कमला हैरिस इस सरकार में उपराष्ट्रपति थीं। ऐसे में जब भी ट्रंप ने रैली में सवाल उठाया तो कमला हैरिस इसमें फंसती नजर आईं। कमला हैरिस को चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में यह कहना पड़ा कि वे बाइडेन प्रशासन से अलग नीति पर काम करेंगे। वे अपनी सरकार की अलग नीति बनाएंगी। ट्रंप ने बाइडेन सरकार पर जबरन विदेशों खर्चों को उठाने का आरोप लगाया और कहा कि इससे देश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बना है। उन्होंने उदाहरण में यूक्रेन का मुद्दा भी उठाया है।

    अवैध इमीग्रेशन
    अमेरिका में अवैध इमीग्रेशन का मुद्दा इस चुनाव में लोगों के बीच भावनात्मक मुद्दा बन गया। इस मुद्दे को डोनाल्ड ट्रंप ने जोर शोर से उठाया। उन्होंने बाइडेन प्रशासन पर ढिलाई बरतने और लोगों की मदद के नाम पर देश का पैसा बाहरी देशों पर लुटाने का आरोप लगाया। विदेशों से लगातार आ रहे लोगों और इससे बदल रही डेमोग्राफी का मुद्दा कई राज्यों में लोगों के बीच चिंता का कारण बन गया था। लोगों को डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के दौरान इस मुद्दे पर कड़ा रवैया अपनाने का तरीका पसंद आया वहीं ट्रंप ने इस मुद्दे पर बाइडेन पर ढिलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाते रहे। चुनाव में लोगों ने इस मुद्दे पर ट्रंप का साथ दिया।

    बाइडेन की उम्र और नीतियां
    अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में राष्ट्रपति जो बाइडेन पहले खुद ही रेस में आए थे। पार्टी की ओर से उन्हीं के नाम के साथ चुनाव में जाना तय हुआ। लेकिन करीब आधे चुनावी प्रचार के दौरान पार्टी को यह समझ में आ गया कि जो बाइडेन की उम्र उनके कामों असर डाल रही है। वे पहली प्रेजिडेंशियल डिबेट में आक्रामक दिख रहे डोनाल्ड ट्रंप के सामने काफी फीके दिखाई दिए। इसके बाद उन्हें पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ा। पार्टी में लगातार विरोध और पार्टी के लिए फंड की कमी बने रहने के बाद उन्हें अंतत: पीछे हटना पड़ा।

  • India – Usa संबंधों पर क्या होगा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का असर? विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया जवाब

    India – Usa संबंधों पर क्या होगा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का असर? विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया जवाब

     

    कैनबरा : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को उम्मीद जताई अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो, भारत-अमेरिका संबंध लगातार बढ़ते रहेंगे। कैनबरा में संसद भवन में ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, जयशंकर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2017 में क्वाड गठबंधन को पुनर्जीवित करने का क्रेडिट दिया, जो भारत-पैसिफिक सहयोग में एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट था।

    जयशंकर ने यह पूछे जाने पर कि यूएस प्रेसिडेंशियल इलेक्शन के बाद भारत-अमेरिका संबंध किस प्रकार विकसित होंगे, उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले पांच राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में अमेरिका के साथ अपने संबंधों में स्थिर प्रगति देखी है, जिसमें ट्रंप का पिछला कार्यकाल भी शामिल है।” उन्होंने कहा, “इसलिए, जब हम अमेरिकी चुनाव को देखते हैं, तो हमें विश्वास है कि परिणाम चाहे जो भी हो, अमेरिका के साथ हमारे संबंध बढ़ते रहेंगे।”

    बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए 5 नवंबर को वोट डाले जाने हैं। चुनाव परिणाम बुधवार सुबह तक घोषित किया जा सकता है। हालांकि देरी संभव है, कभी-कभी परिणामों को अंतिम रूप देने में कई दिन, सप्ताह या एक महीने भी लग सकते हैं।

    विदेश मंत्री जयशंकर वर्तमान में दो देशों की यात्रा पर हैं, 7 नवंबर तक ऑस्ट्रेलिया में रहेंगे और 8 नवंबर को सिंगापुर का दौरा करेंगे। वह रविवार को ब्रिस्बेन पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया और एक नए वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया।

    अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने आस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ 15वें विदेश मंत्रियों की फ्रेमवर्क डायलॉग (एफएमएफडी) की सह-अध्यक्षता की। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने पोस्ट किया, “आज कैनबरा में विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ 15वीं भारत-ऑस्ट्रेलिया विदेश मंत्रियों की फ्रेमवर्क डायलॉग संपन्न हुआ। हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार बढ़ रही है। यह मजबूत राजनीतिक संबंधों, मजबूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग, विस्तारित व्यापार, अधिक गतिशीलता और गहन शैक्षिक संबंधों में परिलक्षित होती है। हमारे संबंधित पड़ोस, इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया, यूक्रेन और वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की।”

  • पीएम मोदी का वादा पूरा; ब्रिसबेन में नए वाणिज्य दूतावास का विदेश मंत्री ने किया उद्घाटन

     पीएम मोदी का वादा पूरा; ब्रिसबेन में नए वाणिज्य दूतावास का विदेश मंत्री ने किया उद्घाटन

     

    ब्रिस्बेन : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में भारत के नए महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया। जयशंकर दो देशों की यात्रा पर हैं। वह सात नवंबर तक ऑस्ट्रेलिया में रहेंगे और आठ नवंबर को सिंगापुर जाएंगे।

    जयशंकर ने लिखा, “आज ब्रिस्बेन में भारत के नए महावाणिज्य दूतावास का औपचारिक रूप से उद्घाटन करते हुए खुशी हो रही है। यह क्वींसलैंड स्टेट के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने, व्यापार, शैक्षिक संबंधों को बढ़ावा देने और प्रवासी समुदाय की सेवा करने में योगदान देगा।”

    उद्घाटन समारोह में क्वींसलैंड के गवर्नर डॉ. जीनेट यंग और मंत्री रोस बेट्स और फियोना सिम्पसन सहित प्रमुख अधिकारी मौजूद थे। एक अलग बैठक में, जयशंकर ने गवर्नर यंग के साथ आर्थिक, व्यापार और निवेश सहयोग पर चर्चा की।

    विदेश मंत्री ने पोस्ट किया, “आज ब्रिस्बेन में क्वींसलैंड की गवर्नर महामहिम डॉ. जीनेट यंग से मिलकर प्रसन्नता हुई। क्वींसलैंड राज्य के साथ आर्थिक, व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने के अवसरों और तरीकों पर चर्चा हुई।”

    इससे पहले जयशंकर ने ब्रिसबेन के रोमा स्ट्रीट पार्कलैंड्स में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी।

    विदेश मंत्री ने रविवार को भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को मजबूत बनाने के लिए चार प्रमुख कारकों का जिक्र किया।

    विदेश मंत्री ने कहा, “इसके (भारत-ऑस्ट्रेलिया के मजबूत रिश्ते) चार कारण हैं – प्रधानमंत्री मोदी, ऑस्ट्रेलिया, विश्व और आप सभी।”

    इस दौरान उन्होंने कहा, “आपकी मौजूदगी, कोशिश और योगदान से यह वाणिज्य दूतावास संभव हो पाया है। मैं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सार्वजनिक रूप से किए गए उस वादे को पूरा करने आया हूं कि वह ब्रिस्बेन में वाणिज्य दूतावास खोलेंगे।”

    क्वींसलैंड में रहने वाले 125,000 भारतीए, जिनमें 15,000-16,000 छात्र शामिल हैं, का जिक्र करते हुए जयशंकर ने भारत के लिए राज्य के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “भारत को ऑस्ट्रेलिया का 75 प्रतिशत निर्यात वास्तव में इसी राज्य से आता है।”

    ऑस्ट्रेलिया की अपनी यात्रा के बाद, विदेश मंत्री जयशंकर 8 नवंबर को सिंगापुर जाएंगे, जहां वे आसियान-भारत थिंक टैंक नेटवर्क के 8वें गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे।

    विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि वे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ साझेदारी की समीक्षा करने और द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ाने के अवसरों की तलाश में सिंगापुर के नेतृत्व से भी मिलेंगे।

  • अमित शाह का नाम लेकर कनाडा के मंत्री के बयान पर भारत ने कनाडा के प्रतिनिधि को तलब कर जताई आपत्ति

    अमित शाह का नाम लेकर कनाडा के मंत्री के बयान पर भारत ने कनाडा के प्रतिनिधि को तलब कर जताई आपत्ति

     

    नई दिल्ली- भारत ने कनाडा के एक मंत्री द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के बारे में की गई ‘बेतुकी और निराधार’ टिप्पणियों पर कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कनाडा में भारतीय राजनयिकों की ‘ऑडियो और वीडियो निगरानी’ की भी निंदा की।

    एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,”हमने शुक्रवार को कनाडाई उच्चायोग के प्रतिनिधि को तलब किया…उन्हें बताया गया कि भारत सरकार, विदेश उप मंत्री डेविड मॉरिसन द्वारा समिति के समक्ष भारत के केंद्रीय गृह मंत्री को लेकर किए गए बेतुके और निराधार संदर्भों पर सबसे मजबूत शब्दों में विरोध करती है। इस तरह की गैरजिम्मेदाराना हरकतों के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर परिणाम होंगे।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मॉरिसन ने संसद सत्र के दौरान अमित शाह को सिख चरमपंथियों को निशाना बनाने वाली कार्रवाइयों से जोड़ा।

    विदेश उप मंत्री ने कनाडा की नागरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी को बताया कि उन्होंने ‘वाशिंगटन पोस्ट’ से शाह के नाम की पुष्टि की। उनसे पूछा गया था कि सरकार की ओर से ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ को कनाडा में होने वाले अपराध में भारत के गृह मंत्री के शामिल होने के बारे किसने बताया था?’ इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों के शामिल होने का आरोप लगाया था।

    इसके अलावा जायसवाल ने भारतीय दूतावास के अधिकारियों की ऑडियो-वीडियो निगरानी पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमारे कुछ वाणिज्य दूतावास अधिकारियों को हाल ही में कनाडा सरकार ने सूचित किया कि वे ऑडियो और वीडियो निगरानी में हैं। उनके संचार को भी बाधित किया गया। हमने कनाडा सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से विरोध जताया है क्योंकि हम इन कार्यों को, प्रासंगिक राजनयिक और वाणिज्य दूतावास कन्वेंशन का घोर उल्लंघन मानते हैं। हमारे राजनयिक और वाणिज्य दूतावास कर्मी पहले से ही उग्रवाद और हिंसा के माहौल में काम कर रहे हैं। कनाडा सरकार की यह कार्रवाई स्थिति को और खराब करती है और स्थापित राजनयिक मानदंडों और प्रथाओं के खिलाफ है।”

    कनाडा के पार्लियामेंट हिल में दिवाली समारोह रद्द होने की खबरों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने इस संबंध में कुछ रिपोर्ट देखी हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कनाडा में मौजूदा माहौल असहिष्णुता और उग्रवाद के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।” कनाडा सरकार द्वारा वीजा की संख्या में कटौती पर रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम कनाडा में काम कर रहे अपने छात्रों और पेशेवरों की भलाई पर नजर रख रहे हैं। उनकी सुरक्षा और संरक्षा के लिए हमारी चिंता बनी हुई है।”

  • हिजबुल्लाह के नए नेता की नियुक्ति पर इजरायल ने दी खुली धमकी, ‘अस्थायी नियुक्ति, लंबे समय तक नहीं’

    हिजबुल्लाह के नए नेता की नियुक्ति पर इजरायल ने दी खुली धमकी, ‘अस्थायी नियुक्ति, लंबे समय तक नहीं’

     

     

     नईम कासिम (Naeem Qasim) के हिजबुल्लाह (Hezbollah) के नए नेता बनते ही इजरायल (Israel) का रिएक्शन भी सामने आया है। इजरायल (Israel) के रक्षा मंत्री योव गैलेंट (Yoav Galant) ने नईम कासिम (Naeem Qasim) को चेतावनी (Warning) दी और कहा कि उसकी नियुक्ति ‘लंबे समय तक नहीं है।’ कासिम (Qasim) की एक तस्वीर एक्स पर शेयर करते हुए गैलेंट (Yoav Galant) ने लिखा, ‘अस्थायी नियुक्ति। लंबे समय तक नहीं।’ बता दें कि हिजबुल्लाह (Hezbollah) ने नईम कासिम (Naeem Qasim)को संगठन का नया नेता चुना था। कासिम की नियुक्ति हसन नसरल्लाह के उत्तराधिकारी के तौर पर की गई है।

    गौर हो कि इजरायल ने हिजबुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व को लगभग खत्म कर दिया है। मारे गए नेताओं में हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह, संस्थापक सदस्य फौद शुकर, शीर्ष कमांडर अली कराकी, केंद्रीय परिषद के उप प्रमुख नबील कौक, ड्रोन यूनिट प्रमुख मोहम्मद सरूर, मिसाइल यूनिट चीफ इब्राहिम कुबैसी, ऑपरेशन कमांडर इब्राहिम अकील और वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद नासिर शामिल हैं।

  • पटियाला की बेटी ने कनाडा में विधायक बनकर रचा इतिहास,जीतने वालों में इकलौती भारतीय होने के नाते मंत्री बनने की बड़ी दावेदार

    पटियाला की बेटी ने कनाडा में विधायक बनकर रचा इतिहास,जीतने वालों में इकलौती भारतीय होने के नाते मंत्री बनने की बड़ी दावेदार

    पटियाला की बेटी ने कनाडा में विधायक बनकर रचा इतिहास,जीतने वालों में इकलौती भारतीय होने के नाते मंत्री बनने की बड़ी दावेदार

     तानिया सोढ़ी को कनाडा में विधायक बनने MBD NEWS की तरफ पर बहुत बहुत शुभकामनाएं ..

    MBD NEWS : पटियाला में रहने वाले हरिंदरपाल शर्मा कौरजीवाला पूर्व अध्यक्ष ब्राह्मण कल्याण बोर्ड पंजाब (भाई डॉ दर्शन पॉल अध्यक्ष भारती किसान यूनियन क्रांतिकारी) बहू तानिया सोढ़ी धर्म पत्नी एडवोकेट नमन शर्मा कनाडा के मोंक्टन नॉर्थ वेस्ट (स्टेट ब्रंसविक) से लिबरल पार्टी की विधायक चुनी गई है, वहां 49 विधायक है विधानसभा में जीतने वाला एकमात्र भारतीय है। उन्होंने वित्त मंत्री एर्नी स्टीव्स (रूज़र्वेटिव पार्टी) को हरा दिया है, तानिया सोढ़ी को 47% वोट और विपक्ष को केवल 43% वोट मिले। जीतने वालों में इकलौता भारतीय होने के नाते मंत्री बनने के बड़े दावेदार भी हैं।

  • आईडीएफ (IDF) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से मारे गए हमास चीफ (Hamas Chief) याह्या सिनवार (Yahya Sinwar) की फुटेज को किया जारी , सुरंग में परिवार संग दिखा हमास आतंकी

    आईडीएफ (IDF) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से मारे गए हमास चीफ (Hamas Chief) याह्या सिनवार (Yahya Sinwar) की फुटेज को किया जारी , सुरंग में परिवार संग दिखा हमास आतंकी
     

    नई दिल्ली : आईडीएफ (IDF) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से मारे गए हमास चीफ (Hamas Chief) याह्या सिनवार (Yahya Sinwar) का फुटेज जारी किया है। इसमें वो परिवार समेत सुरंग (Tunnel) से निकलता देखा जा सकता है। फुटेज 7 अक्टूबर 2023 का बताया जा रहा है जब इजरायल पर सरप्राइज अटैक (Surprise Attack) किया गया था। इस क्लिप में सिनवार 7 अक्टूबर की शाम एक सुरंग से गुजरता हुआ देखा जा सकता है। कथित तौर पर वो इस दौरान यहीं छिपा रहा। 6 अक्टूबर की फुटेज में उसे परिवार और जरूरी सामान के साथ भागते हुए दिखाया गया है।

    आईडीएफ (IDF) ने शनिवार शाम को जारी फुटेज में खान यूनिस में अपने घर के नीचे एक सुरंग परिसर से भागते हुए दिखाया गया है, जो 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हुए हमले की पहली रात का था। आईडीएफ के मुताबिक सिनवार का ये कायराना एक्ट था। यह फुटेज दक्षिणी गाजा शहर राफा में सिनवार की मौत के बाद जारी किया गया। फुटेज में सिनवार, उसकी पत्नी और बच्चों को पानी, तकिए, गद्दे और एक टेलीविजन सेट ले जाते हुए दिखाया गया है।

    आईडीएफ (IDF) प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हगारी ने कहा कि सुरंग खान यूनिस में परिवार के घर के नीचे स्थित थी। यह फुटेज कई महीने पहले एक ऑपरेशन के दौरान गाजा से बरामद की गई थी। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) के प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हगारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा “क्रूर नरसंहार से पहले भी, सिनवार अपने और अपने परिवार के अस्तित्व को बचाने में व्यस्त था।”

    हगारी ने कहा “नरसंहार से कुछ घंटे पहले, सिनवार और उसका परिवार अकेले सुरंग में भाग गया…वे लंबे समय तक रहने के लिए भोजन, पानी, तकिए, एक प्लाज्मा टेलीविजन, गद्दे और अन्य जरूरी सामान लेकर आता जाता दिखा…नरसंहार से कुछ घंटे पहले, सिनवार को केवल अपने और अपने परिवार की परवाह थी, जबकि उसने इजरायली बच्चों, महिलाओं और पुरुषों पर जानलेवा हमले के लिए आतंकवादियों को भेजा था।”

    आईडीएफ (IDF) ने भूमिगत परिसर की तस्वीरें दिखाईं, जिसमें शौचालय, शॉवर, एक रसोई, बिस्तर, वर्दी, तिजोरियां, बहुत सारी नकदी, दस्तावेज और सुरंग में अन्य खुफिया जानकारी थी। प्रवक्ता ने कहा कि फरवरी में, आईडीएफ खान यूनिस में सिनवार द्वारा बनाए गए भूमिगत किले तक पहुंच गया था, लेकिन वह कुछ समय पहले ही भाग गया था। इस बीच, हमास ने सिनवार की मौत को शहादत का नाम दिया। महिमामंडित करते हुए कहा था कि लड़ते हुए वो वीरगति को प्राप्त हुआ। उन्होंने हगारी की टिप्पणी को “सरासर झूठ” करार दिया था। इस सप्ताह की शुरुआत में ड्रोन फुटेज में सिनवार को अपने अंतिम क्षणों में गंभीर रूप से घायल दिखाया गया था। सिनवार को ड्रोन पर कोई वस्तु फेंकते भी देखा गया था। पोस्टमार्टम में पाया गया कि सिनवार की हत्या सिर में गोली लगने से हुई थी।

  • इजरायली PM बेंजामिन नेतन्याहू के निवास पर ड्रोन से हमला, हिजबुल्ला पर हमले का शक

    इजरायली PM बेंजामिन नेतन्याहू के निवास पर ड्रोन से हमला, हिजबुल्ला पर हमले का शक

     

    नई दिल्ली : लेबनान (Lebanon) से आए एक ड्रोन (Drone) ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (PM Benjamin Netanyahu) के घर को निशाना बनाया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की कि शनिवार (19 अक्टूबर) सुबह लेबनान से हुए ड्रोन अटैक का टारगेट कैसरिया में प्रधानमंत्री का निजी आवास था।

    टाइम्स ऑफ इजरायल (Israel) की रिपोर्ट के मुताबिक पीएमओ (PMO) ने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा हमले के समय घर पर नहीं थे और इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान से शनिवार सुबह दागे गए दो अन्य ड्रोन को हवाई सुरक्षा बलों ने मार गिराया।

    इजरायली पीएम पर यह हमला ऐसे समय में हुआ जब तीन दिन पहले ही इजरायली सेना ने हमास लीडर याह्या सिनवार को बुधवार (16 अक्टूबर) को मार गिराया। इजरायल के मुताबिक सिनवार पिछले साल के 7 अक्टूबर अटैक का मुख्य रणनीतिकार था।

    सिनवार की मौत के बाद बुधवार देर रात एक बयान में, ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने ‘इजरायली दुश्मन के साथ टकराव का एक नया और उग्र चरण” शुरू करने का ऐलान किया।

    इजरायल ने गुरुवार (17 अक्टूबर) को हमास लीडर की मौत की आधिकारिक रूप से घोषणा की। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) और शिन बेट सिक्योरिटी एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘7 अक्टूबर के हमले और नरसंहार का सूत्रधार सिनवार, बुधवार को दक्षिणी गाजा के राफा में गोलीबारी में मारा गया।’

    बता दें 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमलों में करीब 1200 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक लोगों को बंदी बना लिया गया था। इनमें से 101 बंधक अभी लापता हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वो गाजा में मौजूद हैं। इस हमले के बाद इजरायल ने हमास के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया और फिलिस्तीनी ग्रुप के कब्जे वाली गाजा पट्टी पर हमले शुरू कर दिए।

    अलजजीरा की 19 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्ट के मुताबिक 7 अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में इजरायली हमलों में कम से कम 42,500 लोग मारे गए हैं और 99,546 घायल हुए हैं।

  • PM मोदी ने आतंकवाद को बताया गंभीर खतरा, बोले ‘यह युद्ध का युग नहीं’

     PM मोदी ने आतंकवाद को बताया गंभीर खतरा, बोले ‘यह युद्ध का युग नहीं’

     

     

    लाओ पीडीआर : 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (East Asia Summit) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narindra Modi) ने आतंकवाद (Terrorist) को दुनिया के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद (Terrorist) वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसका सामना करने के लिए मानवता में विश्वास रखने वाली ताकतों को मिलकर काम करना होगा। साथ ही साइबर, समुद्री और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को भी मजबूत करना होगा।’

    दक्षिण चीन सागर को लेकर क्या बोले पीएम मोदी
    शिखर सम्मेलन (East Asia Summit) में पीएम मोदी (Narindra Modi) ने कहा, ‘भारत ने हमेशा ASEAN की एकता और केंद्रीयता का समर्थन किया है। ASEAN भारत के इंडो-पैसिफिक विजन और क्वाड सहयोग के केंद्र में भी है। भारत (India) की “इंडो-पैसिफिक महासागरों की पहल” और ‘इंडो-पैसिफिक पर आसियान आउटलुक” के बीच गहरी समानताएं हैं। एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक पूरे क्षेत्र की शांति और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। दक्षिण चीन सागर की शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के हित में है।’

    पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narindra Modi) ने कहा, “दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का सबसे ज्यादा नकारात्मक असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। हर कोई चाहता है कि यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया, जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल हो। मैं बुद्ध की धरती से आता हूं और मैंने बार-बार कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है। समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता। संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करना जरूरी है। मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देनी होगी। विश्वबधु का दायित्व निभाते हुए भारत इस दिशा में हरसंभव योगदान देता रहेगा।”

  • इजराइल में रह रहे भारतीयों के लिए भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की, एयरलाइंस भी अलर्ट

     इजराइल में रह रहे भारतीयों के लिए भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की, एयरलाइंस भी अलर्ट

     

     

    नई दिल्ली- ईरानी सेना ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। हमले में मुख्‍य रूप से “सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों” को निशाना बनाया गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक बयान का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि ईरान से इजरायल की ओर बड़ी संख्‍या में मिसाइलें दागी गई हैं। वहीं, हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों को हवाई यात्रा को लेकर एडवाइजरी जारी की है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस क्षेत्र में युद्ध की स्थिति पर सरकार की तरफ से पूरी निगरानी रखी जा रही है।

    केंद्र सरकार ने अपनी एडवाइजरी में कहा कि भारतीय नागरिकों को आगाह किया जाता है कि वे बिना बहुत जरूरी ईरान की यात्रा ना करें। सरकार ने ये भी कहा है कि जो भारतीय फिलहाल ईरान में रह रहे हैं उनको सलाह दी जाती है कि वे तेहरान में भारतीय दूतावास से संपर्क बनाए रखें। उधर जानकारी के मुताबिक ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की स्थिति को देखते हुए सरकार कुछ और भी बड़े कदम उठा सकती है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इंडियन एयरलाइंस के लिए भी एडवाइजरी जारी कर सकती है। संभावना है कि दोनों देशों से सटे हवाई क्षेत्र में विमानों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। वहीं युद्ध के हालात को देखते हुए एयर इंडिया अपने हवाई क्षेत्र का रूट बदलने पर भी विचार कर रही है। एयर इंडिया के सूत्रों ने बताया है दिल्ली से लंदन जाने वाली फ्लाइट ईरान के हवाई क्षेत्र के पास से गुजरती है, जिसका रूट बदला जा सकता है।