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  • सेना ने सिक्किम में 1500 फीट की ऊंचाई पर लगाया रडार, 3 सेकेंड में देगा हिमस्खलन की सूचना

    सेना ने सिक्किम में 1500 फीट की ऊंचाई पर लगाया रडार, 3 सेकेंड में देगा हिमस्खलन की सूचना

     

    Army Installs Monitoring Radar: हिमस्खलन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए एक अभिशाप है और उनमें से कई ऐसी घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं.

    Indian Army: भारतीय सेना द्वारा उत्तरी सिक्किम में 15,000 फीट की ऊंचाई पर अपनी एक अग्रिम चौकी पर एक रडार स्थापित किया है. यह अपनी तरह का पहला राडार है जो बर्फबारी और कोहरे के बीच से भी देख सकता है और ट्रिगर होने के तीन सेकंड के भीतर हिमस्खलन का पता लगा सकता है.

    हिमस्खलन निगरानी रडार, जिसका मंगलवार को उद्घाटन किया गया था, उसे भारतीय सेना और रक्षा भू-सूचना विज्ञान और अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) द्वारा लगाया गया था. यह रडार हिमस्खलन का पता लगाने के अलावा, भूस्खलन को भी देख सकता है.

    अक्सर हिमस्खलन के चपेट में आ जाते हैं सैनिक
    रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की एक शाखा , डीजीआरई हिमस्खलन के पूर्वानुमान और न्यूनीकरण को देखती है, जो हिमालयी क्षेत्र में हमारे सैनिकों के लिए अक्सर घातक सिद्ध होते हैं.

    यह राडार रात में भी देख सकता है. यह 2 वर्ग/किमी के क्षेत्र को कवर करता है. भारतीय सेना ने कहा कि यह हिमस्खलन लिए लक्षित ढलान को स्थायी रूप से स्कैन कर सकता है और इसके पथ और आकार को ट्रैक कर सकता है.

    भारतीय सैनिकों की रक्षा करेगा रडार
    सेना ने कहा,  “ऐसे क्षेत्र में जहां हिमस्खलन के ट्रिगर होने की आवृत्ति अधिक होती है, पहले हिमस्खलन रडार की स्थापना कठोर इलाके और सब-जीरो तापमान में तैनात भारतीय सैनिकों के जीवन की रक्षा करेगी. इसके साथ ही बर्फीले, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चलने वाले वाहनों और उपकरणों को होने वाले  नुकसान सीमित करेगा.”

    हिमस्खलन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए एक अभिशाप है और उनमें से कई ऐसी घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं. सेना के एक सूत्र ने कहा, “हिमस्खलन की चपेट में आने से कुछ सेकंड पहले की चेतावनी कई लोगों की जान बचाने में मदद कर सकती है.”

  • बॉम्बे हाईकोर्ट से शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट को बड़ी राहत, शिवाजी पार्क में दशहरा रैली की मिली इजाजत

    बॉम्बे हाईकोर्ट से शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट को बड़ी राहत, शिवाजी पार्क में दशहरा रैली की मिली इजाजत

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवाजी पार्क में दशहरा रैली की अनुमति मांगने वाली शिवसेना गुटों की याचिकाओं पर सुनवाई की। लेकिन उद्धव ठाकरे गुट को रैली करने की इजाजत मिली। एकनाथ शिंदे ने भी इजाजत मांगी थी।

    मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के शिवाजी पार्क में दशहरा रैली की अनुमति के लिए शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दी गई याचिका को अनुमति दे दी। हाई कोर्ट ने पाया कि नगर परिषद ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर निर्णय लेने में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। शिवसेना को तैयारियों के लिए 2-6 अक्टूबर के लिए जमीन दी जाएगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवाजी पार्क में दशहरा रैली की अनुमति मांगने वाली शिवसेना गुटों की याचिकाओं पर सुनवाई की। शिवसेना के एकनाथ शिंदे ने भी इजाजत मांगी थी।

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना को मध्य मुंबई में स्थित शिवाजी पार्क में 5 अक्टूबर को वार्षिक दशहरा रैली के आयोजन की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति आर. डी. धनुका और न्यायमूर्ति कमल खाटा की खंडपीठ ने ठाकरे नीत शिवसेना गुट और उसके सचिव अनिल देसाई द्वारा बृहन्नमुंबई महानगरपालिका के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को अनुमति दे दी।

    शिवसेना के अनिल परब ने कहा कि आज कोर्ट ने फैसला किया कि शिवाजी पार्क में शिवसेना की दशहरा रैली होगी। यह 1966 से हो रहा है। हमने शिवसेना का इतिहास हाईकोर्ट के सामने पेश किया। हाईकोर्ट ने बीएमसी द्वारा उठाए गए कानून और व्यवस्था की स्थिति को खारिज कर दिया। शिवसेना को 2-6 अक्टूबर तक रैली करने की अनुमति मिली। अनिल परब ने आगे कहा कि सदा सर्वंकर ने हाईकोर्ट के समक्ष एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर इस बात पर आपत्ति मांगी कि कौन सा गुट असली शिवसेना है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह उनका (निर्णय लेने का) अधिकार नहीं है, बल्कि SC और ECI का है। यह पूछे जाने पर कि क्या शिंदे गुट SC में अपील करेगा। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में देखेंगे, वहां भी लड़ेंगे।

     

     

    बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा शिवसेना के ठाकरे धड़े को मुंबई के शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करने की अनुमति देने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।

     

     

    गौरतलब है कि बीएमसी ने शिवसेना को शिवाजी पार्क में वार्षिक दशहरा रैली करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि बीएमसी का आदेश स्पष्ट रूप से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। पीठ ने ठाकरे नीत शिवसेना को दो से छह अक्टूबर तक शिवाजी पार्क का उपयोग करने की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने को कहा है।

    बीएमसी ने 21 सितंबर को कहा था कि वह ठाकरे नीत पार्टी का आवेदन इसलिए खारिज कर रही है क्योंकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के विद्रोही धड़े के विधायक सदा सारवंकर ने भी ऐसी ही अर्जी दी है और अगर एक धड़े को अनुमति दी जाती है तो इससे स्थानीय पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो जायेगी

  • बलात्कारियों की अब खैर नहीं! अब रेप के मामले में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत, जानें किस राज्य सरकार ने किया बिल पास

    बलात्कारियों की अब खैर नहीं! अब रेप के मामले में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत, जानें किस राज्य सरकार ने किया बिल पास

     

    सीएम योगी आदित्यनाथ की पहल पर यूपी विधानसभा में पेश किए गए इस बिल में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों के आरोपियों की अग्रिम जमानत खत्म कर दी गई है।

    यूपी में योगी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। राज्य में अब रेप के आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी। सरकार ने इसके लिए बिल भी आज विधानसभा में पेश कर दिया है।

    योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने यूपी विधानसभा में दंड प्रक्रिया संहिता (उत्‍तर प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2022 को ध्वनि मत से पास करा लिया है। इस बिल में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों के आरोपियों की अग्रिम जमानत खत्म कर दी गई है। विधेयक को एक दिन पहले गुरुवार को पेश किया गया था, जब यूपी विधानसभा ने महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए कदमों पर चर्चा की थी।

    जानकारी के अनुसार विधेयक में संशोधन के बाद यह प्रावधान होगा कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध जैसे बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दुराचार के आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज आरोपियों को भी अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी।

    संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्‍ना ने शुक्रवार को सदन में दंड प्रक्रिया संहिता (उत्‍तर प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2022 पारित करने का प्रस्ताव रखा। विधेयक के पक्ष में सत्ताधारी सदस्यों के बहुमत की वजह से विधानसभा अध्‍यक्ष सतीश महाना ने इसे पारित करने की घोषणा की। कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने इस विधेयक को प्रवर समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन सत्‍ता पक्ष के सदस्यों के विरोध की वजह से उनका प्रस्ताव गिर गया।

    सरकार की ओर इस विधेयक को लेकर कहा गया कि बालकों, बेटियों और महिलाओं के यौन अपराधों में अग्रिम जमानत न मिलने से आरोपियों द्वारा सबूतों को नष्ट करने की संभावना कम होगी। साथ ही आरोपी की ओर से पीड़ित या उसके गवाहों को भयभीत या प्रताड़ित नहीं किया जा सकेगा।

     

  • जानें AAP के किस विधायक के पिता ने निगला जहर:गंभीर हालत में लुधियाना लाया गया; घटना के वक्त चंडीगढ़ में थे MLA 

    जानें AAP के किस विधायक के पिता ने निगला जहर:गंभीर हालत में लुधियाना लाया गया; घटना के वक्त चंडीगढ़ में थे MLA

     

    विधायक लाभ सिंह ऊगोके के पिता दर्शन सिंह। - Dainik Bhaskar
    विधायक लाभ सिंह ऊगोके के पिता दर्शन सिंह।

    पंजाब के भदौड़ से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को हराकर आम आदमी पार्टी से विजेता रहा लाभ सिंह ऊगोके के पिता दर्शन सिंह ने सल्फास निगल ली है जिस कारण उनकी बिगड़ती हालत को देख उन्हें तुरंत DMC अस्पताल लुधियाना लाया गया है।

    विधायक ऊगोके के पिता की हालत गंभीर बताई जा रही है। बता दें जैसे ही आम आदमी पार्टी के वर्करों और पदाधिकारियों को इस बात का पता चला तो अस्पताल में भी नेताओं का आना-जाना लग गया।

    लाभ सिंह उगोके चुनाव से पहले गांव में ही मोबाइल मरम्मत की दुकान चलाया करते थे। विधायक ऊगोके ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को 37,558 हजार से अधिक वोटों से हराया है। जिस समय दर्शन सिंह ने सल्फास निगली उस समय विधायक ऊगोके चंडीगढ़ में पार्टी विधायकों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे तो उन्हें फोन पर जानकारी दी गई।

    ऊगोके की माता बलदेव कौर ने ऊगोके की जीत पर कहा था कि मुझे बेहद खुशी है कि मेरे बेटे ने यह जीत हासिल की है, वह भी मौजूदा मुख्यमंत्री को हराकर लेकिन मैं अपने कर्तव्य का निर्वहन करती रहूंगी। मेरे लिए, यह जीवन का एक तरीका है। नौकरी की कमाई मेरा घर चलता है। बता दें विधायक ऊगोके की माता गांव के ही सरकारी स्कूल में सफाई कर्मचारी है।

    क्या वजह थी जहरीला पदार्थ खाने की

    दर्शन सिंह के भाई जगतार सिंह ने बताया कि वह काम पर गया हुआ था। इतने में घर से फोन आया कि दर्शन की लाभ सिंह ऊगोके के बड़े भाई के साथ किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। इसके बाद उन्होंने गुस्से में आकर कोई जहरीली वस्तु निगल ली लेकिन अभी हालत खतरे से बाहर है। वह एक अन्य मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक जगतार ने यह भी कहा है कि उसके भाई को अटेक जैसी दिक्कत भी आई है जिस कारण उसे अस्पताल लाया गया है। अब मामले में सच्चाई क्या है ये दर्शन सिंह के बयानों के बाद ही पता चल पाएगी।

  • PFI के ठिकानों पर NIA और ED की छापेमारी, केंद्रीय गृह मंत्री ने की उच्च स्तरीय बैठक

    PFI के ठिकानों पर NIA और ED की छापेमारी, केंद्रीय गृह मंत्री ने की उच्च स्तरीय बैठक

     

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज देशभर में PFI के ठिकानों पर हुई कार्रवाई के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक दिनकर गुप्ता शामिल हुए। बैठक में PFI से जुड़े परिसरों की तलाशी और आतंकी संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई पर चर्चा की गई। एक अधिकारी ने बताया कि अमित शाह ने देश भर में PFI के कार्यकर्ताओं और संदिग्धों के खिलाफ की गई कार्रवाई का जायजा लिया।

    11 राज्यों में छापेमारी

    बता दें कि देशभर में टेरर फंडिंग मामले में NIA के नेतृत्व में 11 राज्यों में PFI के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई। छापेमारी में PFI के 106 कार्यकर्ताओं को देश में आतंकी गतिविधियों का कथित रूप से समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। NIA, ED और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा किए गए कई छापे में केरल से 22, कर्नाटक से 20, महाराष्ट्र से 20, आंध्र प्रदेश से 5, असम से 9, दिल्ली से 3, मध्य प्रदेश से 4, पुडुचेरी से 3, राजस्थान से 2, तमिलनाडु से 10 और उत्तर प्रदेश से 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

    jagran josh

    आतंकी गतिविधि के खिलाफ कार्रवाई

    अधिकारियों ने कहा कि आतंकी फंडिंग, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने और प्रतिबंधित संगठनों में शामिल होने के लिए कई स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। PFI की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद ने NIA-ED द्वारा देशभर में की गई कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि नेताओं की गिरफ्तारी और उत्पीड़न एवं संगठन के सदस्यों और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई गलत है। उन्होंने कहा कि NIA के निराधार दावे के पीछे आतंक का माहौल बनाना

  • फर्श पर गद्दा बिछाकर सोते दिखे कांगेस के नेता, सिर के नीचे तकिया भी नहीं लगाया

    फर्श पर गद्दा बिछाकर सोते दिखे कांगेस के नेता, सिर के नीचे तकिया भी नहीं लगाया

     

    Digvijaya Singh Lifestyle: दिग्विजय सिंह ने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी 192 दिनों की लंबी ‘नर्मदा यात्रा (Narmada Yatra)’ के दौरान उसी सादगी का प्रदर्शन किया था.

    Digvijay Singh: फर्श पर गद्दा बिछाकर सोते दिखे दिग्विजय सिंह, सिर के नीचे तकिया भी नहीं लगाया

    कब ली गई थी दिग्विजय सिंह की ये तस्वीर

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ‘वर्तमान तस्वीर तब ली गई जब दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) पार्टी के कुछ अन्य कार्यकर्ताओं के साथ एक दिन के पैदल मार्च, ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद आराम करने गए थे. इस बीच, ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी अपने अध्यक्ष के चुनाव के लिए कमर कस रही है.

    नर्मदा यात्रा के दौरान भी फर्श पर सोते थे दिग्विजय सिंह

    दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी 192 दिनों की लंबी ‘नर्मदा यात्रा (Narmada Yatra)’ के दौरान उसी सादगी का प्रदर्शन किया था. वह फर्श पर सोते थे, उनके एक सहयोगी ने कहा, जो पूरी ‘नर्मदा परिक्रमा’ के दौरान उनके साथ थे.

  • जानिए किस सेंट्रल जेल में मचा बवाल, जेलर से साथ हुई मारपीट; कैदियों ने पिया साबुन का पानी

    जानिए किस सेंट्रल जेल में मचा बवाल, जेलर से साथ हुई मारपीट; कैदियों ने पिया साबुन का पानी

     

    Vadodara News: जेल में बंद विचाराधीन कैदियों ने जेलर से भी मारपीट की, जिसके बाद उनके खिलाफ दंगा करने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने समेत अन्य धाराओं में रावपुरा पुलिस थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

    गुजरात (Gujarat) में वडोदरा सेंट्रल जेल (Vadodara central jail) परिसर में सात विचाराधीन कैदियों ने झड़प के बाद साबुन मिला पानी पी लिया, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. पुलिस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बताया कि विभिन्न आपराधिक मामलों में आरोपी रहे इन सभी विचाराधीन कैदियों ने बुधवार शाम को हुई झड़प के दौरान जेलर से भी मारपीट की.

    गंभीर आरोप में बंद थे कैदी

    पुलिस उपायुक्त (द्वितीय जोन) अभय सोनी ने बताया कि गुजरात आतंकवाद एवं संगठित अपराध नियंत्रण कानून के तहत आरोपों का सामना कर रहे विचाराधीन कैदियों को बाहर से भोजन मंगाने की अनुमति नहीं होती जबकि अन्य कैदियों को यह सुविधा उपलब्ध होती है.

    उन्होंने कहा, ‘हमें मिली प्रारंभिक सूचना के अनुसार, जिन्हें यह सुविधा नहीं दी गयी है वे दूसरे विचाराधीन कैदियों का टिफिन ले लेते हैं और उन्हें अपने पास रख लेते हैं. जब जेल प्राधिकारियों को इसके बारे में पता चलता तो उन्होंने इन कैदियों को अलग बैरक में भेजने की कोशिश की.’

    विरोध में पिया साबुन के घोल का पानी

    अधिकारी ने कहा, ‘इसके बाद साधारण सी दिखने वाली झड़प ने देखते देखते विकराल रूप ले लिया जिसके बाद अपना विरोध जताते हुए इन सात कैदियों ने पानी में बड़ी मात्रा में साबुन घोला और उसे पी लिया.’

    इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

    उन्होंने बताया कि विचाराधीन कैदियों ने जेलर से भी मारपीट की, जिसके बाद उनके खिलाफ दंगा करने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने समेत अन्य धाराओं में रावपुरा पुलिस थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

    कैदियों की हालत स्थिर

    सोनी ने बताया कि जिन सात कैदियों ने साबुन का पानी पी लिया था उन्हें बुधवार रात को वडोदरा के एसएसजी हॉस्पिटल (SSG Hospital) में भर्ती कराया गया है. उनकी हालत स्थिर है और वे स्वस्थ हो रहे हैं.

  • जानिए कौन से कांग्रेस के यह दिग्गज नेता भी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के मूड में! गहलोत और शशि थरूर को देगा चुनौती

    जानिए कौन से कांग्रेस के यह दिग्गज नेता भी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के मूड में! गहलोत और शशि थरूर को देगा चुनौती

     

    Congress के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की. अधिसूचना के अनुसार, गुरुवार से नामांकन फॉर्म उपलब्ध होंगे, जबकि 24 सितंबर से 30 सितंबर के बीच नामांकन दाखिल किया जाएगा.

    पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी भी कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. उनके करीबी सूत्रों ने खुलासा किया कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में राज्य पार्टी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जो चुनाव में मतदाता हैं. प्रत्येक उम्मीदवार को अपना नाम प्रस्तावित करने के लिए 10 प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों की आवश्यकता होती है.

    मनीष तिवारी कांग्रेस नेतृत्व के मुखर आलोचकों में से एक हैं और उन्होंने पार्टी में सुधार की मांग की है. कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की. अधिसूचना के अनुसार, गुरुवार से नामांकन फॉर्म उपलब्ध होंगे, जबकि 24 सितंबर से 30 सितंबर के बीच नामांकन दाखिल किया जाएगा.

    नामांकन की जांच एक अक्टूबर को होगी और उसी दिन वैध उम्मीदवार की सूची प्रकाशित की जाएगी. नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 8 अक्टूबर है, जिसके बाद एक अंतिम सूची लाई जाएगी. मतदान जहां 17 अक्टूबर को होगा, वहीं मतगणना 19 अक्टूबर को होगी. सूत्रों के मुताबिक, अशोक गहलोत और शशि थरूर के बीच संभावित मुकाबला होगा.

    अशोक गहलोत ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से दो घंटे तक मुलाकात की थी, जिसके बाद वह राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में शामिल होने के लिए केरल के लिए रवाना हो गए. सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी ने कहा है कि चुनाव निष्पक्ष होगा और वह किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेंगी. जाहिर तौर पर बैठक में राजस्थान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. गहलोत अगले सप्ताह पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं. हालांकि, वह राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी को नहीं छोड़ना चाहते.

    राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग

    उधर राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग जारी है. कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गांधी ऐसे शख्स है जो कठिन परिश्रम या संघर्षों से दूर नहीं भागते हैं. यही कारण है कि आम कार्यकर्ता उन्हें अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करते देखना चाहता है.

    कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पार्टी नेता राहुल गांधी के प्रति अपनी पसंद का संकेत देते हुए पायलट एक टीवी चैनल पर उन सवालों को टाल गये कि यदि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ते हैं तो क्या वह उनका समर्थन करेंगे.

    उन्होंने इस सवाल का जवाब भी टाल दिया कि यदि उनके प्रतिद्वंद्वी गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो क्या वह राजस्थान के मुख्यमंत्री बनेंगे. उन्होंने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन चुनाव लड़ता है. चुनाव के अंत में मजबूत कांग्रेस उभरकर सामने आएगी. उसके लिए हम सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है साथ मिलकर काम करने से ही हम बीजेपी को सत्ता से हटा पायेंगे. पायलट ने कहा कि फिलहाल वह अटकलें नहीं लगा सकते कि कौन चुनाव लड़ेगा. यह बात 24 सितंबर तक या उसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगी.

  • जानिए पंजाब में किस जगह पंजाब पुलिस के DCP  और आम आदमी पार्टी के MLA के बीच हुई जबरदस्त तकरार

    जानिए पंजाब में किस जगह पंजाब पुलिस के DCP  और आम आदमी पार्टी के MLA के बीच हुई जबरदस्त तकरार

    जानिए पंजाब में किस जगह पंजाब पुलिस के DCP  और आम आदमी पार्टी के MLA के बीच हुई जबरदस्त तकरार

     

    दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर लगाये बदसलूकी व हाथापाई के आरोप, 3 ज़ख्मी, डीसीपी के खिलाफ FIR दर्ज

     

    मामला सुलझाने गए थे DCP और MLA इसी बीच दोनो में पहले तल्खी बड़ी,फिर मामला झगड़े में हुआ तब्दील

     

    MBD NEWS: जालंधर (शर्मा) बीती रात पुलिस अधिकारी DCP नरेश डोगरा और MLA रमन अरोरा का एक मामले को सुलझाने के लिए जाना आपसी तकरार का कारण बन गया जिसको लेकर जालंधर में एक बार फिर नया विवाद पैदा हो गया है। दरअसल शास्त्री मार्किट चौक में दो दुकानदारों के लिए आपसी विवाद को सुलझाने के मिशन चौक के नजदीक किसी दफ्तर में दोनों पक्षो के लोग, DCP और MLA रमन अरोड़ा पहुंचे थे।
    देखते ही देखते रमन अरोड़ा और नरेश डोगरा के बीच तकरार बढ़ती गई और जो ये तकरार आपसी टकराव में बदल गई, विधायक रमन अरोड़ा के समर्थकों और डीसीपी नरेश डोगरा के बीच तीखी बहस के बाद हाथापाई हो गई। इस बीच MLA के साथ भी हाथापाई हुई, इस बीच विधायक के तीन समर्थक राहुल, सन्नी और उमेश जख्मी हो गए, जिन को जख्मी हालत में देर रात 12 बजे सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दाखिल करवाया गया । वही घायलों का आरोप है कि डीसीपी डोगरा ने उन की ऐसी हालत की है और DCP ने विधायक से विवाद कर हाथापाई की है। वही इस मामले में बदसलूकी करने और धक्कामुक्की करने को लेकर जालंधर पुलिस ने डीसीपी नरेश डोगरा के खिलाफ धारा 307 सहित SC/ST एक्ट अधीन थाना-6 में FIR-159/22 दर्ज की गई है। आप को बता दे कि होशियारपुर में भी DCP हत्या के प्रयास के एक केस में आरोपी है।
    वही इस मामले में आप नेताओ ने बताया कि दोनों पक्षो की लड़ाई सुलझाने के लिए जैसे ही रमन अरोरा बीच बचाव उतरे तो गुस्साए DCP द्वारा यह कहा गया कि दुकानदार मेरा मामा है। और MLA रमन अरोड़ा को बोला गया कि तू कौन है। और बदतमीजी व हाथापाई की गई।
    एक MLA के साथ ऐसी भाषा से बोलना बेहद निंदनीय है। पंजाब के मुख्यमंत्री व डीजीपी को यह देखना होगा कि हज़ारों लोगों की वोटों को प्राप्त करने के बाद MLA बने रमन अरोड़ा के साथ बदसलूकी भरा व्यवहार कहा तक सही है। आम आदमी पार्टी की सरकार में जब MLA के साथ बदसलूकी हो सकती है तो आम जनता के साथ नरेश डोगरा कैसा व्यवहार करते होंगे । यह जांच का विषय है।

    लोगो का आरोप है कि दोनों पक्षो के मामले को सुलझाने की बजाए डीसीपी खुद पार्टी बनते हुए नजर आए। और एक MLA के खिलाफ जिस तरीक़े से DCP नरेश डोगरा ने अपनी वर्दी की धौंस दिखा कर उन्हें अपमानित किया है वो बेहद शर्मनाक है।

    माहौल इतना ज्यादा तनावपूर्ण था कि मौके पर डीसीपी लॉ एंड आर्डर अंकुर गुप्ता, डीसीपी इनवेस्टिगेशन जसकरण सिंह तेजा, एडीसीपी अदित्य, एडीसीपी कंवरप्रीत सिंह चाहल, एसीपी मनवीर सिंह बाजवा, 4 थानों की पुलिस, 12 पीसीआर व 100 से ज्यादा पुलिस मुलाजिमो को स्थिति कंट्रोल करने के लिए पहुंचना पड़ा।

    रमन अरोरा ने बताया कि DCP नरेश डोगरा ने जो उन के साथ अभद्र व्यवहार किया है वह मुख्यमंत्री भगवंत मान जी को सारी जानकारी देंगे। वही मेरे पास DCP के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी है वह मैं सीएम, डीजीपी और सीपी को भेज रहा हूँ।

    वही डीसीपी नरेश डोगरा का कहना है कि आपसी बहस के दौरान उनके साथ हाथापाई की गई है, पुलिस के काम में रमन अरोड़ा ने दखलअंदाजी की हैं।

  • रतन टाटा बने पीएम केयर्स फंड के ट्रस्टी, सलाहाकार मंडल में शामिल हुईं सुधा मूर्ति

    रतन टाटा बने पीएम केयर्स फंड के ट्रस्टी, सलाहाकार मंडल में शामिल हुईं सुधा मूर्ति

     

    PM CARES Fund News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नए ट्रस्टी और सलाहकारों की भागीदारी से पीएम केयर्स फंड की कार्यप्रणाली को व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा.

    दिग्गज भारतीय उद्योगपति और टाटा सन्स (Tata Sons) के मानद अध्यक्ष रतन टाटा (Ratan Tata), सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) के पूर्व जज केटी थॉमस (K T Thomas) और लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष करिया मुंडा (Kariya Munda) को पीएम केयर्स फंड ( PM CARES Fund) का ट्रस्टी बनाया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी है.

    दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi ) ने मंगलवार को ‘‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष’’ यानी ‘‘पीएम केयर्स फंड’’ के बॉर्ड ऑफ ट्रस्टी (Board of Trustees) के साथ एक बैठक की थी. पीएमओ के मुताबिक इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ ही नवनियुक्त ट्रस्टी के टी थॉमस, रिया मुंडा और अध्यक्ष रतन टाटा शामिल हुए थे.

    सलाहकार बोर्ड में इन लोगों को किया गया मनोनीत
    बैठक में भारत के पूर्व नियंत्रक व महालेखा परीक्षक राजीव महर्षि, इंफोसिस फाउंडेशन की पूर्व अध्यक्ष सुधा मूर्ति और इंडी कोर्प्स और पीरामल फाउंडेशन के पूर्व कार्यकारी अधिकारी आनंद शाह को पीएम केयर्स फंड के सलाहकार बोर्ड में मनोनीत करने का भी फैसला लिया गया.

    ‘पीएम केयर्स फंड की कार्यप्रणाली को व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा’
    पीएमओ के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि नए ट्रस्टी और सलाहकारों की भागीदारी से पीएम केयर्स फंड की कार्यप्रणाली को व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा. उन्होंने कहा, ‘‘सार्वजनिक जीवन में उनका व्यापक अनुभव, इस कोष को विभिन्न सार्वजनिक आवश्यकताओं के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने में और अधिक उत्साह प्रदान करेगा.’’

    बैठक के दौरान कोविड-19 के चलते अपने परिजनों को खो चुके 4,345 बच्चों की मदद करने वाले ‘‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन’’ सहित पीएम केयर्स की मदद से शुरु की गई विभिन्न पहलों के बारे में एक प्रस्तुति दी गई.

    ट्रस्टी (trustees) की ओर से कोविड काल में इस कोष द्वारा निभाई गई भूमिका का सराहना की गई जबकि प्रधानमंत्री ने पीएम केयर्स में दिल खोलकर योगदान देने के लिए देशवासियों की प्रशंसा की.

    बता दें कोविड-19 महामारी के फैलने के बाद सरकार ने इससे उत्पन्न किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए पीएम केयर्स फंड की स्थापना की थी.