‘सेंगोल’ पर अमित शाह ने शेयर की डॉक्यूमेंट्री, नए संसद भवन में रहेगा इस जगह विराजमान
सेंगोल 28 मई को नए संसद भवन में विराजमान होगा. यह सत्ता हस्तांतरण और आजादी का प्रतीक है. सेंगोल पर सबसे ऊपर भगवान शिव की सवारी नंदी हैं. देखिए इस पर बनी डॉक्यूमेंट्री.
सेंगोल चर्चा में क्यों और कैसे आया?
आज अमित शाह ने नए संसद भवन को लेकर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेंगोल का जिक्र किया और कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी नए संसद भवन में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक चिह्न सेंगोल भी स्थापित करेंगे. इस दौरान अमित शाह ने इस प्रतीक चिन्ह के ऐतिहासिक महत्व का ज़िक्र किया और बताया कि इसे किस तरह नजरअंदाज़ किया गया.
सेंगोल के बारे में जानिए
- सेंगोल शब्द को संस्कृत के संकु से लिया गया था
- संकु का अर्थ शंख होता है
- सेंगोल शब्द का अर्थ संपदा से सम्पन्न है
- बाद में यह सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक चिह्न बन गया
- सेंगोल आजादी का प्रतीक भी है
- सेंगोल पर सबसे ऊपर भगवान शिव की सवारी नंदी हैं
- बगल में कुछ कलाकृतियां भी बनी हैं
- सेंगोल चांदी का बना है और इसके ऊपर सोने की परत लगी हई है
अमित शाह ने बताया कि नए संसद भवन में सेंगोल को स्पीकर की कुर्सी के पास रखा जाएगा. ये आजादी के अमृत महोत्सव का प्रतिबिंब होगा.
पिछले साल दिल्ली के म्यूजियम में किया गया था शिफ्ट
सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक चिह्न सेंगोल को 14 अगस्त 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु को सौंपा गया था. आजादी के वक्त से यह सिंगोल प्रयागराज के एक म्यूजिमय में रखा हुआ था. पिछले साल 4 नवंबर को इसे दिल्ली के म्यूजियम में शिफ्ट कर दिया गया था. अब नए संसद भवन में इसके रखने का इंतजार हो रहा है.








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