मस्जिद से आई अजान के आवाज सुन अमित शाह ने बीच में रोका भाषण, फिर जनता से इजाजत लेने के लिए बोले- चालू करूं भाई!

मस्जिद से आई अजान के आवाज सुन अमित शाह ने बीच में रोका भाषण, फिर जनता से इजाजत लेने के लिए बोले- चालू करूं भाई!

बारामूला : जम्मू-कश्मीर के बारामूला में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस बीच उन्होंने पास के मस्जिद में जारी अजान के लिए अपना भाषण बीच में ही रोक दिया। अमित शाह के इस कदम को कई लोग सर्वधर्म समभाव से जोड़कर देख रहे हैं।

बारामूला में शाह को सुनने के लिए लोगों की भीड़ जुटी थी। मंच से खुद गृहमंत्री भी पूरे जोश में संबोधन दे रहे थे, लेकिन इसी बीच उन्हें पता चला की पास ही मस्जिद में अजान शुरू हो गई है। यह खबर लगते ही उन्होंने अपना भाषण बीच में रोक दिया। उन्होंने कहा, मुझे अभी चिट्ठी मिली है कि मस्जिद में अभी समय हुआ है प्रार्थना का, अब समाप्त हो गया है। कुछ समय बाद उन्होंने जनता से ही पूछकर मंच से दोबारा अपनी बात रखना शुरू किया। उन्होंने पूछा, मैं चालू करूं क्या फिर से, जरा जोर से बोलो चालू करूं भाई।

शाह ने बारामूला शहर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया, जो अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद कश्मीर में उनकी पहली जनसभा थी। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत धरती के सपूत मकबूल शेरवानी को भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ की, जो 1947 में आदिवासी आक्रमणकारियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। एक स्थानीय मस्जिद से ‘अजान’ (नमाज का आह्वान) आने की आवाज सुनकर शाह ने अपना भाषण रोक दिया। अजान खत्म होने के बाद उन्होंने अपना भाषण फिर से शुरू किया।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की अपनी यात्रा से पहले, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने उनसे एक ट्वीट कमेंट के माध्यम से पूछा था कि उन्हें जम्मू-कश्मीर के लिए जो किया है, उसका हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, महबूबाजी खुली आँखों से देखिये और फारूक साहब भी देखिये हमने क्या किया और आपने क्या किया था। आपके शासन में, 87 विधानसभा सदस्य, छह संसद सदस्य और तीन परिवार थे।

उन्होंने कहा, मोदीजी लोकतंत्र को पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर ले गए। आज इन संस्थानों में 30,000 से ज्यादा जनप्रतिनिधि हैं।
उन्होंने महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला दोनों से उनके शासन के दौरान जम्मू-कश्मीर में किए गए निवेश के बारे में सवाल किया। उन्होंने कहा, 1947 से 70 वर्षो में, जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 15,000 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया और 2019 से अब तक 56,000 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है जिससे पांच लाख स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।

उन्होंने कहा, आप लोगों ने कश्मीर को ‘आतंकवादी स्थल’ बनाया, जबकि मोदी जी ने कश्मीर को ‘पर्यटन स्थल’ बनाया है। उन्होंने कहा, इस साल अक्टूबर तक 22 लाख पर्यटक यहां आए थे। आपने स्थानीय युवाओं के हाथों में पत्थर और बंदूकें दीं और मोदीजी ने उन्हें लैपटॉप और मोबाइल फोन दिए। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या आतंकवाद ने कभी दुनिया में किसी की मदद की है। उन्होंने कहा कि 2014 तक, जम्मू-कश्मीर में सिर्फ चार मेडिकल कॉलेज थे और अब जम्मू-कश्मीर में नौ हैं।

उन्होंने कहा, अनुच्छेद 370 के आने तक गुर्जरों, बकरवालों और पहाड़ियों को कोई आरक्षण नहीं मिल सकता था। मोदीजी ने अनुच्छेद 370 को हटा दिया और अब गुर्जरों, बकरवालों और पहाड़ी लोगों को आरक्षण मिलेगा। मोदी जी ने शर्मा आयोग का गठन किया और इस आयोग की सिफारिशों के माध्यम से हमारे गुर्जर, बकरवाल और पहाड़ी भाइयों और बहनों को अब आरक्षण मिलेगा।

उन्होंने आगे कहा, कुछ लोग कहते हैं कि हमें पाकिस्तान से बात करनी चाहिए, लेकिन हम कहते हैं कि हमें जम्मू-कश्मीर के लोगों से बात करनी चाहिए। जो लोग पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करते हैं उन्हें पीओके जाकर देखना चाहिए और पता लगाना चाहिए कि वहां कितने गांवों में बिजली है। उन्होंने कहा, हम जम्मू-कश्मीर के हर गांव में बिजली लाए। 77 लाख लोगों के पास स्वास्थ्य कार्ड हैं और वे सरकार से 5 लाख रुपये के इलाज के हकदार हैं।

बता दें कि अमित शाह तीन दिन के जम्मू कश्मीर दौरे पर हैं। कल उन्होंने राजौरी में जनसभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने पहाड़ी समुदाय के लोगों को आरक्षण में लाने के प्रावधान की भी घोषणा की थी। इससे पहले उन्होंने कटरा में पहुंचकर माता वैष्णो देवी के दर्शन किए थे। उन्होंने माता जी की आरती उतार कर मनोकामना की अर्जी भी लगाई थी।

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