बोरवेल में गिरी बच्ची चेतना का रेस्क्यू ऑपरेशन 9वें दिन भी जारी, 120 फीट पर हुक से लटकी है बच्ची ; हालत चिंताजनक

बोरवेल में गिरी बच्ची चेतना का रेस्क्यू ऑपरेशन 9वें दिन भी जारी, 120 फीट पर हुक से लटकी है बच्ची ; हालत चिंताजनक

कोटपूतली : राजस्थान के कोटपूतली में एक 700 फीट गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की बच्ची चेतना को बचाने का अभियान मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। 23 दिसंबर को हुए इस हादसे के बाद से चेतना बोरवेल में फंसी हुई है, जिससे उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने पहले दावा किया था कि चेतना को सोमवार तक बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस देरी ने बच्ची के परिवार और स्थानीय ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश पैदा कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर उचित कदम उठाए गए होते तो चेतना को पहले ही बचाया जा सकता था। हालांकि, प्रशासन ने किसी भी लापरवाही से इनकार किया है।

परिजनों की नाराजगी को देखते हुए सोमवार देर शाम जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने उनसे मुलाकात की और उन्हें रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही चुनौतियों से अवगत कराया। कलेक्टर ने इस ऑपरेशन को राजस्थान का सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन बताया है और कहा है कि टीम हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन गहराई और अन्य तकनीकी कारणों से समय लग रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत चेतना को बचाने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। चेतना लगभग 120 फीट की गहराई पर एक हुक में फंसी हुई है, और 24 दिसंबर की शाम से उसकी कोई मूवमेंट नहीं देखा गया है, जिससे उसकी स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बचाव कार्य में एनडीआरएफ के छह जवानों की तीन टीमें रोटेशन में काम कर रही हैं। प्रत्येक बार में दो जवान 170 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर बोरवेल तक सुरंग खोद रहे हैं। जवानों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन गहराई के कारण उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही है। सभी प्रयासों के बावजूद, समय की पाबंदी को देखते हुए जल्द से जल्द चेतना को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए टीमों का समन्वित कार्य जारी है।

बता दें, चेतना 23 दिसंबर को दोपहर दो बजे खेलते समय 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। शुरुआत में वह लगभग 150 फीट की गहराई में फंसी थी, लेकिन देसी जुगाड़ से उसे 30 फीट ऊपर खींचा गया था। तब से उसे खाना-पानी नहीं मिला है। रेस्क्यू टीम चेतना को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

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