जानें किस जगह परेड में दिखाई गई इंदिरा गांधी की हत्या की झांकी, एस जयशंकर ने जताया कड़ा विरोध

जानें किस जगह परेड में दिखाई गई इंदिरा गांधी की हत्या की झांकी, एस जयशंकर ने जताया कड़ा विरोध

 

 

 
 

नई दिल्ली : कनाडा के पंजाब बहुल ब्रैम्पटन में एक परेड में सिख अंगरक्षकों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को दर्शाने वाली झांकी दिखाई गई। झांकी 4 जून को ब्रैम्पटन में एक सिख परेड के दौरान दिखाई गई। एक पोस्टर लगा था, जिसमें लिखा था – ‘बदला’ और खालिस्तान का झंडा भी लगा था।

इस घटना को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ लहजे में कहा कि यह भारत और कनाडा के बीच रिश्तों के साथ-साथ खुद कनाडा के लिए भी ठीक नहीं है। उन्होंने इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया है।

उन्होंने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि सच कहूं तो हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर कोई ऐसा क्यों करेगा। अलगाववादियों, चरमपंथियों और हिंसा की वकालत करने वाले लोगों को दिए जाने वाले स्पेस के बारे में एक बड़ा अंतर्निहित मुद्दा है। विदेश मंत्री की ओर से कनाडा को लेकर यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब कनाडा में खालिस्तानियों की ओर से निकाली गई झांकी का वीडियो सामने आया।

वीडियो तीन जून का बताया जा रहा है, जिसमें खालिस्तानी समर्थक पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या की थीम पर आधारित झांकी निकालते हुए नजर आ रहे हैं। जिसमें सेना की वर्दी में दो सिख बॉडीगार्ड इंदिरा गांधी पर गोली बरसाते दिख रहे हैं। यह झांकी छह जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी से ठीक पहले निकाली गई थी। पिछले कुछ दिनों में कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है।

पंजाब में लोग इस घटना से चकित हैं। उन्होंने कहा कि ब्रैम्पटन में एक परेड में इंदिरा गांधी की हत्या की झांकी को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताने के लिए भारत को कनाडा के उच्चायुक्त को तलब करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, क्या यह कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में मदद करता है?

खुफिया एजेंसियों का मानना था कि यह अमृतसर में भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ की 39वीं वर्षगांठ से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, जो 1 से 8 जून, 1984 के बीच किया गया था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी और अमृतसर में स्वर्ण मंदिर और इसके परिसर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।

‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए किया गया था। यह सैन्य कार्रवाई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर की गई थी। इसका बदला लेने के लिए दो सिख सुरक्षा गार्डो ने स्टेनगन से गोलियां चलाकर इंदिरा गांधी की जान ले ली थी।

इससे पहले, ब्रैम्पटन प्रांत में एक हिंदी मंदिर को ‘भारत-विरोधी’ भित्तिचित्रों के साथ तोड़ दिया गया था, जिससे भारतीय समुदाय सदमे में था। टोरंटो में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने गौरी शंकर मंदिर पर हमले की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया था।

भारत ने कनाडा के उच्चायुक्त को हाल के दिनों में कनाडा में भारतीय राजनयिक मिशनों के खिलाफ खालिस्तानी चरमपंथी तत्वों द्वारा कार्रवाई के बारे में अपनी चिंताओं से अवगत कराने के लिए तलब किया था।

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