जम्मू में अचानक क्यों बढ़े आतंकी हमले 

जम्मू में अचानक क्यों बढ़े आतंकी हमले

 

जम्मू-कश्मीर में अब सड़क पर पत्थरबाजी नहीं हो रही है, सड़कों पर हिंसा नहीं हो रही, न कोई हड़ताल कर रहा है और ना ही दहशत की वजह से स्कूलों में ताले लटके हैं….पर्यटक बड़ी संख्या में आ रहे हैं और यह सब पाकिस्तान और उसके मददगार आतंकियों के लिए नागवार गुजर रहा है.

 

जम्मू में अचानक क्यों बढ़े आतंकी हमले, क्या पाकिस्तान को जवाब देने का है वक्त? एक्सपर्ट्स से समझें

जम्मू में बीते कुछ महीनों से लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं.

37 दिन, 7 आतंकी हमले और 12 जवानों की शहादत…बीते कुछ वक्त से आतंकी जम्मू को निशाना बना रहे हैं. 15-16 जुलाई की रात को डोडा में हुए हमले में देश ने अपने 4 वीर जवानों को खो दिया है, पाकिस्तान की इस हिमाकत से पूरा देश गुस्से में है. लोग चाहते हैं कि सरकार पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक बार फिर 2016 जैसी सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है या फिर भारत को किसी नए तरीके से आतंक के आका से निपटना होगा? लेकिन इस सवाल का जवाब इतना आसान नहीं है जितना हम और आप सोच रहे हैं. इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको सबसे पहले ये समझना होगा कि आखिर पाकिस्तान और उसकी सरजमीं पर डेरा डाले आतंकी संगठन किस रणनीति के तहत जम्मू को निशाना बना रहे हैं?

जम्मू टारगेट क्यों, 3 प्वाइंट्स में समझिए

1. आतंकियों के लिए जम्मू प्राइम टारगेट क्यों बन चुका है, इसे समझने के लिए आपको पीर पंजाल की भौगोलिक स्थिति को जानना जरूरी है. पीर पंजाल का इलाका बहुत हद तक अफगानिस्तान के पहाड़ों जितना जटिल है. पिछले दो वर्षों में जम्मू-कश्मीर में हुए सभी बड़े आतंकी हमले पीर पंजाल के दुर्गम इलाकों में ही हुए हैं.

बीते कुछ दिनों में जम्मू में हुए आतंकी हमले पीर-पंजाल की पहाड़ियों में स्थित राजौरी-पुंछ-रियासी बेल्ट में हुए हैं, ये बेल्ट जम्मू को कश्मीर से अलग करती है. यानी इस इलाके में अगर हमला होता है तो अतिरिक्त फोर्स की मूवमेंट में मुश्किल होगी. इसके अलावा पीर पंजाल घाटी में आने वाले राजौरी और पुंछ जिले POK के साथ LOC के 225 किलोमीटर एरिया को टच करते हैं. यानी अगर समय रहते आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब नहीं मिलता है तो वे आसानी से भागने में कामयाब हो जाते हैं.

2. आतंकी LOC से लगते राजौरी और पुंछ के इलाकों से ही घुसपैठ करते हैं. इसके बाद यहां एक पर्वत से दूसरे पर्वत के बीच घूमते रहते हैं. इस दौरान यहां के घने जंगल आतंकियों के लिए शेल्टर का काम करते हैं. जिससे सुरक्षा बलों के लिए उनकी मूवमेंट को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण होता है. इस इलाके में कई प्राकृतिक गुफाएं हैं, यहां आतंकी छिपकर आसानी से डेरा डाल लेते हैं जिससे सुरक्षा बलों के रडार और ड्रोन्स की स्कैनिंग से बचने में उन्हें मदद मिलती है.

3. सबसे बड़ी बात, जंगल घना है, तो विजिबिलटी भी बहुत कम रहती है. जंगल में खाने-पीने की बुनियादी जरूरत आसानी से पूरी हो जाती है, जिससे आतंकियों के लिए लंबे समय तक छुपकर रहना आसान हो जाता है. ऐसे में आतंकी घात लगाकर चोटियों पर और चट्टानों के पीछे जंगलों में छिपे रहते हैं, और वहां से नीचे आसानी से फायरिंग कर पाते हैं. जब सेना का शिकंजा ज्यादा कसता है तो अधिकतर जगहों पर फेंसिंग न होने के कारण आतंकी जंगल के रास्ते आराम से वापस POK लौट जाते हैं.

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *