इसी वर्ष अस्तित्व में आएगा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग, कई प्रस्तावों पर तेजी से चल रहा काम

इसी वर्ष अस्तित्व में आएगा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग, कई प्रस्तावों पर तेजी से चल रहा काम

शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा से जुड़े सभी अटके प्रस्तावों को लेकर तेजी दिखाई है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय उच्च शिक्षा आयोग इसी साल अस्तित्व में आएगा। मौजूदा वक्‍त में कई प्रस्तावों पर तेजी से काम चल रहा है।

नई दिल्ली। उच्च शिक्षा से जुड़े अहम बदलावों को लेकर अब और लंबा इंतजार नहीं करना होगा। अखिल भारतीय शिक्षा समागम के बाद शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा से जुड़े सभी अटके प्रस्तावों को लेकर तेजी दिखाई है। इनमें सबसे अहम भारतीय उच्च शिक्षा आयोग का गठन है, जो उच्च शिक्षा में पहले से मौजूद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की जगह लेगा।

इसमें ज्यादातर विशेषज्ञ इस पक्ष में थे कि प्रस्तावित बदलावों को और नहीं टाला जाना चाहिए। इसके बाद ही मंत्रालय ने इन सभी प्रस्तावों को लेकर तेजी दिखाई है। संभव है कि मानसून सत्र में ही इससे जुड़े विधेयक को संसद में पेश कर दिया जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( एनईपी ) में ही उच्च शिक्षा से जुड़े इन बदलावों को सिफारिश की गई है। यह बात अलग है कि दो साल बाद भी इसका गठन नहीं हो पाया।

मंत्रालय ने इसके साथ ही प्रस्तावित नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के गठन की भी तैयारी तेज कर दी है। इसका मुद्दा शिक्षा समागम में भी उठा था। इस दौरान मंत्रालय ने यह भरोसा दिया कि इसका गठन भी इस साल के अंत तक कर दिया जाएगा।

बता दें कि एनईपी के साथ नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के गठन का ऐलान बजट में भी किया गया था। इसके तहत पांच सालों में एनसीएफ के जरिए उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध को बढ़ाने पर 50 हजार करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव किया गया है। माना जा रहा है कि इससे शोध के क्षेत्र में पिछड़े उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक उच्च शिक्षा से जुड़े जिस तीसरे अहम प्रस्ताव पर तेजी से काम हो रहा है, वह देश में विदेशी विश्वविद्यालयों को कैंपस खोलने की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव है। अभी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में जाते है। इस पहल के जरिए सरकार की कोशिश छात्रों को देश में ही वैसी शिक्षा मुहैया कराने की है।

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