अमरनाथ तक बन रही सड़क का काम बर्फबारी से पहले खत्म करने में जुटा बीआरओ, अब 12 नहीं 5 घंटे में ही हो जाएंगे बाबा के दर्शन

अमरनाथ तक बन रही सड़क का काम बर्फबारी से पहले खत्म करने में जुटा बीआरओ, अब 12 नहीं 5 घंटे में ही हो जाएंगे बाबा के दर्शन

 

संबंधित अधिकारियों ने बताया है कि इस बार की बर्फबारी से पहले ही यहां पर ज्यादातर काम खत्म करने की कोशिश की जा रही है.

अमरनाथ तक बन रही सड़क, अब 12 नहीं 5 घंटे में ही हो जाएंगे बाबा के दर्शन

अमरनाथ की पवित्र गुफा (फाइल फोटो)

अमरनाथ यात्रियों के लिए अब बाबा के दर्शन का रास्ता और भी आसान हो जाएगा. बालटाल से पवित्र गुफा तक सड़क बनाने का काम चल रहा है. बड़ी बात ये है कि इस सड़क निर्माण का काम सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अपने जिम्मे ले लिया है. इस बड़े बदलाव के बाद से ही सड़क बनाने का काम जोरो पर हैं. संबंधित अधिकारियों ने बताया है कि इस बार की बर्फबारी से पहले ही यहां पर ज्यादातर काम खत्म करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि प्रोजेक्ट पूरा होने में अभी करीब एक साल लग जाएगा

बता दें कि फिलहाल बालटाल से बाबा की गुफा तक पहुंचने में सामान्य तौर पर 7 से 8 घंटे लग जाते हैं. अगर भीड़ ज्यादा होती है तो करीब 5 घंटे और लग जाते हैं. ऐसे में श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन करने में 12 घंटे तक लग जाते हैं. अब इस सड़क के निर्माण पूरा हो जाने के बाद श्रद्धालुओं को महज 4 से 5 घंटे के अंदर ही बाबा के दर्शन हो जाएंगे.

बता दें कि इससे पहले काम बहुत ही आराम से चल रहा था. जिससे इस सड़क के काम को पूरा होने में बहुत वक्त लग जाता. इस लेट लतीफी को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस सड़क का काम बीआरओ को सौंप दिया है. अब बीआरओ ने इस सड़क को बनाने, रखरखाव करने और प्रबंधन का जिम्मा उठाया है. 29 सितंबर से ही बीआरओ ने इस पर काम शुरू कर दिया था. यह एक चैलेंज के तौर पर लिया गया प्रोजेक्ट हैं जिसे बीआरओ ने जल्द से जल्द पूरा करने की ठानी है.

वर्ल्ड क्लास बनेगा ट्रैक

बता दें कि बालटाल से गुफा तक की दूरी फिलहाल 13.2 किलोमीटर है. इसके बीच में डोमेल, बरारी और संगम स्थान आते हैं. बालटाल से निकलते ही करीब 2.5 किलोमीटर का रास्ता काफी जोखिम भरा और खड़ी चट्टानों वाला है. अब इसे सुरक्षा की दृष्टि से वर्ल्ड क्लास बनाया जा रहा है. इसका सीधा मतलब है कि यात्रा सुरक्षित और आरामदायक होगी. बीआरओ ट्रैक को और चौड़ा बनाने जा रही है ताकि खतरा और कम किया जा सके.

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