आज खाटू श्याम लक्खी मेले का होगा समापन, क्या आप जानते हैं  हारे का सहारा माने जाने वाले बाबा श्याम की कहानी…

 आज खाटू श्याम लक्खी मेले का होगा समापन, क्या आप जानते हैं  हारे का सहारा माने जाने वाले बाबा श्याम की कहानी…

 

Khatu Shyam Mela 2023: आज यानी 4 मार्च को राजस्थान के शीकर जिले में बाबा खाटू श्याम के लक्खी मेले का समापन होने जा रहा है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा श्याम के शरंण में पहुंच रहे हैं। बता दें मेले की शुरुआत 22 फरवरी को खाटू श्याम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। मान्यता है कि इस दौरान बाबा श्याम नगर भ्रमण पर निकलते हैं। बाबा श्याम का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है।

Khatu shyam Mela 2023

Khatu shyam Mela 2023: कौन हैं बाबा खाटू श्याम, पढ़िए महाभारत काल से जुड़ी कहानी

 

मुख्य बातें
आज यानी 4 मार्च को होगा लक्खी मेले का समापन। बाबा खाटू श्याम को माना जाता साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार। पौराणिक ग्रंथों में है खाटू श्याम का वर्णन।
Khatu Shyam Mela 2023: उड़ती गुलाल नाचते गाते श्याम भक्त खाटू श्याम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि लक्खी मेले के दौरान बाबा श्याम के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। तथा जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का अंत (Falgun Mela 2023 Khatu Shyam) होता है। प्रत्येक वर्ष होली के दौरान राजस्थान के सीकर जिले में खाटू श्याम के लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है। इस साल 22 फरवरी को खाटू श्याम जी के कपाट खुलने के साथ मेले की शुरुआत हुई थी। वहीं आज यानी 4 मार्च को इसका समापन होने जा रहा है। बता दें खाटू श्याम को भगवान श्री कृष्ण का कलयुगी अवतार माना जाना (Falgun Mela 2023) जाता है। नीले रंग के अश्व पर सवार बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है। मान्यता है कि, बाबा का आशीर्वाद होने पर भक्त कभी अपने किसी कार्य में असफल नहीं होते तथा उस पर आने वाली सभी विपदाओं का नाश होता है।
पौराणिक ग्रंथों में बाबा खाटू श्याम का उल्लेख मिलता है। खाटू श्याम का संबंध महाभारत काल से जुड़ा (Khatu Shyam Ji Mela) है। कहा जाता है कि बाबा खाटू श्याम पांडुपुत्र भीम के पौत्र थे। उनकी अपार शक्ति और क्षमता से प्रभावित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने अवतार में पूजन का आशीर्वाद दिया था।

यही कारण है कि बाबा को भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप माना (Lakhi Mela 2023 Date) जाता है। बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बाबा आस लगाने वालों की झोली खाली नहीं रखते। बाबा खाटू श्याम को लखदातार, हारे का सहारा और शीश का दानी आदि नामों से जाना जाता है। ऐसे में इस लेख के माध्यम से आइए जानते हैं महाभारत काल से जुड़े बाबा श्याम की कहानी।

महाभारत काल से जुड़ी है बाबा श्याम की कहानी

बाबा खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है। पौराणिक ग्रंथों में बाबा श्याम को लेकर एक कथा वर्णित है। पांडव जब अपनी जान बचाते हुए इधर-उधर भटक रहे थे, तब भीम की मुलाकात हिडिम्बा से हुई थी। यह भीम को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थी। माता कुंती की आज्ञा से भीम और हिडिंबा का विवाह हुआ, जिससे घटोत्कच का जन्म हुआ। घटोत्कच को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम था बर्बरीक। बर्बरी अपने पिता से भी ज्यादा मायाबी और बलशाली था। बर्बरीक देवी भगवती का उपासक था। देवी के वरदान से उसे तीन दिव्य बाण प्राप्त हुए थे, जो अपने लक्ष्य को भेदकर वापस लौट आते थे। यही कारण था कि वह अत्यंत बलशाली था। साथ ही बर्बरीक को अमरता का वरदान भी प्राप्त था।
महाभारत युद्ध के दौरान बर्बरीक नीले अश्व पर सवार कुरुक्षेत्र आ रहे थे।भगवान श्रीकृष्ण को आभास हो गया कि, यदि बर्बरीक युद्ध में शामिल हुआ तो परिणाम पाण्डवों के विरुद्ध हो सकता है। यही कारण है कि, भगवान श्रीकृष्ण एक ब्राह्मण का रूप धारण कर बर्बरी के पास आ गए और उन्होंने बर्बरीक से पूछा कि, तुम कौन हो और कुरुक्षेत्र क्यों जा रहे हो। बर्बरीक ने बड़े सहजता से जवाब देते हुए कहा कि, वह एक दानी योद्धा हैं, जो अपने एक बांण से महाभारत के युद्ध का निर्णय कर सकता है। इसे सुन भगवान श्रीकृष्ण चिंतित हो गए, उन्हें बर्बरीक की शक्ति का अहसास हो गया।

भगवान श्रीकृष्ण को किया था शीश दान

भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को युद्ध में शामिल होने से रोकने के लिए, दान में उनका सिर मांग लिया। बर्बरीक को आभास हो गया कि, वह ब्राह्मण नहीं बल्कि श्रीहरि भगवान विष्णु का स्वरूप हैं और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान दे दिया। बर्बरीक की सहजता को देख श्रीकृष्ण ने अपना साक्षात दर्शन दिया और उन्हें कलयुग में बाबा खाटू श्याम के रूप में पूजे जाने का आशीर्वाद दिया।
सौजन्य : times now नवभारत

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