सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर पर एक बार फिर बेनतीजा रही बैठक,पंजाब के CM मान बोले- पंजाब के पास देने के लिए एक बूंद पानी नहीं
चंडीगढ़ : सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के मुद्दे पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई। यह बैठक फिर बेनतीजा रही है। बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हमने केंद्र के सामने पंजाब का पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने कहा कि हमारे पास हरियाणा को देने के लिए पानी नहीं है, हमारा पानी पहले ही काफी नीचे जा चुका है इसलिए हम हरियाणा को पानी नहीं दे सकते क्योंकि हमारे पास किसी को देने के लिए पानी की एक बूंद भी नहीं है। सीएम मान ने कहा कि SYL की जगह YSL बनाया जाएं यानी की यमुना से हरियाणा को पानी देने में कोई एतराज नहीं लेकिन सतलुज से पानी देने में ऐतराज है।
मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इस बैठक में कोई सहमति नहीं बनी है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि एसवाईएल नहर का निर्माण होना चाहिए लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री और उनके अधिकारियों की टीम इस विषय को एजेंडे पर ही लाने को तैयार नहीं है। वे पानी नहीं होने की बात कह रहे हैं और पानी के बंटवारे पर बात करने को कह रहे हैं जबकि पानी बंटवारे के लिए अलग से ट्रिब्यूनल बनाया गया है। ट्रिब्यूनल के हिसाब से जो सिफारिश होगी उस हिसाब से पानी बांट लेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी स्वीकार नहीं कर रही है जिसमें 2004 में पंजाब सरकार द्वारा लाए गए एक्ट को निरस्त कर दिया गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि 2004 का एक्ट अभी भी मौजूद है जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि एसवाईएल नहर बननी चाहिए और हरियाणा इस बारे में सुप्रीम कोर्ट को अवगत करवाएगा । सुप्रीम कोर्ट को बताया जाएगा कि पंजाब एसवाईएल नहर निर्माण के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगा वो हमें स्वीकार होगा।
सतलुज यमुना लिंक को लेकर दोनों राज्यों के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बैठकर मसला सुलझाने को कहा था, जिसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच बैठक हुई थी, लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही थी। अब फिर 19 जनवरी को इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। SYL मुद्दे पर पंजाब अपना स्टैंड साफ कर चुका है। पंजाब की सरकारें समय-समय पर कहती रही हैं कि राज्य के पास किसी को देने के लिए सरप्लस पानी नहीं है।









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