मल्टीनेशनल कंपनी की तरह कार्य कर रही थी टेरर कंपनी: खालिस्तान टाइगर फोर्स 

मल्टीनेशनल कंपनी की तरह कार्य कर रही थी टेरर कंपनी: खालिस्तान टाइगर फोर्स

 

खालिस्तान टाइगर फोर्स का कामकाज एक मल्टीनेशनल कंपनी की तरह होता था. खालिस्तानी संगठन की इस कंपनी में रिक्रूटमेंट, डिसट्रिब्यूशन से लेकर फंडिंग के का एक पूरा सिस्टम तैयार किया गया था और हर कंपनी के अलग विभाग अपनी अलग-अलग जिम्मेदारी का वहन करते थे. इसमें टेटर पैदा करने से लेकर प्रशिक्षण तक के कार्यक्रम शामिल थे.

मल्टीनेशनल कंपनी की तर्ज पर चलती थी टेरर कंपनी, खालिस्तान टाइगर फोर्स का जानें हर राज

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी तफ्तीश के दौरान खालिस्तान टाइगर फोर्स के काम करने का चौकाने वाला तरीका सामने आया है. जांच में पता चला है कि इस खालिस्तानी आतंकी संगठन के काम करने का तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसा एक मल्टीनेशनल कंपनी का होता है. खालिस्तानी संगठन की इस कंपनी में रिक्रूटमेंट, डिसट्रिब्यूशन से लेकर फंडिंग के का एक पूरा सिस्टम तैयार किया गया था. इस सिस्टम में सबका काम आपस में बंटा हुआ था. इस टेरर कंपनी में बतौर CEO यानी चीफ खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स का आतंकी अर्शदीप सिंह डल्ला काम कर रहा है.

टेरर कंपनी के इस वेपन डिपार्टमेंट को सनी डागर यानी विक्रम देखता था, लेकिन हथियारो की सप्लाई के लिए उसे अपने हेड अर्शदीप डल्ला की इजाजत लेनी होती थी. पंजाब में मौजूद गैंग के ओवर ग्राउंड वर्कर तक हथियार इंडो-पाक बॉर्डर पर ड्रोन के जरिये पहुंचाये जाते थे, जिसमें ISI-पाक खालिस्तान नेटवर्क इनकी पूरी मदद करता था.

किसी भी टेरर कंपनी को उसके अंजाम तक पहुँचाने के लिए सबसे जरूरी होती है फंडिंग. खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स में भी इस डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी अर्शदीप डल्ला ने अपने सबसे खासमखास कौशल चौधरी गैंग के गुर्गों दलेर सिंह, दिनेश गांधी, नीरज पंडित, नवीन दरार, संदीप डबास और संदीप उर्फ बंदर को दी गयी थी.

जिनकी जिम्मेदारी थी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के कारोबारी, खिलाड़ी, सिंगर और बिल्डरों से प्रोटेक्शन मनी वसूल करना ताकि उस फण्ड से आतंक की कंपनी चलाते थे.

दहशत फैलाने की योजना बनाता था कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट

खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स के आतंकी आपस में बातचीत के लिए सिग्नल और अन्य सोशल मीडिया ऍप्लिकेशन्स का इस्तेमाल करते थे, जिनके जरिये रोज कांफ्रेंस की जाती थी. इस सेल की जिम्मेदारी सोशल मीडिया एकाउंट के जरिये टेरर कंपनी की दहशत फैलाने की भी है,.

खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स नाम की इस टेरर कंपनी में आतंकी साजिशों को अंजाम देने के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर में रिक्रूट किया करते हैं. सबसे पहले सनी डागर सोशल मीडिया एप्लीकेशन के जरिये लड़कों से बात करता था.

छोटे अपराध में शामिल लड़कों को किया जाता था शामिल

उसके बाद इसकी जानकारी अर्श डल्ला को दी जाती थी. खास तौर पर उन लड़कों को टेरर कंपनी में जगह मिलती थी जोकि छोटे-मोटे अपराध में शामिल होते थे,यानी पुलिस के राडार से बाहर जिन पर किसी को शक न हो.

टेरर कंपनी का ट्रेनिंग डिपार्टमेंट होता है. शूटर्स को टर्निंग टास्क से ठीक पहले दी जाती है. शार्ट, लॉग बाकायदा सभी फायरिंग रेंज तैयार की जाती हैं. साथ ही, वारदात को अंजाम देने के बाद एस्केप रूट भी कैसे बनाना है ये तक समझाया जाता है. पकड़े जाने पर जांच एजेंसियों को उलझाने तक की ट्रेनिंग होती है.

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