बालासोर ट्रेन हादसे पर हुआ बड़ा खुलासा, इंटरलॉकिंग सिस्टम से की गई जानबूझकर छेड़खान

बालासोर ट्रेन हादसे पर हुआ बड़ा खुलासा, इंटरलॉकिंग सिस्टम से की गई जानबूझकर छेड़खानी

 

Coromandel Train Accident: ओडिशा ट्रेन हादसे की जांच चल रही है. शुरुआती जांच में पता चला है कि इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ किया गया. रेलवे को इसके सबूत मिले हैं. मामले की जांच के लिए सीबीआई टीम भी घटनास्थल पहुंच गई है.

Odisha Train Accident: बालासोर ट्रेन हादसे पर बड़ा खुलासा, इंटरलॉकिंग सिस्टम से की गई जानबूझकर छेड़खानी

ओडिशा ट्रेन हादसे के बाद की तस्वीर:

Odisha Train Accident: ओडिशा ट्रिपल ट्रेन हादसे की जांच शुरू हो गई है. रेलवे की शुरुआती जांच में पता चला है कि पटरियों के इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ जानबूझकर छेड़खानी की गई थी. जांच में बताया जा रहा है कि इसके सबूत भी मिले हैं. हादसे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस इंटरलॉकिंग सिस्टम की ही रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी शुरुआती जांच के आधार पर इसी सिस्टम में गड़बड़ी की आशंका जताई थी.

सीआरबी रेलवे ने हादसे के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को जानकारी दी है. हादसे पर रेलवे ने इस बात की आशंका जाहिर की है कि यह जो भी घटना हुई वह पॉइंट में बदलाव की वजह से हुई. पीएमओ को जानकारी दी गई कि रेलवे को ऐसा लगता है कि यह सब कुछ जानबूझकर किया गया है या फिर किसी ऐसे शख्स ने किया है, जिसको पॉइंट के बारे में पूरी जानकारी थी.

इंटरलॉकिंग सिस्टम से छेड़छाड़ के स्पष्ट सबूत

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि उनकी प्रारंभिक जांच में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से छेड़छाड़ के स्पष्ट सबूत मिले हैं. रेलवे अधिकारी ने कहा कि सीबीआई जांच में इस बारे में और भी खुलासे हो सकेंगे. सीबीआई इस बात का पता लगाएगी कि आखिर इस हादसे के पीछे किसका हाथ है, किसने हादसे को अंजाम दिया, या फिर हादसा आखिर कैसे हुआ.

रेलवे के एक अधिकारी ने रविवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की उस बात को दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंटरलॉकिंग सिस्टम सिग्नलिंग का एक बहुत ही सुरक्षित तरीका है. इसे ‘फेल सेफ’ कहा जाता है, जिसका मतलब है कि अगर सिस्टम विफल हो जाता है, तो सभी सिग्नल लाल हो जाएंगे, जिससे सभी ट्रेनें रुक जाएंगी.

बिना छेड़छाड़ नहीं हो सकता सिस्टम में बदलाव

रेलवे के मुताबिक, जबतक इस इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ कोई जानबूझकर छेड़छाड़ नहीं करता, ऐसा मुमकिन ही नहीं है कि मेन लाइन के लिए निर्धारित लाइन को लूप लाइन से बदला जाए. अधिकारी ने सिफारिश की है कि इसी एंगल से जांच होनी चाहिए. बताया जाता है कि भारतीय रेलवे जिस इंटरलॉकिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है उसके पास चार सर्टिफिकेशन हैं और 100 फीसदी सुरक्षित माना जाता है.

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