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  • छत पर गिरे पत्थर को समझा आम पत्थर, वो निकला 5 अरब साल पुराना उल्‍कापिंड- रातोंरात महिला बनीं करोड़पति

    छत पर गिरे पत्थर को समझा आम पत्थर, वो निकला 5 अरब साल पुराना उल्‍कापिंड- रातोंरात महिला बनीं करोड़पति

    नई दिल्ली : कुछ समय पहले एक खबर आई थी कि इंडोनेशिया में एक शख्‍स के घर पर आसमान से एक अनमोल खजाना आ गिरा और मालामाल हो गए। अब इसी तरह की एक और घटना सामने आई है। एक मह‍िला के घर पर पत्‍थर आकर गिरा। मह‍िला उसे आम पत्‍थर समझ रही थी, लेकिन जब विशेषज्ञों ने देखा तो बताया कि यह 5 अरब साल पुराना उल्‍कापिंड है। बता दें कि Meteorites काफी कीमती होते हैं, यहां तक कई कुछ की कीमत सोने को भी पीछे छोड़ देती है। इनकी कीमत 0.50 डॉलर से लेकर 1000 डॉलर प्रति ग्राम भी हो सकती है।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के न्‍यू जर्सी में सोमवार दोपहर बाद यह घटना हुई, जब होपवेल टाउनशिप में एक घर की छत से एक धातु की वस्तु आकर गिरी। मकान मालक‍िन सूजी कोप ने कहा, यह घर की छत पर गिरा और सीधे बेडरूम में पहुंच गया। मुझे लगा कि किसी ने पत्‍थर चलाया होगा। लेकिन ऊपर देखा तो यह छत तोड़कर नीचे आया था। गनीमत रही कि उस वक्‍त वहां पर कोई मौजूद नहीं था और किसी को चोट नहीं आई। अध‍िकारियों ने बताया कि आकार में चौकोर दिखने वाला यह उल्‍कापिंड 4 से 6 इंच का है। देखने में यह किसी धातु की तरह नजर आता है।

    फ्रैंकलिन इंस्टीट्यूट के प्रमुख खगोलशास्त्री डेरिक पिट्स ने कहा, संभवत: पांच अरब साल पुराना यह उल्कापिंड सौर मंडल के शुरुआती दिनों का अवशेष हो सकता है। यह अब तक अंतरिक्ष में इधर-उधर दौड़ रहा था और अब पृथ्वी पर आ गिरा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले वीकेंड इलाके में एटा एक्वारिड्स उल्का बौछार पीक पर थी। माना जा रहा है कि उसके कारण एक उल्‍कापिंड पृथ्‍वी तक पहुंचने में कामयाब रहा। अध‍िकार‍ियों ने इसे स्‍कैन किया ताकि जांचा जा सके कि रेडियो एक्टिव विकिरण तो नहीं फैल रहा है। फायर डिपार्टमेंट ने कंफर्म किया कि कोई खतरा नहीं है।

    अध‍िकारियों के मुताबिक, इस चट्टानी टुकड़े का वजन करीब 1.8 किलोग्राम है। खगोलशास्त्रियों का कहना है कि जब भी कोई उल्‍कापिंड धरती के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो घर्षण और ज्‍यादा तापमान होने की वजह से उसमें आग लग जाती है और वह नष्‍ट हो जाता है। लेकिन कई बार यह पूरी तरह खत्‍म नहीं होता। इसकी वजह से कुछ टुकड़े पृथ्‍वी तक आ जाते हैं। इन्‍हें ही उल्‍कापिंड के नाम से जाना जाता है। वैसे तो उल्‍कापिंडों का किसी घर या लोगों से टकराना एक तरह की दुर्लभ घटना है।