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  • पराली के धुएं से घुटता आसमान; दमघोंटू हुई हवाएं,पराली जलाने के मामले में CM भगवंत मान का जिला टॉप पर, जानें यहां कितने केस

     

    पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है. संगरूर में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं.

    पराली जलाने के मामले में CM भगवंत मान का जिला टॉप पर, जानें यहां कितने केस

    पराली जलाने के मामले में CM भगवंत मान का जिला टॉप पर

    पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है. संगरूर में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं. पराली जलाने की घटनाओं में मुख्यमंत्री भगवंत मान का जिला संगरूर सबसे ऊपर है. यहां अकेले 345 जगहों पर पराली जलाई गई है. संगरूर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का निर्वाचन क्षेत्र भी है. पंजाब में मंगलवार को पराली जलाने की 1842 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें सबसे अधिक 345 मामले संगरुर जिले की थी.

    इसके अलावा फिरोजपुर में 229, पटियाला में 196, बठिंडा में 160, तरन-तारन में 123, बरनाला में 97 और मुक्तसर में पराली जलाने की 91 घटनाएं दर्ज की गई. वहीं, बुधवार को पंजाब में पराली जलाने की 3634 घटनाएं दर्ज की गईं. राज्य में पराली जलाने के चलते प्रदूषण का लेवल खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत आने लगी है.

    किसानों के पास पराली जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं

    पंजाब के किसानों का कहना है कि उसके पास पराली जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. एक किसान ने कहा, ‘हमारे पास पराली जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. सब्सिडी योजनाओं के तहत हमें बेची जाने वाली मशीनें पराली जलाने से रोकने में कारगर नहीं हैं. हमने जो रोटोबीटर्स और हैप्पी सीडर्स खरीदे या किराए पर लिए थे, उन्होंने पराली को काट दिया. लेकिन एक समस्या है. यदि हम नहीं जलाते हैं और फसल काटते हैं, तो हमारी उपज कीड़ों से प्रभावित होगी.’

    हम पराली जलाएंगे, किसी की नहीं सुनेंगे

    वहीं, एक और किसान परविंदर सिंह ने कहा, ‘हम किसी से नहीं डरते. हम पराली जलाएंगे. यह हमारी जमीन है और हम किसी की नहीं सुनेंगे. हम रेड नोटिस या जुर्माने से नहीं डरते. बिना ईंधन के हम इन मशीनों का उपयोग कैसे करेंगे? सरकार हमें ईंधन की लागत प्रदान नहीं कर रही है.’ परविंदर करीब 12 एकड़ जमीन के मालिक हैं.

    एक अन्य किसान ने कहा, ‘एकमात्र उपाय यह है कि पंजाब के किसान धान की बुवाई बंद कर दें. चावल पंजाब की पारंपरिक फसल नहीं है. हरित क्रांति के कारण हमें चावल और गेहूं की खेती शुरू करनी पड़ी. यदि सरकार अन्य फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करती है, तो हम गेहूं और चावल की खेती बंद कर देंगे. इससे न तो जल स्तर कम होगा और न ही प्रदूषण होगा.’

    बता दें कि केंद्र सरकार लगातार दिल्ली और पंजाब सरकार को प्रदूषण और पराली जलाने के मामलों के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है. पंजाब के सीएम भगवंत मान बुधवार को कहा कि पंजाब का किसान पराली जलाना नहीं चाहता लेकिन उन्हें मजबूरी में पराली को आग के हवाले करना पड़ रहा है और केंद्र सरकार से पंजाब सरकार को कोई मदद पराली प्रबंधन को लेकर नहीं मिल रही है.