पैंगोंग त्सो झील के पास चीन कर रहा निर्माण कार्य, सैटेलाइट की नई तस्वीरों से हुआ खुलासा
चीन की तरफ से लगातार बॉर्डर के पास निर्माण कार्य किया जा रहा है. कॉपरनिकस सर्विस इन्फोर्मेशन की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास चीन बड़े लेवल पर निर्माण कार्य कर रहा है.
चीन के संबंधों को लेकर भारत की तरफ से कई कदम उठाए जा रहे हैं. लेकिन इसके बाद भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. कॉपरनिकस सर्विस इन्फोर्मेशन की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास चीन बड़े लेवल पर निर्माण कार्य कर रहा है. पीएलए के सिरिजाप और रिमुचांग गश्ती नाव अड्डों पर विस्तार कार्य तेजी से चल रहा है.
दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील पैंगोंग त्सो भारत, चीन प्रशासित तिब्बत और उनके बीच विवादित सीमा पर फैली हुई है. 14 दिसंबर को कैप्चर की गई सैटेलाइट तस्वीरों में पैंगोंग झील परफिंगर 4 से आगे सिरिजाप के पास चीन की पहली पोस्ट बफर जोन के पास नजर आ रही है.
फिंगर 4 के एरिया को फॉक्सहोल प्वाइंट, जिसे फॉक्सहोल रिज भी कहा जाता है. लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तर किनारे पर फिंगर 4 के पश्चिमी हिस्से में स्थित है. इस क्षेत्र पर भारतीय सेना का नियंत्रण है, और भारत का दावा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) फिंगर 8 के पूर्व में है. हालांकि, चीन का दावा है कि एलएसी फिंगर 2 के पास है.
नई सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा
नई सैटेलाइट तस्वीरों में सिरिजाप के ही पास चीन का फॉरवर्ड बेस भी दिखाई दे रहा है. जिस पर निर्माण कार्य लगातार जारी है. उसी के पास झील के किनारे पर नए संभावित तट के विस्तार की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. हालांकि झील की ओर ढलान वाली नदी के किनारे अप्रैल 2024 की शुरुआत में पहला निर्माण शुरू हुआ था.
उसी के आगे बढ़ते हुए चीन पैंगोंग झील के उत्तरी तट के पास हेलीपैड का विस्तार कार्य कर रहा है. ये इलाका “खुरनाक किला” के पास है. जिसका इतिहास भारत से ही जुड़ा हुआ है. जो वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के दावे को भी खोखला करता है.







