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  • भाजपा द्वारा गठबंधन पर मना होने के बाद लोकसभा चुनाव पर सुखबीर बादल ने दिया ये बड़ा बयान, सरकार बनाने के लिए पार्टी नहीं बनाई, ये उसूलों की पार्टी

    भाजपा द्वारा गठबंधन पर मना होने के बाद लोकसभा चुनाव पर सुखबीर बादल ने दिया ये बड़ा बयान, सरकार बनाने के लिए पार्टी नहीं बनाई, ये उसूलों की पार्टी

    लोकसभा चुनाव पर सुखबीर बादल का बड़ा बयान,

     

     

    भाजपा के ऐलान के बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने अब साफ कर दिया है कि अकाली दल पंजाब में अकेले दम पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि अकाली दल नंबर गेम के पीछे भागने वाली पार्टी नहीं है और न ही सत्ता का लालच उन्हें है। 103 साल की राजनीति में अकाली दल ने हमेशा पंथ और पंजाब के मुद्दों को राजनीति से ऊपर रखा है।

    सरकार बनाने के लिए पार्टी नहीं बनाई

     

    सुखबीर बादल ने कहा कि अकाली दल कोई मामूली पार्टी नहीं है, ये उसूलों की पार्टी है। हमारे लिए नंबर गेम से अधिक असूल जरूरी हैं। 103 सालों में अकाली दल ने कभी सरकार बनाने के लिए पार्टी नहीं बनाई है। अकाली दल ने हमेशा कौम की रक्षा, पंजाब की रक्षा, पंजाब में पारिवारिक सांझ के लिए काम किया है। पंजाब में अमन शांति हमारी जिम्मेदारी है। हमारी कोर कमेटी ने साफ कर दिया है कि हमारे उसूल क्या हैं और हमारे मसले क्या हैं।

    भाजपा ने किया अकेले चुनाव लड़ने का फैसला

    आपको बता दें कि आज ही पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने यह फैसला लिया है कि वह लोकसभा चुनावों में पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी। इसी के साथ ही भाजपा-अकाली गठबंधन पर की चर्चाओं के ऊपर विराम लग गया है।

    उन्होंने कहा कि पंजाब के भविष्य, जवानी-किसानी और व्यापारियों एवं पिछड़े वर्ग की बेहतरी के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में किसानों की फसल का एक-एक दाना उठाया गया है। करतारपुर कॉरिडोर की सदियों की मांग पीएम मोदी ने पूरी की।

    क्यों नहीं हो पाया गठबंधन?

    देश के अंदर कई दिन से चर्चा चल रही थी कि अकाली दल और बीजेपी एक साथ चुनाव लड़ेंगे लेकिन अब इस चर्चा पर रोक लग गई है. दरअसल अकाली दल ने बीजेपी के सामने दो मुख्य मुद्दे रखे थे, इनमें से पहला था किसानों को एमएसपी दिया जाना और दूसरा था बंदी सिखों पर फैसला लेने का. जेल में सजा पूरी होने के बावजूद बंदी सिखों की रिहाई की मांग अकाली दल लंबे समय से करता आ रहा है. पिछले करीब डेढ़ महीने से पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर किसान एमएसपी की मांग को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं और अकाली दल चाहता था कि इस मुद्दे का भी हल निकाला जाए. हालांकि ऐसा नहीं हो सका.