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  • ISRO ने बनाया नया कीर्तिमान, मिशन ‘गगनयान’ के लिए पैराशूट का किया सफल परीक्षण

    ISRO ने बनाया नया कीर्तिमान, मिशन ‘गगनयान’ के लिए पैराशूट का किया सफल परीक्षण

     

    इसरो ने कहा कि तीन मुख्य पैराशूट में से दो अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर उतारने के लिए पर्याप्त हैं लेकिन एक पैराशूट एक्सट्रा होता है. मेन पैराशूट न खुलने से उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखकर ऐसा किया गया है.

    ISRO ने रचा नया कीर्तिमान, मिशन 'गगनयान' के लिए पैराशूट का सफल परीक्षण

    इसरो ने किया ‘इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट.

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत के पहले ‘मेड इन इंडिया’ रॉकेट को लॉन्च किए जाने के बाद एक और सफलता हासिल की है. एजेंसी ने एक और सफल परीक्षण किया है जिसको लेकर कहा जा रहा है कि ये देश के ड्रीम प्रोजेक्ट गगनयान परियोजना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. इसरो द्वारा मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता प्रदर्शित करने वाली पहली परियोजना है. इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बबीना फील्ड फायर रेंज (BFFR) में इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (आईएमएटी) किया है.

    इसरो ने कहा कि आईएमएटी देश की महत्वाकांक्षी गगनयान परियोजना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि गगनयान की गति कम करने की प्रणाली के लिए अपेक्षाकृत छोटे एसीएस, पायलट और ड्रॉग पैराशूट के अलावा तीन मुख्य पैराशूट होते हैं, ताकि लैंडिंग के दौरान क्रू मॉड्यूल की गति को सुरक्षित स्तर तक कम किया जा सके.

     

    एक पैराशूट अतिरिक्त रखा जाता है- इसरो

    इसरो ने कहा कि तीन मुख्य पैराशूट में से दो अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर उतारने के लिए पर्याप्त हैं लेकिन एक पैराशूट एक्सट्रा होता है. इसरो ने आगे कहा कि मुख्य पैराशूट न खुलने से उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखकर ऐसा किया गया है. इस परीक्षण में क्रू मॉड्यूल द्रव्यमान के बराबर पांच टन के डमी द्रव्यमान को 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया और भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान का उपयोग करके गिराया गया.

    2-3 मिनट तक चला पूरा परीक्षण

    शुरुआती झटके को कम करने के लिए मुख्य पैराशूट के आकार को शुरू में एक छोटे से क्षेत्र तक सीमित रखा गया था. ISRO ने बताया, ‘पूरी तरह से फैल चुके मुख्य पैराशूट ने पेलोड की गति को एक सुरक्षित लैंडिंग गति तक कम कर दिया. पूरा क्रम लगभग 2-3 मिनट तक चला और वैज्ञानिकों ने विभिन्न चरणों को सांस रोककर देखा. पेलोड द्रव्यमान जमीन पर धीरे से उतरा और विशाल पैराशूट ढह गया। इसके साथ ही तालियां बज उठी.

    डीआरडीओ, इसरो, सेना का जॉइंट ऑपरेशन

    पैराशूट की गति कम करने की प्रणाली का डिजाइन और विकास इसरो और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का एक जॉइंट कार्यक्रम है. इस महत्वपूर्ण परीक्षण के समय इसरो और डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और वायुसेना के अधिकारी मौजूद थे. इसरो ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा, ‘इसरो और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की क्षमता को साबित करने के अलावा, परीक्षण ने देश की प्रमुख एजेंसियों, इसरो, डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना के बीच सक्रिय समन्वय का भी प्रदर्शन किया.

    सौजन्य TV9 Bharatvarsh