बालाकोट एयर स्ट्राईक के समय भारत जंग के लिए पूरी तरह से तैयार था, रिटा. जनरल कंवजीत ढिल्लों ने बयां की कहानी
नई दिल्ली: बालाकोट एयर स्ट्राइक हुए 4 साल गुजर गए हैं परन्तु पाकिस्तान की नींद अभी भी हराम है। क्योंकि पाकिस्तान भारत से सीधी टक्कर लेने से डरता है। पुलवामा हमले के बाद भारत ने अपने शहीद सैनिकों का बदला पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक करके लिया था। जिसमें कई आतंकियों को भारतीय सेना ने मार गिराया था। इस बात का उल्लेख उस आप्रेशन को लीड करने वाले कमांडर जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों ने हाल ही में अपनी किताब कितने गाडी आए कितने गाजी गए में किया है।
मिली जानकारी के अनुसार भारतीय सेना के रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लों ने एक इंटरव्यू में बालाकोट एयरस्ट्राइक की कहानी बताई है। उन्होंने बताया है कि भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक के लिए पीओके नहीं बल्कि पाकिस्तानी बॉर्डर को पार किया और पुलवामा हमले का बदला लिया। हाल ही में जनरल ढिल्लों की किताब ‘कितने गाजी आए कितने गाजी गए’ का विमोचन हुआ है। अपनी किताब के बारे में बात करते हुए उन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक की अनसुनी कहानी बताई। कैसे भारतीय लड़ाकू विमान ने पाकिस्तानी एयरफोर्स के रडार सिस्टम को भी चकमा दिया और बालाकोट में आतंकी कैंपो पर बमबारी की।’
उन्होंने बताया, ‘भारतीय वायुसेना हथियारों से लैस पाकिस्तान की सीमा में घुसी, ये एक युद्ध की स्थिति थी। वहां बमबारी करके सेना सुरक्षित वापस भी आ गई। इस एयर स्ट्राइक के जरिए भारत सरकार की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी थी। भारत ने मैसेज दिया था कि अगर आप हमें छेड़ेंगे तो हम घर में घुस कर मारेंगे। हम जो कहते हैं वो करते दिखाते हैं। पाकिस्तान के खोखले स्टेटमेंट का प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन हमारी एयरफोर्स जाती है और मारकर सुरक्षित वापस आ जाती है।’







