Tag: दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अमन नगर में माता की चौकी का होगा आयोजन

  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तरफ से जालंधर के साईं दास स्कूल ग्राउंड श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा कंस वध के साथ हुई संपन्न

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तरफ से जालंधर के साईं दास स्कूल ग्राउंड श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा कंस वध के साथ हुई संपन्न

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तरफ से जालंधर के साईं दास स्कूल ग्राउंड श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा कंस वध के साथ हुई संपन्न

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से 17 नवंबर से 23 नवंबर तक चल रही, साईं दास स्कूल ग्राउंड, जालंधर में श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के सप्तम् दिवस की सभा में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी ने बहुत ही सुसज्जित ढंग से भगवान श्रीकृष्ण जी के अलौकिक एवं महान व्यक्तित्व के पहलुओं से अवगत करवाया। रूक्मिणी विवाह प्रसंग के माध्यम से सीख मिलती है कि प्रभु उस आत्मा का वरण करते हैं जिसमें उन्हें प्राप्त करने की सच्ची जिज्ञासा हो ।

    भौमासुर राक्षस की कैद में सोलह हज़ार राजकुमारियां बंदिनी थी। उन्होने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण जी को अपनी रक्षा के लिए पुकार लगायी। इधर इन्द्रदेव ने द्वारिका में जाकर प्रभु को भौमासुर राक्षस के कुकृत्यों के विषय में बताया कि उसने अदिति माता के कुंडल, देवताओं का छत्र और सोलह हज़ार नारियों को चुरा लिया है। प्रभु ये सब सुन कर एक ही निर्णय लेते हैं कि मैं प्रत्येक वस्तु चुराने के लिए उस राक्षस को क्षमा कर सकता हूं परंतु नारी का अपमान मैं सहन नहीं कर सकता। यही कारण था कि प्रभु और भौमासुर में घमासान युद्ध हुआ। राक्षस मारा गया और सोलह हजार नारियों को उस आततायी की कैद से विमुक्त करवाया गया। समाज में उन की पुनः प्रतिष्ठा हेतु प्रभु ने नवयुवकों का आहवान किया। किसी को भी आगे बढ़ता न देख कर स्वयं उनको अपना नाम दिया।

    भौमासुर राक्षस की कैद में सोलह हज़ार राजकुमारियां बंदिनी थी। उन्होने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण जी को अपनी रक्षा के लिए पुकार लगायी। इधर इन्द्रदेव ने द्वारिका में जाकर प्रभु को भौमासुर राक्षस के कुकृत्यों के विषय में बताया कि उसने अदिति माता के कुंडल, देवताओं का छत्र और सोलह हज़ार नारियों को चुरा लिया है। प्रभु ये सब सुन कर एक ही निर्णय लेते हैं कि मैं प्रत्येक वस्तु चुराने के लिए उस राक्षस को क्षमा कर सकता हूं परंतु नारी का अपमान मैं सहन नहीं कर सकता। यही कारण था कि प्रभु और भौमासुर में घमासान युद्ध हुआ। राक्षस मारा गया और सोलह हजार नारियों को उस आततायी की कैद से विमुक्त करवाया गया। समाज में उन की पुनः प्रतिष्ठा हेतु प्रभु ने नवयुवकों का आहवान किया। किसी को भी आगे बढ़ता न देख कर स्वयं उनको अपना नाम दिया।

    क्योंकि भगवान जानते थे समाज में एक नारी की कैसी स्थिति होनी चाहिए। समाज में नारी का क्या स्थान है वो इससे परिचित थे। कहते हैं कि किसी राष्ट्र की स्थिति जाननी हो तो वहां नारी का कैसा दर्जा है उससे अनुमान लगाया जा सकता है। जिस स्थान पर नारी का सम्मान होता है वहां देवता भी निवास करते हैं। नारी नेतृत्व करने वाली, महिला जो पूजा के योग्य है, स्त्री जो प्रेम सद्भावना का विस्तार करती है ऐसा माना गया है। अर्जुन, अभिमन्यु, प्रताप, शिवाजी का चरित्र पढ़िए उनमें असाधारण वीरता थी। वे वीर रत्न माता के उदर से ही महान संस्कार प्राप्त करके उत्पन्न हुए थे। माताओं की पवित्र, उच्च भावना का उनके जीवन पर प्रभाव पड़ा।

    ध्रुव – प्रहलाद में जो अद्भुत भक्ति बल था, वह सब उनकी जननी के संस्कारों का प्रभाव था। मदालसा देवी जब अपने पुत्रों को पालने में सुलाती तो उस समय उनको आध्यात्मिक भावनाओं से पूर्ण लोरियां सुनाती थी। झांसी की रानी, ताराबाई, रानी किरणवती, गार्गी, अपाला, घोषा इत्यादि महान नारियों को भारत का इतिहास कभी नहीं भुला सकता।

    परंतु आज की सदी में जहां विज्ञान और कम्पयूटर का युग है वहां नारियों को माँ की कोख में ही मार दिया जाता है। कन्याभ्रूण हत्या जैसी भयंकर बीमारी आज हमारे समूचे समाज में फैल चुकी है। नवरात्रों के दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूप के रूप में जिन कंजकों को हम पूजते हैं उसी माँ के स्वरूप को अपने घर में आने से पहले ही मार देते हैं। हम विद्या के लिए देवी सरस्वती, शक्ति के लिए देवी दुर्गा, धन के लिए देवी लक्ष्मी का पूजन करते हैं।

    क्या ये सब नारियां नहीं? आज हमें अपनी रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा। नारी को आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर दें। नारी को भी अपनी आत्म रक्षा के लिए अपनी भीतर की सोई हुई शक्तियों से परिचित होना होगा। यह मात्र ब्रह्मज्ञान से ही संभव है।

     

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  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से ज्ञान की पयस्विनी श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ में साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी साध्वी जी ने प्रहलाद प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध का किया मार्मिक चित्रण

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से ज्ञान की पयस्विनी श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ में साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी साध्वी जी ने प्रहलाद प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध का किया मार्मिक चित्रण

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से ज्ञान की पयस्विनी श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ में साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी साध्वी जी ने प्रहलाद प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध का किया मार्मिक चित्रण

    MBD NEWS: ( सुमेश शर्मा) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से ज्ञान की पयस्विनी श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिवस में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी साध्वी जी ने प्रहलाद प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध का मार्मिक चित्रण किया । प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यपु के द्वारा उसे पहाड़ की चोटी से नीचे फैंका गया, विषपान करवाया, मस्त हाथी के आगे डाला गया। परंतु भक्त प्रहलाद भक्तिमार्ग से विचलित न हुए। परंतु भक्त प्रहलाद भक्तिमार्ग से विचलित न हुए।

    विपदा या मुसीबत भक्त के जीवन को निखारने के लिए आते हैं। जिस प्रकार से सोना आग की भट्टी में तप कर ही कुंदन बनता है। ठीक वैसे ही भक्ति की चमक विपदाओं के आने पर ही देदीप्यमान होती है। दूसरी बात यह कि जो भीतर की शक्ति को नहीं जानता, वह इनसे घबराते हैं समाज में युवा ही बदलाव लाते युवा में अद्भुत शक्ति समाहित होती है।

    असंभव कार्य को संभव करना युवाओं को ही आता है। जब-जब भी समाज का कायाकल्प करने के लिये नौजवान आगे बढ़े, तब समाज ने नूतन परिवर्तन सामने पाया । संकट चाहे सीमाओं का हो या राजनैतिक इस के निवारण के लिये युवक-युवतियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया है। परंतु आज युवा पथभ्रष्ट हो चुका है। नशाखोरी, अश्लीलता, चरित्रहीनता आदि व्यसन उन के जीवन में आ चुके हैं। उन्हें देश, समाज से कुछ लेना देना नहीं है।

    हमें समझना होगा कि यौवन इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि हम कितने छोटे हैं, अपितु इस पर कि हम में विकसित होने की क्षमता एवं प्रगति करने की योग्यता कितनी है। विकसित होने का अर्थ हैअंतरनिहित शक्तियों का जागरण । जब शक्ति का जागरण होता है तो सर्वप्रथम व्यक्ति मानव बनता है फिर वह अपनी संस्कृति से प्रेम करता है। तब मां भारती के लिए मरमिटने की भावनाएं पैदा होती हैं। आध्यात्मिक ऊर्जा के मन में स्पंदित होते ही कर्तव्य बोध, दिशा बोध का भान होता है। जब दिशा का पता चलता है तो दशा सुधर जाती है।

    स्वामी विवेकानंद जी, स्वामी रामतीर्थ जी महान देशभक्त हुए हैं। इन्होने विदेशों में जाकर भारतीय संस्कृति का बिगुल बजाया तो इसके पीछे आध्यात्मिक शक्ति ही कार्यरत थी। श्रीमद् भगवदगीता युवकों का आहवान करती हैकि ब्रह्मज्ञान को प्राप्त कर अपनी ऊर्जा को पहचानें। अर्जुन जैसा नवयुवक आत्मज्ञान को प्राप्त कर अपनी शक्ति को पहचान पाया था। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा- मैं युवाओं में लोहे की मांस पेशियां और फौलाद की नस नाड़ियां देखना चाहता हूं। भारत में शिक्षित युवाओं का होना सौभाग्य की बात है। परंतु विवेकवान जाग्रत युवाओं का होना परम सौभाग्य की बात है । अघासुर की लीला से प्रभु ने बताया कि भोग विषयों के समान हैं जो हमें अपनी ओर खींचते हैं। परंतु ये अपूर्ण हैं। ये अशांति के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकते । अध्यात्म की शरण में जाने से परम शांति की अनुभूति होती है ।

    अग्नि में बैठे भक्त की प्रभु ने रक्षा की। होलिका जल कर राख हो गयी। आज भी होलिका दहन का प्रचलन है। होली जिन रंगों से खेली जाती है। वे रंग तो पानी से धुल जाते हैं परंतु जो ईश्वर दर्शन कर भीतरी जगत में भक्ति के रंगों से होली मनाता है – वह विचित्र है। क्योंकि वे रंग और प्रगाढ़ हो जाते हैं। जन्मों-जन्म के लिये भगवान से संबंध स्थापित होता है। होली उत्सव कथा में मनाया गया। उसके पश्चात् भक्त की रक्षा करने प्रभु स्तम्भ में से प्रकट होते हैं। नरसिंह अवतार धारण कर उन्होने अधर्म और अन्याय को समाप्त कर सत्य की पताका को फहराया।

    स्वामी विश्वानंद, स्वामी सदानंद, स्वामी सज्जनानंद, सुखदेव सिंह ,साध्वी पल्लवी भारती, साध्वी शशि भारती, साध्वी कंवल भारती, साध्वी त्रिनयना भारती ,श्री दीपक बाली (कला भाषा संस्कृति सलाहकार, दिल्ली सरकार), राजविंदर कौर थियारा (हल्का प्रभारी जल कैंट),श्री राजिंदर बेरी पूर्व विधायक जल, ⁠डॉ नवजोत दहिया (हल्का प्रभारी एनकेडी), राजिंदर सिंह सेवानिवृत्त एसएसपी करतारपुर, सुभाष सौंधी पीबी अध्यक्ष- भावाधस, ब्रिग. एसके कौल जल छावनी, ओमपाल सिंह सीईओ छावनी परिषद, गुलशन अरोड़ा एडवोकेट, वीरेंद्र सचदेवा (कराधान सलाहकार), हरद्वारीदयाल यादव (समाज सेवी) सामाजिक कार्यकर्ता, विक्रांत शर्मा डीन जीएनए, राजेश भट्टी, भगवान वाल्मिकी धर्म सभा, अमित सहगल- पीएचजी गेट इलेक्ट्रिक डीलर, ⁠सुरेश गुप्ता, जतिंदर सहगल, गगन छाबड़ा, रॉबिन गुप्ता, अजय सचदेवा, ⁠संजय अरोड़ा, प्रवेश गुलाटी, भज गोविंदम रेस्टोरेंट, ⁠शिव दुर्गा मंदिर कमेटी बस्ती गुजां,अमित तलवार (शिवा टेक) परिवार के साथ पवन कुमार व्यवसायी (पवन औद्योगिक निगम), अंकुर अग्रवाल, अनिल अग्रवाल (अग्रवाल कॉपी हाउस), विक्की गुप्ता, नवीन शर्मा व्यवसायी कुमुद शर्मा(नवीन ट्रेडर्स), अनूप ढींगरा- ढींगरा ब्रदर्स एंड इंडिया आदि मौजूद थे।

  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन से पहले निकाली विशाल कलश यात्रा,पूरा शहर हुआ कृष्णमय..

     

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन से पहले निकाली विशाल कलश यात्रा,पूरा शहर हुआ कृष्णमय..

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    MBD NEWS (सुमेश शर्मा) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक प्रकल्प मंथन जो कि गरीब बच्चों की शिक्षा हेतु चलाया जा रहा है। उसके अंतर्गत जालंधर वासियों के सहयोग द्वारा 17 नवंबर से 23 नवंबर तक। साईं दास स्कूल ग्राउंड, पटेल चौंक, गोपाल नगर, जालंधर में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।

    स्वामी सज्जनानंद ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कथा का समय शाम 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक रहेगा। कथा का वाचन करने के लिए विश्व विख्यात भागवताचार्य साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी जालंधर शहर पधार रही हैं। इसी उपलक्ष्य में जालंधर शहर में भव्य विशाल कलश यात्रा निकाली गई। कथा स्थल से मंगल कलश यात्रा शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए वापिस कथा स्थल पर पहुंची।

     

     

    विस्तृत जानकारी देते हुए स्वामी सज्जनानंद ने बताया कि असंख्य सौभाग्यशाली महिलाओं ने पीत वस्त्रों में अपने शीश पर कलश धारण कर विश्व की मंगल कामना के लिए शहर की परिक्रमा की। कलश यात्रा का शुभारंभ जालंधर कैंट के सीईओ ओम पाल सिंह एवं ब्रिगेडियर सुनील कुमार के परिवार द्वारा विधिवत् पूजन करवाकर हुआ।

    इसके पश्चात नारियल फोड़ कर यात्रा को रवाना किया गया। कलश यात्रा में भगवान श्री कृष्ण जी की बहुत सुंदर पालकी बनाई गई। गोप मंडली द्वारा यात्रा में कीर्तन एवं नृत्य किया गया। वेद पाठियों की सुंदर झांकी द्वारा वेदों का घर घर गुणगान हो, ऐसा संदेश दिया गया। कलश यात्रा दौरान शहर का नज़ारा ऐसा लग रहा था मानों जालंधर वृंदावन बन गया हो। कलश यात्रा का स्वागत करने के लिए स्थान स्थान पर शहर की विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं एवं शहर वासियों द्वारा फूलों की वर्षा की गई, लंगर, जल, प्रसाद आदि के स्टॉल्स लगाए गए। स्वामी जी ने बताया कलश यात्रा में तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ-साथ 33 कोटि देवी देवता स्वयं कलश में विराजमान होते हैं। वहीं कलश को धारण करने वाले जहां से भी शहर का भ्रमण करते हैं वहीं की धरा स्वयं सिद्व होती जाती है। जो अपने सिर पर कलश धारण करता है उसकी आत्मा को ईश्वर पवित्र और निर्मल करते हुए अपनी शरण में ले लेते हैं। आगे जानकारी देते हुए स्वामी जी ने बताया कि श्री मद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ की सारी व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी है। सुंदर पंडाल संगत के लिए सज चुका है। श्री कृष्ण जी एवं गौ मैया का सुंदर दरबार सज चुका है। सारी संगत इस भव्य आयोजन में सादर आमंत्रित है। इस दौरान विधायक रमन अरोड़ा, दीपक बाली, राजेश विज, रमेश शर्मा, दविंदर रोनी पार्षद, महेश गुप्ता, कुमुद शर्मा, लक्की पंचवटी गौशाला, योगेश धीर अमित सहगल आदि मौजूद थे

  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान नूरमहल आश्रम द्वारा प्रदूषण मुक्त तरीके से पूरे हर्षोल्लास व उमंग से दिव्य दिवाली का हुआ भव्य आयोजन

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान नूरमहल आश्रम द्वारा प्रदूषण मुक्त तरीके से पूरे हर्षोल्लास व उमंग से दिव्य दिवाली का हुआ भव्य आयोजन

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान नूरमहल आश्रम द्वारा प्रदूषण मुक्त तरीके से पूरे हर्षोल्लास व उमंग से दिव्य दिवाली का हुआ भव्य आयोजन

     

    MBD NEWS : (सुमेश शर्मा) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल आश्रम में प्रदूषण मुक्त हर्षोल्लास व उमंग से भरी दिव्य दिवाली का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ सामूहिक संध्या आरती के साथ किया गया। जिसमें पंडाल में उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं ने हाथ में दिया लेकर अपने भाव अर्पित किये।

    इसके उपरांत श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी जयन्ती भारती जी ने दिवाली पर्व में आध्यात्मिक व सामाजिक रहस्यों को उजागर करते हुए बताया कि दिवाली में जब दीये को प्रज्जवलित किया जाता है तो उसे नमन किया जाता है।

    उन्होंने बताया कि दिया वंदनीय इसलिए होता है क्यूंकि वो औरों के लिए जलता है, ना की औरों से जलता है। इसलिए दिवाली में हर वर्ष हम घरों की सफाई तो खूब करते हैं किन्तु आज हमें अपने हृदय के किवाड़ खोल कर उन समस्त नकारात्मक विचारों को बाहर निकाल देना चाहिए जो आत्मा को अशांत करते हैं क्यूंकि आत्मा का अशांत होना देह की देहांत होने से ज्यादा दुखदायी होता है।

    इसके उपरांत स्वामी विश्वानंद जी ने पंडाल में उपस्थित संगत को शपथ ग्रहण करवाई। जिसमें उन्होंने इस पर्व पर पर्यावरण के प्रति, अपनी जिम्मेदारी निभाने का, पटाखों का प्रयोग ना करने का, पेड़ लगाने का, अपने आस-पास को स्वच्छ और हरा-भरा रखने का संकल्प लिया।


    प्राकृतिक रंगों से सजी रंगोलियां, हस्तकला व कलाकृतियां, मिट्टी के दियों से जगमग परिसर, आकर्षक मुक्त वातावरण, नृत्य प्रस्तुति इत्यादि को देख कर हर कोई नूरमहल की दिव्य दिवाली भजन गुनगुनाता जा रहा था।

     

  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल आश्रम में वैशाखी के पर्व पर मासिक भंडारे का किया गया आयोजन

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल आश्रम में वैशाखी के पर्व पर मासिक भंडारे का किया गया आयोजन

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल आश्रम में वैशाखी के पर्व पर मासिक भंडारे का किया गया आयोजन

    MBD NEWS; (सुमेश शर्मा)दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल आश्रम में वैशाखी के पर्व पर मासिक भंडारे का आयोजन किया गया। मंच सञ्चालन में स्वामी उमेशानंद जी बताया कि जब एक साधक अपने जीवन में गुरु की वाणी, उसके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर लेता है तो उसका जीवन पवित्रता की राह पर चलता हुआ सर्वश्रेष्ठता को हासिल करता है। उसी गुरु की वाणी को वैशाखी के विशेष पर्व पर स्वामी यशेश्वरानन्द जी ने गुरबाणी शबद ‘वैशाख धीरनि क्यूँ वाडीयां जिना प्रेम बिछोह’ के द्वारा प्रस्तुत किया।


    जिसके बारे में आगे सत्संग समागम में स्वामी रणजीतानन्द जी ने बताया कि वैशाखी का पर्व प्रत्येक इंसान के लिए खुशी का दिन होता है, किन्तु एक साधक के जीवन में बसंत, हरियाली तभी आती है जब उसका मिलन अपने प्रियतम प्यारे प्रभु से हो जाता है। इसी के साथ साधवी संयोगिता भारती जी ने बताया कि गुरु का निष्ठावान सेवक बनने के लिए जीवन में तीन सूत्रों -उत्साह, तपस्या और समर्पण को अपने जीवन में धारण करना चाहिए। इसे अपनाकर एक सेवक अपने अर्थहीन जीवन को अर्थपूर्ण बना सकता है। अंत में आए हुई संगत ने भजनों में मंत्र मुग्ध होए प्रभु भक्ति में डूब कर इस पर्व का भरपूर आनंद मनाया।

  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर द्वारा श्रीराम कथामृत कार्यक्रम के अंतर्गत कथा सुन भाव विभोर हुए भक्तजन..

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर द्वारा श्रीराम कथामृत कार्यक्रम के अंतर्गत कथा सुन भाव विभोर हुए भक्तजन..

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर द्वारा श्रीराम कथामृत कार्यक्रम के अंतर्गत कथा सुन भाव विभोर हुए भक्तजन…

    MBD WEB NEWS:(सुमेश शर्मा) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर द्वारा श्रीराम कथामृत कार्यक्रम के अंतर्गत तीसरे दिन की कथा में परम वंदनीय गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या मानस मर्मज्ञा साध्वी सुश्री जंयती भारती जी ने सीता स्वयंवर प्रसंग का वाचन किया। प्रसंग में उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रभु श्रीराम जी अपनी दिव्य लीलाओं को करते हुए ताड़का का वध करते हैं व आगे बढ़ते हुए गौतम ऋषि की पत्नी अहल्या का उद्धार करते हैं। यज्ञ की रक्षा के उपरान्त गुरू विश्वामित्र जी के साथ जनकपुरी में प्रवेश करते हैं। साध्वी जंयती भारती जी ने बताया कि श्रीराम का श्रीजानकी जी से प्रथम मिलन पुष्प वाटिका में होता है। यहीं से शुरू होता है जानकी जी का आदर्श चरित्र । उन्होंने बताया कि यह पुष्प वाटिका क्या है? संत समाज का प्रतीक है। जब हमारे जीवन में सत्संग का आगमन होता है तब हमारा मिलन प्रभु एवं भक्ति से होता है। उन्होने बताया कि सत्संग दो शब्दो के सुमेल से बना है सत् व संग, सत् का भाव ईश्वर एवं संग का भाव मिलाप । अर्थात् जब तक हम ईश्वर से नहीं मिल पाते, उसका साक्षात्कार नहीं कर लेते तब तक जीवन में सत्संग नहीं हो सकता। क्योंकि सत्संग मात्र बातें या चर्चा का विषय नहीं वरन् सम्पूर्ण व्यवहारिकता है। हमारे जीवन में वास्तविक सत्संग तब घटित होगा जब हम उस एक अर्थात ईश्वर को जान लेगें । परन्तु अब यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि ईश्वर से कौन मिलाएगा ? मात्र गुरू, क्योंकि वो ही है जो हमारे तम को तिरोहित कर हमारे घट में ईश्वर का अपरोक्ष अनुभव करवा सकता है। प्रभु श्रीराम जब स्वयंवर सभा में पहुंचे तो महाराज जनक की शर्त के अनुसार प्रभु ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और उसे भंग कर दिया। प्रभु की प्रत्येक लीला के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक रहस्य निहित होता है और यह लीला भी हमें संदेश दे रही है । धनुष प्रतीक है अंहकार का। जब तक आप के अन्तः करण में अहंकार के मेघ हैं, तब तक प्रभु रूपी राम और आत्मा रूपी सीता का मिलन सम्भव हो ही नहीं सकता।

    भारती जी ने बताया कि प्रभु श्रीराम व जानकी जी का स्वयंवर पूर्ण होने के पश्चात महाराज जनक जी कहते हैं कि आज मैं कृतकृत्य हो गया । कृतकृत्य का भाव है कि अब मेरे जीवन मैं कुछ भी पाना शेष नहीं रह गया। साध्वी जी ने बताया कि ऐसी स्थिति हमारे जीवन में कब आयेगी? जब हमारे जीवन में भी चार चरणों का आगमन होगा, जब हमारे जीवन में ये चार घटनायें घटती हैं तब हमारे जीवन में कृत्यता आती है। पहली ताड़का का वध | ताड़का प्रतीक है हमारी दुराशा की व अहल्या उद्धार का वृतांत आता है अहल्या हमारी बुद्धि की जड़ता की प्रतीक है जब तक हमारी बुद्धि की जड़ता व अंहकाररूपी धनुष भंग न हो, चित्त प्रभु की ओर खिंच नहीं जाता तब तक जीवन आनंदित नहीं हो पायेगा। हमारे जीवन में शांति तभी आयेगी जब हम राम को जान लेंगे। क्योंकि परमात्मा मानने का नहीं जानने का विषय है

    परमात्मा बातों का नहीं देखनें का विषय है व जब तक हम परमात्मा को देख नहीं लेते तब तक हमारा विश्वास हमारा प्रेम प्रभु के श्री चरणों में नहीं हो सकता। स्वामी विवेकानंद जी भी कहते हैं कि यदि परमात्मा है तो उसे देखो, आत्मा है तो उसे जानो।

    परमात्मा को देखना ही हमारे जीवन का लक्ष्य है। गुरु ही ईश्वर को दिखाने की क्षमता रखता है। कथा समागम के दौरान भाव विभोर श्रद्धालुओं का सैलाब प्रतिदिन इन कथा प्रवचनों को श्रवण करने के लिए उमड़ रहा व कथा का समापन विधिवत प्रभु की आरती के साथ हुआ।

    कप्तान गुरमीत सिंह

    सुश्री। शालू w/o रोमी जी

    अरुण होंडा

    रोहित होंडा

    अश्वन गोल्डी

    डॉ अश्विनी शीतल

    पंकज शर्मा
    और पत्नी.. अनीशा शर्मा
    दिनेश शर्मा
    2. प्रभातचंद शर्मा
    3. जतिंदर शर्मा
    विकास बग्गा
    ओंकार राजीव
    दीपक कौशल
    रमेश अवस्थी
    हरिंदर शर्मा
    अशोक भारद्वाज
    संजीव सोढ़ी
    परम लखनपाल
    देश बंधु शर्मा
    धीरज
    अशोक कुमार
    पंडित मेघराज
    पंडित उमेश झा
    प्रदीप शर्मा
    स्वामी गिरधरानंद
    स्वामी सज्जनानंद
    स्वामी रंजीतानंद
    साध्वी पल्लवी भारती
    साध्वी कंवल भारती
    साध्वी शशि भारती

  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने अमन नगर जालंधर में माता की भव्य चौकी का हुआ आयोजन 

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने अमन नगर जालंधर में माता की भव्य चौकी का हुआ आयोजन 

    MBD WEB NEWS (सुमेश शर्मा) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से अमन नगर, नजदीक पठानकोट चौक, जालंधर में माता की चौकी का आयोजन किया गया, जिसमें परम पूजनीय श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री मंगलावती भारती जी ने महामाई का गुणगान करते हुए माँ के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों ही भक्तों श्रद्धालुओं महामाई के आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए पहुंचे

    साध्वी जी ने बताया कि समाज में बुराइयों को ख़त्म करने के लिए मां ने विभिन्न स्वरूपों को धारण किया।वास्तव में मां एक शक्ति है जो सारे संसार का सृजन पालन और संहार करती है। यूं तो विश्व भर में अनेकों रुपो में शक्ति की उपासना की जाती है लेकिन भारत शक्ति उपासना का केन्द्र है ।

    एकमात्र भारत ही ऐसा देश है जहां शक्ति को मां कहकर पुकारा जाता है ।मां जो अतुल्य आनन्द एवं मात्रतव का स्रोत है जो सदा अबाध रूप में बहता है ।हमारे ग्रंथों में इस कारण माँ को अग्रणय स्थान प्रदान किया गया है जैसे शास्त्र में लिखा है। माता को सबसे पहले नमन किया गया है क्योंकि मां एक शिशु के निर्माण में श्रेष्ठ भूमिका निभाती है ।

    जिस प्रकार लौकिक मां अपने बालक के विकास के लिए कभी स्नेह की वर्षा करती है तो कभी क्रोध करती है ।उसी प्रकार मां भगवती जगदम्बा भी हम मानवों के कल्याण हेतु विविध रूप धारण कर इस धरा पर अवतरित होती है ।

    साध्वी जी ने कहा कि आज मानव देवी मां की आराधना तो मन से करता है परन्तु उसे जन्म देने वाली मां वृद्ध आश्रम में देखने को मिल रही है ।यदि परिवार में हम जन्म देने वाले माता पिता का सम्मान नहीं करेंगे तो वह जगदम्बिका भवानी हम पर कभी प्रसन्न नहीं होगी अगर हम देवी मां की प्रसन्नता को हासिल करना चाहते हैं तो ईश्वर द्वारा बनाए गए हर रिश्ते का सम्मान करना होगा ।अंत में साध्वी बहनों द्वारा सुमधुर भजनों और मां की भेंटो का गुणगान कर श्रद्धालुओं को मंत्र मुग्ध किया गया ।

    इस मौके पर सांसद संतोख चौधरी, दिनेश ढल्ल, अमित ढल्ल, विधायक रमन अरोड़ा, बलराज ठाकुर, रमेश शर्मा, पार्षद शैली खन्ना, डा. बी डी शर्मा, डिजिटल मीडिया एसोसिएशन से परदीप वर्मा, अजीत सिंह बुलंद, सुमेश शर्मा, पंकज सिब्बल, यशपाल ठाकरे, पार्षद माइक खोसला, अजय भारद्वाज, अवनीप देओरा, अजय मल्होत्रा, दीनानाथ प्रधान, अमित सहगल, विजय महाजन, मनोज, राम चंद्र, जीतू आदि मौजूद थे।

  • दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अमन नगर में माता की चौकी का होगा आयोजन

    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अमन नगर में माता की चौकी का होगा आयोजन

    *दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अमन नगर में माता की चौकी का आयोजन किया जा रहा है*

    माँ एक शब्द ही नहीं बल्कि किसी भी मनुष्य की चेतना का एक मूलभूत स्तंभ है :- स्वामी सज्जनानंद जी

    MBD Web News जालन्धर:- (सुमेश शर्मा )दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं समूह अमन नगर निवासी तथा अमन नगर वेलफेयर सोसाइटी की ओर से अमन नगर डा. बी. डी शर्मा क्लीनिक के सामने वाले मैदान में भव्य माता की चौकी होने जा रही है। स्वामी सज्जनानंद ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया। यह कार्यक्रम 8 अक्टूबर शाम 8 बजे से 11 बजे तक होने जा रहा है। माता रानी की सुंदर भेंटों का गुणगान करने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी मंगलावती भारती, साध्वी पल्लवी भारती अपनी संत मंडली के साथ दिल्ली से जालंधर पहुंच रहीं हैं। माँ एक शब्द ही नहीं बल्कि किसी भी मनुष्य की चेतना का एक मूलभूत स्तंभ है और इस स्तंभ का नाम है स्नेह, प्रेम, ममता अर्थात माँ। माँ की महिमा की व्याख्या हम शब्दों में कभी पूरी नहीं कर सकते है। माँ की ममता की व्याख्या सहज नहीं है। मां ममता की अगाध सागर है। माँ के आंचल को इस संसार में सबसे सुरक्षित और सुखद स्थान माना गया है। बालक जब कभी भी असुरक्षित महसूस करता है तो माँ का आँचल उसे सुरक्षा और सुकून देता है। इस तरह माँ हमारा सबसे बड़ी संरक्षक होती है। इस दौरान सभी भक्तों के लिए लंगर की व्यवस्था रहेगी। सभी व्यवस्थाएं मुकम्मत कर ली गईं है। इस दौरान डा. बी. डी शर्मा, गुरमीत सिंह, जसजीत सिंह, राज कुमार, अमरजीत सिंह, गुरुदेव सिंह, सुरिंदर कुमार, ओम प्रकाश, सुभाष, मुसाफिर सिंह, अवलीन तिवारी, हरप्रीत विरदी, सुरजीत कुमार, राजू, कन्नायिया, राजीव दुग्गल, अमन सूद आदि सदस्यों ने सभी शहरवासियों को माता रानी की चौकी पर पहुंचने की अपील की।